मादुरो के बाद अब वेनेजुएला के गृहमंत्री ट्रम्प के निशाने पर, अमेरिका-वेनेजुएला तनाव और गहराया
वॉशिंगटन, 07 जनवरी 2026 । वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के बाद अब देश के गृहमंत्री भी अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निशाने पर आ गए हैं। ट्रम्प खेमे से जुड़े बयानों और संकेतों के बाद यह साफ हो गया है कि अमेरिका-वेनेजुएला संबंधों में तल्खी और बढ़ सकती है। माना जा रहा है कि यह रुख सिर्फ बयानबाजी तक सीमित नहीं, बल्कि भविष्य की कूटनीतिक और रणनीतिक नीति का संकेत भी हो सकता है।
मादुरो को सत्ता से हटाने के बाद ट्रम्प के निशाने पर वेनेजुएला के गृह मंत्री और सुरक्षा प्रमुख डियोसदादो काबेलो आ गए हैं।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि काबेलो अंतरिम राष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिग्ज के साथ मिलकर वॉशिंगटन की शर्तें मानें और देश में शांति बनाए रखें। अगर काबेलो ने सहयोग नहीं किया, तो अमेरिका उनके खिलाफ भी कार्रवाई कर सकता है।
अमेरिका ने बिचौलियों के जरिए काबेलो को चेताया है कि अगर उन्होंने विरोध किया, तो उनका हश्र भी मादुरो जैसा हो सकता है। जिन्हें हाल ही में अमेरिका ने गिरफ्तार कर न्यूयॉर्क ले जाकर मुकदमा शुरू किया है।
हालांकि, अमेरिका फिलहाल काबेलो को तुरंत हटाना नहीं चाहता, क्योंकि ऐसा करने से सरकार समर्थक गुट सड़कों पर उतर सकते हैं और हालात बिगड़ सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, ट्रम्प का यह आक्रामक रुख लैटिन अमेरिका की राजनीति में नए समीकरण बना सकता है। अगर अमेरिका गृहमंत्री जैसे अहम पद पर बैठे व्यक्ति को सीधे निशाने पर लेता है, तो इसका असर वेनेजुएला की आंतरिक सुरक्षा नीति, विपक्षी आंदोलनों और अंतरराष्ट्रीय रिश्तों पर पड़ सकता है। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि इस मुद्दे का इस्तेमाल अमेरिका की घरेलू राजनीति में भी किया जा सकता है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई देश इस घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। कुछ देशों का मानना है कि प्रतिबंध और दबाव की राजनीति से हालात और बिगड़ सकते हैं, जबकि अन्य इसे लोकतंत्र और मानवाधिकारों के समर्थन की कार्रवाई बता रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि अमेरिका इस मुद्दे पर सिर्फ बयान देता है या फिर ठोस कदम भी उठाता है।
कुल मिलाकर, मादुरो के बाद वेनेजुएला के गृहमंत्री का ट्रम्प के निशाने पर आना इस बात का संकेत है कि अमेरिका-वेनेजुएला तनाव अभी थमने वाला नहीं है। यह टकराव आने वाले दिनों में लैटिन अमेरिकी राजनीति और वैश्विक कूटनीति पर गहरा असर डाल सकता है।


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