अभिनेता कुणाल खेमू और उनके पिता के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत—कानूनी पेंच में फंसा मामला

अभिनेता कुणाल खेमू और उनके पिता के खिलाफ धोखाधड़ी की शिकायत—कानूनी पेंच में फंसा मामला

नई दिल्ली, 02 जनवरी 2026 । बॉलीवुड अभिनेता कुणाल खेमू और उनके पिता के खिलाफ धोखाधड़ी से जुड़ी शिकायत दर्ज होने की खबर सामने आई है, जिससे फिल्म इंडस्ट्री और प्रशंसकों के बीच हलचल मच गई है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि एक वित्तीय लेनदेन/व्यावसायिक समझौते के दौरान गलत जानकारी देकर आर्थिक नुकसान पहुंचाया गया। हालांकि, यह मामला अभी जांच के स्तर पर है और किसी भी पक्ष की ओर से दोष सिद्ध नहीं हुआ है।

एक्टर कुणाल खेमू और उनके पिता रवि खेमू के खिलाफ मिली धोखाधड़ी की शिकायत के बाद मुंबई की एक अदालत ने अंबोली पुलिस से जवाब मांगा है। एक्टर और उनके पिता पर आरोप हैं कि उन्होंने एक प्रोड्यूसर से फिल्म में काम करने के लिए साइनिंग अमाउंट लिया था, हालांकि बाद में वो साथ काम करने से मुकर गए और ज्यादा पैसों की मांग करने लगे।

फर्स्ट क्लास ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट सुजीत कुमार सी. तायडे ने 29 दिसंबर को शिकायत मिलने के बाद संबंधित पुलिस अधिकारियों से इंडियन सिविल डिफेंस कोड की धारा 175 (3) के तहत जवाब मांगा है। आदेश में उन्होंने कहा कि अंबोली पुलिस थाना प्रभारी को इस मामले में जवाब देना होगा।

दरअसल 2024 में फिल्म प्रोड्यूसर रवि दुर्गाप्रसाद अग्रवाल ने एडवोकेट वेदिका चौबे के जरिए एक्टर कुणाल खेमू और उनके पिता रवि खेमू के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी। प्रोड्यूसर रवि दुर्गाप्रसाद ओवरटेक नाम की एक हिंदी फिल्म बना रहे थे, जिसमें लीड रोल निभाने के लिए उन्होंने कुणाल खेमू से संपर्क किया था।

कुणाल खेमू की ओर से अभी तक इस मामले पर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। उनके करीबी सूत्रों का कहना है कि आरोप निराधार हैं और तथ्यों के साथ जवाब दिया जाएगा। कानूनी जानकारों के मुताबिक, इस तरह के मामलों में प्रारंभिक जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाता है कि मामला दीवानी विवाद है या आपराधिक श्रेणी में आता है।

फिल्म इंडस्ट्री में इस खबर को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ का कहना है कि जांच पूरी होने तक किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए, वहीं कुछ लोग पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी मामला चर्चा में है, जहां समर्थक और आलोचक दोनों पक्ष अपनी-अपनी राय रख रहे हैं।

कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण में बयान दर्ज किए जा सकते हैं और दस्तावेज़ों की जांच की जाएगी। यदि आरोपों में दम पाया गया तो आगे की कार्रवाई संभव है, वहीं यदि शिकायत निराधार साबित होती है तो मामला बंद भी हो सकता है। फिलहाल, यह मामला न्यायिक जांच के दायरे में है और अंतिम फैसला जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगा।