निकाय चुनाव में बड़ा सियासी मोड़, अंबरनाथ में भाजपा ने कांग्रेस से किया गठबंधन

निकाय चुनाव में बड़ा सियासी मोड़, अंबरनाथ में भाजपा ने कांग्रेस से किया गठबंधन

महाराष्ट्र , 07 जनवरी 2026 ।  महाराष्ट्र के निकाय चुनाव में अंबरनाथ से एक चौंकाने वाला राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने स्थानीय स्तर पर कांग्रेस के साथ गठबंधन किया है। आमतौर पर एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ने वाली इन दोनों पार्टियों का साथ आना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का बड़ा विषय बन गया है और इसे स्थानीय समीकरणों की मजबूरी के रूप में देखा जा रहा है।

महाराष्ट्र के दो नगर परिषद चुनाव के बाद बीजेपी ने कांग्रेस और AIMIM के साथ गठबंधन किया है। अंबरनाथ में बीजेपी ने कांग्रेस और एनसीपी के साथ गठबंधन कर नगर परिषद का अध्यक्षता बनाया है। जबकि अकोला जिले के अकोट नगर परिषद में पार्टी ने AIMIM के साथ गठबंधन किया।

हालांकि सीएम देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को इन गठबंधन को खारिज कर दिया। उन्होंने पार्टी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी दी है। फडणवीस ने कहा कि इस तरह के गठबंधनों को पार्टी की वरिष्ठ नेतृत्व ने मंजूरी नहीं दी है और यह संगठनात्मक अनुशासन का उल्लंघन है।

अंबरनाथ में बीजेपी-कांग्रेस साथ में आई

अंबरनाथ में बीजेपी ने कांग्रेस और अजीत पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के साथ मिलकर 'अंबरनाथ विकास अघाड़ी' बनाई। 32 सीटों के बहुमत के साथ नगर परिषद में बहुमत हासिल किया, जबकि शिवसेना 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी रही। अंबरनाथ नगर परिषद में 20 दिसंबर को 60 सदस्यीय चुनाव हुआ था। तीनों पार्टियों ने कहा कि यह कदम नगर को सुरक्षित और स्थिर प्रशासन देने के लिए है।

इस गठबंधन ने यह साफ कर दिया है कि स्थानीय राजनीति में विचारधाराओं से ज्यादा महत्व व्यावहारिकता का होता है। राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर एक-दूसरे के कट्टर विरोधी माने जाने वाले दल, नगर निकाय चुनाव में विकास, प्रशासन और संख्या बल को प्राथमिकता देते नजर आ रहे हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि यह गठबंधन पूरी तरह स्थानीय मुद्दों और शहर के विकास को ध्यान में रखकर किया गया है, न कि किसी वैचारिक समझौते के तहत।

वहीं कांग्रेस की ओर से भी यह स्पष्ट किया गया है कि अंबरनाथ के नागरिकों के हित सर्वोपरि हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि यदि गठबंधन से शहर के बुनियादी ढांचे, सफाई, पानी और अन्य नागरिक सुविधाओं में सुधार होता है, तो इसे सकारात्मक कदम माना जाना चाहिए।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, अंबरनाथ का यह गठबंधन महाराष्ट्र की निकाय राजनीति में नए ट्रेंड की ओर इशारा करता है। इससे यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में अन्य नगर निकायों में भी अप्रत्याशित गठबंधन देखने को मिल सकते हैं। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि इस कदम का असर भविष्य की स्थानीय और विधानसभा राजनीति पर भी पड़ सकता है।

कुल मिलाकर, अंबरनाथ निकाय चुनाव में भाजपा और कांग्रेस का साथ आना यह दर्शाता है कि सत्ता और प्रशासन की जरूरतें कई बार राजनीतिक विरोध की दीवारें भी गिरा देती हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि यह गठबंधन जमीनी स्तर पर कितना कारगर साबित होता है और जनता की अपेक्षाओं पर कितना खरा उतरता है।