BPSC TRE-4 परीक्षा में देरी पर भड़के अभ्यर्थी, प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने किया लाठीचार्ज

BPSC TRE-4 परीक्षा में देरी पर भड़के अभ्यर्थी, प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने किया लाठीचार्ज

बिहार , 08 मई 2026 । बिहार लोक सेवा आयोग की TRE-4 शिक्षक भर्ती परीक्षा में हो रही देरी को लेकर छात्रों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन करते हुए परीक्षा प्रक्रिया जल्द शुरू करने और भर्ती कैलेंडर जारी करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जिसके बाद पुलिस और छात्रों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। बाद में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया।

बीपीएससी शिक्षक भर्ती परीक्षा (टीआरई)-4 के बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने पटना महाविद्यालय से विरोध मार्च निकाला था और वे डाकबंगला चौराहा की ओर बढ़ रहे थे, इसी दौरान गांधी मैदान के पास पुलिस ने उन्हें रोक लिया। बिहार में बीपीएससी टीआरई-4 परीक्षा के माध्यम से 46 हजार से अधिक पदों पर नियुक्ति की उम्मीद है, लेकिन परीक्षा की अधिसूचना अप्रैल 2026 की तय समयसीमा के बाद भी जारी नहीं हो सकी है।

प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना था कि लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट जानकारी नहीं दी जा रही है, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। कई छात्रों ने आरोप लगाया कि लगातार देरी के कारण उनकी तैयारी और करियर दोनों प्रभावित हो रहे हैं। अभ्यर्थियों की मांग है कि सरकार और आयोग TRE-4 परीक्षा की तारीख जल्द घोषित करें।

बताया जा रहा है कि प्रदर्शन के दौरान छात्रों ने नारेबाजी की और प्रशासन के खिलाफ विरोध जताया। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने पहले समझाने की कोशिश की, लेकिन भीड़ के आक्रोशित होने के बाद बल प्रयोग किया गया। इस दौरान कई छात्रों के घायल होने की भी खबरें सामने आई हैं, हालांकि प्रशासन की ओर से आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।

घटना के बाद इलाके में तनाव का माहौल बन गया। कई छात्र संगठनों ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए इसे अभ्यर्थियों की आवाज दबाने की कोशिश बताया। वहीं प्रशासन का कहना है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।

शिक्षक भर्ती परीक्षाओं को लेकर बिहार में पहले भी कई बार विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं। बड़ी संख्या में युवा सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं और भर्ती प्रक्रियाओं में देरी उनके बीच असंतोष बढ़ा रही है। राजनीतिक दलों ने भी इस मुद्दे को लेकर सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भर्ती परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और समयबद्धता नहीं लाई गई तो युवाओं में नाराजगी और बढ़ सकती है। फिलहाल छात्रों की नजरें अब सरकार और आयोग की अगली घोषणा पर टिकी हुई हैं।