अमेरिकी नागरिकों को तुरंत ईरान छोड़ने की चेतावनी, बढ़ते तनाव के बीच एडवाइजरी जारी

अमेरिकी नागरिकों को तुरंत ईरान छोड़ने की चेतावनी, बढ़ते तनाव के बीच एडवाइजरी जारी

वॉशिंगटन, 06 फ़रवरी 2026 । मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच अमेरिका ने अपने नागरिकों को ईरान तुरंत छोड़ने की चेतावनी जारी की है। अमेरिकी विदेश विभाग ने एक आधिकारिक ट्रैवल एडवाइजरी जारी कर कहा है कि सुरक्षा परिस्थितियां तेजी से बदल सकती हैं, इसलिए जो अमेरिकी नागरिक ईरान में मौजूद हैं, वे जल्द से जल्द सुरक्षित तरीके से देश छोड़ दें।

अमेरिका ने ईरान में रह रहे अपने नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने की सख्त चेतावनी दी है। वर्चुअल अमेरिकी दूतावास ने कहा है कि देश में सुरक्षा की स्थिति बेहद खराब हो गई है। बढ़ती अशांति, पाबंदियां और यात्रा में रुकावटें लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन रही हैं।

एम्बेसी ने साफ कहा है कि जल्द से जल्द ईरान छोड़ दें। अपने निकलने का प्लान खुद बनाएं और इसमें अमेरिकी सरकार की मदद पर भरोसा न करें। मौजूदा हालात में आधिकारिक सहायता बेहद सीमित है।

ईरान में देशव्यापी विरोध प्रदर्शन और अशांति के कारण सुरक्षा व्यवस्था सख्त हो गई है। सड़कें बंद हैं, सार्वजनिक परिवहन ठप है, इंटरनेट और मोबाइल-लैंडलाइन सेवाएं बार-बार बाधित हो रही हैं। कई एयरलाइंस ने ईरान आने-जाने वाली उड़ानों को सीमित या रद्द कर दिया है, जिससे बाहर निकलना और भी मुश्किल हो गया है।

इस बीच अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु वार्ता आज ओमान की राजधानी मस्कट में शुरू हो रही है। यह पिछले करीब नौ महीनों में दोनों देशों के बीच पहली औपचारिक बैठक है, जो जून 2025 में हुए संघर्ष के बाद से निलंबित थी।

विश्लेषकों का मानना है कि यह चेतावनी क्षेत्र में हालिया सैन्य गतिविधियों, कूटनीतिक बयानबाजी और संभावित प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष टकराव की आशंकाओं से जुड़ी हो सकती है। अमेरिका और ईरान के संबंध पिछले कई वर्षों से तनावपूर्ण रहे हैं, जिनमें परमाणु समझौता, प्रतिबंध और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर विवाद प्रमुख रहे हैं।

ट्रैवल एडवाइजरी में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो हवाई सेवाएं और सीमाएं प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में नागरिकों को वैकल्पिक मार्गों और आपातकालीन संपर्क नंबरों की जानकारी पहले से जुटाने की सलाह दी गई है।

इस चेतावनी के बाद अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें मध्य-पूर्व की स्थिति पर टिकी हैं। यदि तनाव और बढ़ता है, तो इसका प्रभाव वैश्विक तेल बाजार, कूटनीतिक संबंधों और क्षेत्रीय स्थिरता पर भी पड़ सकता है।