भारत पर अमेरिकी एक्स्ट्रा टैरिफ आज से खत्म, व्यापार को बड़ी राहत

भारत पर अमेरिकी एक्स्ट्रा टैरिफ आज से खत्म, व्यापार को बड़ी राहत

नई दिल्ली, 07 फ़रवरी 2026 । भारत और अमेरिका के बीच व्यापार में बड़ी सकारात्मक खबर आई है: अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ को आज से हटा दिया है। इस फैसले से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में राहत मिलेगी और दोनों देशों के बीच व्यापारिक रिश्तों में मजबूती आएगी।

भारत और अमेरिका ने शुक्रवार को अंतरिम व्यापार समझौते (ITA ) का फ्रेमवर्क जारी किया है। इसके तहत भारतीय सामान पर अमेरिका का टैक्स 50% घटाकर 18% कर दिया गया है। रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर लगाया गया 25% अतिरिक्त टैक्स भी हटा लिया गया है।

दोनों देशों ने कहा कि इस फ्रेमवर्क को जल्द लागू किया जाएगा और व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) की दिशा में बातचीत आगे बढ़ेगी। भारत-अमेरिका के संयुक्त बयान के मुताबिक, यह फ्रेमवर्क 13 फरवरी 2025 को शुरू हुई भारत-अमेरिका BTA वार्ता को आगे बढ़ाएगा।

इस समझौते में आगे चलकर बाजार पहुंच, सप्लाई चेन को मजबूत करने और ट्रेड बैरियर कम करने जैसे प्रावधान शामिल होंगे। इसके तहत भारत अमेरिकी औद्योगिक वस्तुओं पर सभी टैरिफ खत्म या कम करेगा। कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 27.18 लाख करोड़ रुपये) के बाजार को खोलेगा।

उनके मुताबिक, MSME, किसान और मछुआरे सबसे बड़े लाभार्थी होंगे और इससे महिलाओं और युवाओं के लिए लाखों नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। इसके अलावा भारत ने अगले पांच साल में अमेरिका से 500 अरब डॉलर (45 लाख 30 हजार करोड़ रुपये) के उत्पाद खरीदने पर सहमति जताई है।

व्हाइट हाउस की घोषणा के अनुसार 7 फरवरी 2026 से भारत से आने वाले सामान पर लगाया गया 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ निरस्त कर दिया गया है। इस अतिरिक्त शुल्क को अमेरिका ने पिछले साल रूस से तेल खरीद को लेकर लगाया था, लेकिन नई व्यापार समझौते के तहत इसे हटाया गया है। अब भारतीय सामान पर सिर्फ नियमित टैक्स/टैरिफ लागू होगा।

इस बदलाव का कारण और समझौता यह है कि भारत ने रूस से कच्चे तेल की खरीद को धीरे-धीरे कम करने का वादा किया है और इसके बदले अमेरिका ने अतिरिक्त शुल्क हटाने का निर्णय लिया। दोनों देशों ने व्यापक व्यापार सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाए हैं।

विश्लेषकों के मुताबिक, इस फैसले से भारतीय निर्यात विशेष रूप से वस्त्र, आभूषण, मशीनरी और कृषि उत्पादों के लिए अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है, जिससे निर्यात व्यवसाय और अर्थव्यवस्था को लाभ होगा।