नीम करोली मंदिर के चढ़ावे का रिकॉर्ड कहां है? हाईकोर्ट ने सरकार से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
उत्तराखंड , 20 फ़रवरी 2026 । प्रसिद्ध संत नीम करौली बाबा से जुड़े मंदिर में चढ़ावे (दान) के रिकॉर्ड को लेकर मामला अदालत पहुंच गया है। सुनवाई के दौरान उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे का पूरा हिसाब-किताब और उसका ऑडिट रिकॉर्ड कहां उपलब्ध है। अदालत ने इस संबंध में विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।
उत्तराखंड हाईकोर्ट ने सरकार से प्रसिद्ध नीम करोली बाबा मंदिर में आने वाले करोड़ों रुपये के दान के बारे में जानकारी मांगी है. यह मामला तब अदालत तक पहुंचा जब एक स्थानीय व्यक्ति ने मंदिर ट्रस्ट के खातों में पारदर्शिता नहीं होने पर सवाल उठाए.
पिथौरागढ़ जिले के बासिखेत निवासी ठाकुर सिंह दसीला ने हाईकोर्ट को पत्र लिखकर बताया कि मंदिर का संचालन करने वाले ट्रस्ट की बुनियादी जानकारी भी सार्वजनिक नहीं है. उन्होंने कहा कि ट्रस्ट का नाम, रजिस्ट्रेशन की जानकारी, कार्यालय का पता, ट्रस्टियों की संख्या और उनकी नियुक्ति का रिकॉर्ड आधिकारिक दस्तावेजों में उपलब्ध नहीं है.
क्या है पूरा मामला?
याचिका में आरोप लगाया गया है कि मंदिर में प्रतिवर्ष बड़ी मात्रा में नकद दान, सोना-चांदी और अन्य चढ़ावे आते हैं, लेकिन इनके प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर स्पष्ट सार्वजनिक रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।
मामले की सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से जवाब मांगा कि:
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मंदिर में कुल चढ़ावे का वार्षिक लेखा-जोखा क्या है?
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क्या नियमित ऑडिट कराया जाता है?
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ट्रस्ट या प्रबंधन समिति की संरचना और जवाबदेही क्या है?
पारदर्शिता और धार्मिक संस्थान
भारत में कई प्रमुख मंदिरों और धार्मिक संस्थानों में हर साल करोड़ों रुपये का चढ़ावा आता है। अदालतों ने समय-समय पर यह स्पष्ट किया है कि धार्मिक स्वतंत्रता के साथ-साथ वित्तीय पारदर्शिता भी जरूरी है, खासकर तब जब मामला सार्वजनिक आस्था और बड़े पैमाने के दान से जुड़ा हो।
कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यदि मंदिर किसी ट्रस्ट या सरकारी निगरानी में पंजीकृत है, तो उसे लेखा-जोखा और ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक करने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने बुधवार को इस मामले की सुनवाई की. अदालत ने सरकार को नोटिस जारी कर चार हफ्तों के भीतर विस्तृत जवाब देने को कहा है.
अदालत ने कहा कि जब मंदिर में बड़ी रकम का दान आता है, खासकर विदेशों से भी, तो प्रबंधन में पारदर्शिता बहुत जरूरी है.
नीम करोली बाबा मंदिर विश्व प्रसिद्ध है और यहां देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं. मंदिर की आध्यात्मिक मान्यता और चमत्कारों की वजह से यहां भारी भीड़ और चढ़ावा आता है.


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