वोटर लिस्ट रिवीजन: केरल के बाद तमिलनाडु में बायकॉट

वोटर लिस्ट रिवीजन: केरल के बाद तमिलनाडु में बायकॉट

तमिलनाडु , 18 नवम्बर 2025 । देश में जारी मतदाता सूची पुनरीक्षण (Voter List Revision) प्रक्रिया के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। केरल में जहां कुछ संगठनों और राजनीतिक समूहों ने इस प्रक्रिया का विरोध करते हुए बायकॉट की अपील की थी, अब वही माहौल पड़ोसी राज्य तमिलनाडु में भी उभर रहा है। राज्य में कई नागरिक समूहों और स्थानीय संगठनों ने दावा किया है कि मतदाता सूची के अपडेट में लगातार गड़बड़ियाँ, नाम हटने की शिकायतें और सर्वे के दौरान लोगों से अनुचित सवाल पूछे जाने के कारण जनता में असंतोष बढ़ रहा है।

निर्वाचन आयोग के मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर पश्चिम बंगाल के बाद केरल और तमिलनाडु में विरोध बढ़ता जा रहा है। तमिलनाडु के BLO के साथ ही तहसीलदार लेवल तक के अधिकारियों ने मंगलवार से बायकॉट का ऐलान किया है।

तमिलनाडु राजस्व कर्मचारी संघों के संगठन ने कहा कि वे वर्कलोड, कम लोग, टाइम लिमिट दबाव और अधूरी ट्रेनिंग और मेहनताने विरोध में प्रदर्शन करेंगे।

इधर, केरल सरकार ने स्थानीय निकाय चुनाव पूरे होने तक SIR स्थगित करने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। राज्य का तर्क है कि स्थानीय चुनावों के साथ-साथ SIR कराना कठिन है।

चुनाव आयोग के मुताबिक 12 राज्यों-UT में अब तक 50.11 करोड़ फॉर्म बांटे जा चुके हैं। 98.32% वोटर्स तक फॉर्म पहुंच गए हैं।

IUML ने SIR प्रक्रिया रोकने SC में याचिका दी

इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) ने केरल में चल रही SIR प्रक्रिया को रोकने की मांग करते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है। इसमें कहा गया है कि SIR और स्थानीय निकाय चुनावों को साथ-साथ नहीं कराया जा सकता।

याचिका में कहा गया है कि राज्य में 9 और 11 दिसंबर को दो चरणों में स्थानीय निकाय चुनावों होने वाले हैं, जबकि SIR ड्राफ्ट 4 दिसंबर को पब्लिश होनी है। इससे निकाय चुनाव की प्रक्रिया पर असर पड़ेगा।

चुनाव आयोग ने तमिलनाडु की घटनाओं पर नोटिस लेते हुए जिला अधिकारियों को मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सरल बनाने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि कोई भी व्यक्ति चाहे तो ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपना नाम जांच सकता है, गलतियों की शिकायत कर सकता है और नए आवेदन दाखिल कर सकता है।

इसके बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता की कमी और शहरी क्षेत्रों में प्रक्रिया से असंतोष के चलते बायकॉट का स्वर तेजी से फैल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर लोगों ने इस प्रक्रिया से दूरी बनाई, तो आगामी राज्य और लोकसभा चुनावों में बड़ी संख्या में मतदाता वंचित हो सकते हैं।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और चुनाव आयोग किस तरह से संवाद बढ़ाकर इस अविश्वास को खत्म करते हैं और क्या केरल एवं तमिलनाडु की ये घटनाएँ अन्य राज्यों को भी प्रभावित करती हैं।