“पीएम-आरकेवीवाई के तहत हरियाणा को बड़ी सौगात: 1122 करोड़ की कृषि कार्ययोजना को मिली मंजूरी”

“पीएम-आरकेवीवाई के तहत हरियाणा को बड़ी सौगात: 1122 करोड़ की कृषि कार्ययोजना को मिली मंजूरी”

चंडीगढ़  , 20 मार्च 2026 ।कृषि क्षेत्र को मजबूती देने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए हरियाणा के लिए प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के तहत 1122 करोड़ रुपये की कृषि कार्ययोजना को मंजूरी दे दी गई है। यह फैसला राज्य में खेती-किसानी को आधुनिक बनाने और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

यह निर्णय आज यहां मुख्य सचिव श्री अनुराग रस्तोगी की अध्यक्षता हुई बैठक में लिया गया। बैठक के दौरान वर्तमान में चल रही योजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई तथा आगामी वर्ष 2026-27 के लिए कार्ययोजना को अंतिम रूप दिया गया। कृषि मशीनीकरण उप-मिशन के तहत किसानों को आधुनिक कृषि उपकरण उपलब्ध कराने के लिए 200 करोड़ रुपये का परिव्यय अनुमोदित किया गया है। इसके अतिरिक्त फसल अवशेष प्रबंधन के लिए 250 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जिनका उपयोग मशीनों की खरीद और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से खेत में ही अवशेष प्रबंधन को बढ़ावा देने तथा पराली जलाने की समस्या को कम करने के लिए किया जाएगा।

इस कार्ययोजना के अंतर्गत कृषि उत्पादन बढ़ाने, फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने, जल संरक्षण तकनीकों को लागू करने और आधुनिक कृषि उपकरणों के उपयोग को प्रोत्साहित करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके साथ ही किसानों को नई तकनीकों और बेहतर बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी कई योजनाएं शामिल की गई हैं।

सरकारी अधिकारियों के अनुसार, इस बजट का उपयोग खासतौर पर उन क्षेत्रों में किया जाएगा जहां कृषि उत्पादकता अपेक्षाकृत कम है। साथ ही, जल संकट से जूझ रहे इलाकों में माइक्रो-इरिगेशन और ड्रिप सिस्टम को बढ़ावा दिया जाएगा ताकि पानी की बचत के साथ बेहतर उत्पादन हासिल किया जा सके।

भारत सरकार की इस पहल का उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना ही नहीं, बल्कि किसानों की आर्थिक स्थिति को सशक्त बनाना भी है। योजना के तहत कृषि से जुड़े स्टार्टअप, एग्री-टेक इनोवेशन और ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस योजना का प्रभावी क्रियान्वयन होता है, तो हरियाणा न केवल खाद्यान्न उत्पादन में अपनी स्थिति और मजबूत करेगा, बल्कि टिकाऊ खेती (Sustainable Agriculture) के मॉडल के रूप में भी उभर सकता है।

कुल मिलाकर, 1122 करोड़ रुपये की यह मंजूरी हरियाणा के कृषि क्षेत्र में नई ऊर्जा भरने के साथ-साथ किसानों के भविष्य को सुरक्षित और समृद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।