लेखक गांव महोत्सव में बोले CM धामी: शब्द राष्ट्र निर्माण के शस्त्र
देहरादून, 29 अक्टूबर 2026 | उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार, 29 अक्टूबर 2026 को लेखक गांव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव में शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने साहित्य, लेखन और शब्दों की शक्ति पर जोर देते हुए कहा कि शब्द भी राष्ट्र निर्माण के प्रभावशाली शस्त्र बन सकते हैं। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी को याद करते हुए उनके विचारों, लेखन और राष्ट्रसेवा को प्रेरणादायक बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि साहित्य केवल विचार व्यक्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह समाज की सोच, मूल्यों और राष्ट्रीय चेतना को दिशा देने की क्षमता भी रखता है। लेखकों और साहित्यकारों की रचनाएं लोगों को प्रेरित करने के साथ सामाजिक बदलाव और देश के विकास में योगदान दे सकती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लेखक गाँव, समाज को दिशा देने वाले विचारों का प्रतीक है। जो वर्तमान के साथ भविष्य का निर्माण कर रहा है।उन्होंने कहा लेखक गांव, प्रदेश में स्थानीय प्रतिभाओं को नया मंच देने के साथ साहित्यिक मानचित्र पर राज्य को नई पहचान दे रहा है। उन्होंने भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी का स्मरण करते हुए कहा कि स्व. अटल जी शब्दों के साधक थे, उनकी लेखनी में पर्वतों सी दृढ़ता और गंगा सी गहराई थी। उन्होंने कहा अटल जी ने हमें सिखाया कि शब्द भी राष्ट्र निर्माण के शस्त्र बन सकते हैं।
अटल बिहारी वाजपेयी के विचारों को किया याद
सीएम धामी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व और उनके योगदान का उल्लेख किया। अटल जी एक राजनेता होने के साथ कवि, लेखक और प्रभावशाली वक्ता भी थे। उनके सार्वजनिक जीवन में राष्ट्रसेवा, लोकतांत्रिक मूल्यों और सुशासन से जुड़े विचार प्रमुख रहे।
धामी ने अटल जी को याद करते हुए उनके विचारों से प्रेरणा लेने की बात कही। वाजपेयी की कविताओं और भाषणों ने सार्वजनिक जीवन में भाषा और अभिव्यक्ति की अहमियत को स्थापित किया। उनके साहित्यिक योगदान ने भी उन्हें देश के प्रमुख राजनीतिक व्यक्तित्वों के साथ-साथ एक विशिष्ट कवि के रूप में पहचान दिलाई।
महोत्सव में साहित्य की सामाजिक भूमिका पर भी जोर दिया गया। शब्द लोगों तक विचार पहुंचाने, सामाजिक मुद्दों पर चर्चा बढ़ाने और नई पीढ़ी को प्रेरित करने का माध्यम बन सकते हैं। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कविता, साहित्य, पत्रकारिता और लोकगीतों ने जनचेतना जगाने में भूमिका निभाई थी।
आज भी लेखकों की जिम्मेदारी है कि वे समाज की चुनौतियों, मानवीय संवेदनाओं और देश की सांस्कृतिक विरासत को अपनी रचनाओं में जगह दें। साहित्य लोगों में मौलिक चिंतन को बढ़ावा देने और विभिन्न विचारों के बीच संवाद स्थापित करने में मदद कर सकता है।
युवा पीढ़ी को पढ़ने और मौलिक चिंतन के लिए प्रेरित करने पर जोर
लेखक गांव में आयोजित अंतरराष्ट्रीय साहित्य, संस्कृति एवं कला महोत्सव का उद्देश्य साहित्यिक सृजन और सांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा देना है। इससे पहले 25 अक्टूबर को उत्तराखंड के राज्यपाल डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने महोत्सव का शुभारंभ किया था। पांच दिन के इस आयोजन में देश-विदेश के साहित्यकारों, कलाकारों और विद्वानों के शामिल होने की जानकारी राजभवन की ओर से दी गई थी।
महोत्सव में पुस्तक-पठन, स्थानीय भाषाओं के संरक्षण, साहित्यिक शोध और नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने जैसे विषय भी महत्वपूर्ण रहे। युवाओं में पढ़ने की आदत और स्वतंत्र चिंतन विकसित करना साहित्यिक संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए जरूरी है।
उत्तराखंड की संस्कृति और स्थानीय भाषाओं को बढ़ावा
उत्तराखंड की गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी जैसी भाषाएं प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा हैं। लोकगीत, लोकगाथाएं और पारंपरिक कला स्थानीय इतिहास तथा जनजीवन को अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने में मदद करते हैं।
ऐसे साहित्यिक आयोजनों के माध्यम से स्थानीय भाषाओं में लेखन, अनुवाद और प्रकाशन को प्रोत्साहन मिल सकता है। साथ ही, उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को व्यापक मंच पर प्रस्तुत करने और नए लेखकों को अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर मिल सकते हैं।
लेखक गांव अंतरराष्ट्रीय महोत्सव साहित्य, संस्कृति और कला से जुड़े लोगों के लिए संवाद का मंच है। इस तरह के आयोजन रचनात्मक विचारों के आदान-प्रदान और भारतीय साहित्यिक परंपरा पर चर्चा को बढ़ावा देते हैं। सीएम धामी का संदेश भी इसी विचार पर केंद्रित रहा कि लेखनी और शब्द समाज को दिशा देने तथा राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की क्षमता रखते हैं।


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