क्या है HPV वैक्सीन? 1.15 करोड़ बच्चियों को मिलेगा सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षा कवच
नई दिल्ली, 28 फ़रवरी 2026 । Narendra Modi द्वारा HPV वैक्सीन अभियान की शुरुआत के बाद देशभर में इसे लेकर जागरूकता बढ़ी है। यह पहल किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से बचाने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है। अनुमान है कि इस अभियान से लगभग 1.15 करोड़ बच्चियों को लाभ मिलेगा।
सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए केंद्र सरकार आज से देशव्यापी ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) टीकाकरण अभियान शुरू कर दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राजस्थान के अजमेर से इस राष्ट्रीय कार्यक्रम का शुभारंभ कर दिया है. इस अभियान के तहत देशभर में 14 वर्ष की करीब 1.15 करोड़ किशोरियों को सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर मुफ्त HPV वैक्सीन की प्रक्रिया शुरू कर दी है. स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, सरकारी केंद्रों पर मुफ्त गार्डासिल-4 टीका लगाया जाएगा. विशेषज्ञों ने टीकाकरण के साथ स्क्रीनिंग पर भी जोर दिया. भारत में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे आम कैंसर बना हुआ है, जिसके हर साल लगभग 80,000 नए मामले और 42,000 से ज्यादा मौतें होती हैं. केंद्र सरकार ने सर्वाइकल कैंसर से बचाव को लेकर ही देशव्यापी ह्यूमन पैपिलोमावायरस (HPV) टीकाकरण अभियान शुरू किया है. इस कैंपेन का मकसद देश भर में 14 साल की लड़कियों को सर्वाइकल कैंसर से बचाना है, यह बीमारी भारत में हेल्थ के लिए एक बड़ी चिंता बनी हुई है.
HPV वैक्सीन कैसे काम करती है?
HPV वैक्सीन शरीर में वायरस के खिलाफ प्रतिरक्षा (इम्यूनिटी) विकसित करती है।
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यह संक्रमण से पहले सुरक्षा प्रदान करती है।
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आमतौर पर 9–14 वर्ष की आयु की बच्चियों को लगाई जाती है।
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डॉक्टरों की सलाह के अनुसार 1 या 2 डोज का शेड्यूल अपनाया जाता है (उम्र के आधार पर)।
भारत में हर साल बड़ी संख्या में महिलाएं सर्वाइकल कैंसर से प्रभावित होती हैं। समय पर टीकाकरण और स्क्रीनिंग से इस बीमारी को काफी हद तक रोका जा सकता है। राष्ट्रीय स्तर पर टीकाकरण कार्यक्रम में HPV वैक्सीन को शामिल करना सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अहम कदम माना जा रहा है।
किन्हें लगेगी यह वैक्सीन?
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9 से 14 वर्ष की किशोरियां प्राथमिक लक्ष्य समूह
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स्कूल आधारित और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से टीकाकरण
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ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों पर विशेष फोकस
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार HPV वैक्सीन सुरक्षित और प्रभावी है। विश्व स्वास्थ्य संगठनों और कई देशों में इसे नियमित टीकाकरण कार्यक्रम का हिस्सा बनाया जा चुका है। सामान्यतः हल्का बुखार या इंजेक्शन साइट पर दर्द जैसे मामूली दुष्प्रभाव हो सकते हैं।


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