हरियाणा में 748 करोड़ का बैंक घोटाला—मामले की गहराई तक पहुंचने के लिए CBI जांच का फैसला
हरियाणा , 01 अप्रैल 2026 । हरियाणा में सामने आए 748 करोड़ रुपये के बड़े बैंक घोटाले ने प्रशासन और वित्तीय तंत्र को हिला कर रख दिया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने इसकी जांच CBI को सौंपने का निर्णय लिया है।
बताया जा रहा है कि यह राशि तीन निजी बैंकों आइडीएफसी फर्स्ट बैंक, एयू स्माल फाइनेंस बैंक और कोटक महिंद्रा बैंक के पूर्व और वर्तमान कर्मचारियों की ओर से कथित रूप से हेराफेरी की गई है। सरकार पहले चरण में आइडीएफसी फर्स्ट बैंक की जांच कराएगी, जिसमें 18 सरकारी विभागों के साथ 590 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ। राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि घोटाले की गंभीरता और व्यापकता को देखते हुए सरकार ने दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना (डीएसपीई) अधिनियम की धारा 6 के तहत केंद्र सरकार को संदर्भ भेजकर हरियाणा में सीबीआइ की शक्तियां और अधिकार क्षेत्र विस्तारित करने की सहमति दे दी है।
प्रारंभिक जांच में संकेत मिले हैं कि इस घोटाले में फर्जी दस्तावेजों, संदिग्ध लेन-देन और बैंकिंग प्रक्रियाओं में हेरफेर के जरिए बड़ी रकम की गड़बड़ी की गई। बताया जा रहा है कि कई खातों और कंपनियों के माध्यम से पैसे को इधर-उधर ट्रांसफर किया गया, जिससे घोटाले का नेटवर्क काफी जटिल हो सकता है।
Central Bureau of Investigation अब इस पूरे मामले की गहराई से जांच करेगी, जिसमें शामिल लोगों की पहचान, फंड के प्रवाह और संभावित मिलीभगत का खुलासा किया जाएगा। जांच एजेंसी बैंक अधिकारियों, संबंधित कंपनियों और अन्य संदिग्धों से पूछताछ कर सकती है।
Haryana सरकार का कहना है कि इस मामले में किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाएगी। वहीं, इस फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में भी हलचल तेज हो गई है और विपक्ष ने सरकार से जवाबदेही की मांग की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इतने बड़े वित्तीय घोटाले से बैंकिंग सिस्टम की निगरानी और सुरक्षा तंत्र पर सवाल उठते हैं, जिन्हें मजबूत करना जरूरी है। साथ ही, यह मामला भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने के लिए सख्त कदम उठाने की जरूरत को भी उजागर करता है।


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