दिल्ली में AQI लेवल 400 पार — दम घोंटने वाली हवा से बढ़ी चिंता, अस्थमा और एलर्जी के मरीजों की संख्या में इज़ाफा
नई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2025 । दिल्ली की हवा एक बार फिर ज़हरीली हो गई है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शनिवार को एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 400 के पार पहुंच गया, जो ‘गंभीर श्रेणी’ में आता है। प्रदूषण के इस बढ़ते स्तर ने न केवल प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है, बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालना शुरू कर दिया है। अस्पतालों में अस्थमा, सांस की तकलीफ, और एलर्जी के मरीजों की संख्या में पिछले कुछ दिनों में तेज़ी से वृद्धि दर्ज की गई है।
दीवाली के बाद से दिल्ली-NCR की हवा में प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। शनिवार को पूर्वी दिल्ली के आनंद विहार में AQI लेवल 412 दर्ज किया गया। जिससे प्रदूषण गंभीर कैटेगरी में पहुंच गया है।
कई इलाकों में हवा की क्वालिटी खराब है। इसलिए जनपथ रोड पर पार्टिकुलेट मैटर के हाईलेवल से निपटने के लिए सड़कों पर पानी का छिड़काव किया जा रहा है।
दिवाली के बाद केवल दो दिनों के भीतर सांस लेने में कठिनाई, अस्थमा के दौरे और एलर्जिक ब्रोंकाइटिस के रोगियों में लगभग 30% की बढ़ोतरी देखी गई है। डॉक्टरों ने मास्क लगाने की सलाह दी है।
उधर बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनता नजर आ रहा है। 27 अक्टूबर को इसके चक्रवात में तब्दील होने की संभावना है। तूफान का नाम मोन्था रखा जा सकता है, जो थाईलैंड ने दिया है। जिसका अर्थ है सुगंधित फूल या सुंदर फूल।
110 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलेगी हवा
IMD का कहना है बंगाल की खाड़ी में बना दबाव क्षेत्र तूफान में बदल जाएगा, जिसमें 110 kmph की रफ्तार से हवाएं चलेंगी। इससे आंध्र प्रदेश, रायलसीमा, तमिलनाडु, ओडिशा और तेलंगाना में भारी बारिश हो सकती है।
इधर, हिमाचल के लाहौल-स्पीति के ताबो में न्यूनतम तापमान गिरकर माइनस 2°C तक पहुंच गया। हालांकि अधिकतम तापमान में कोई खास बदलाव नहीं हुआ।
मैदानी राज्यों में से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में तापमान में गिरावट जारी है। शनिवार सुबह UP के वाराणसी में गंगा के घाटों के पास धुंध की मोटी परत छाई रही।
प्रदूषण विशेषज्ञों का कहना है कि पराली जलाने, वाहनों के धुएं और मौसम के ठहराव ने मिलकर इस स्थिति को और बिगाड़ दिया है। आने वाले दिनों में यदि हवाओं की गति नहीं बढ़ी, तो प्रदूषण का स्तर और भी गंभीर हो सकता है।
यह स्थिति फिर एक बार इस सवाल को उठाती है कि क्या दिल्ली जैसी महानगरों में हर साल बढ़ते प्रदूषण से निपटने के लिए दीर्घकालिक नीति और जनभागीदारी के कदम उठाए जा रहे हैं या नहीं। स्वच्छ हवा अब केवल पर्यावरण का मुद्दा नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य की आपात स्थिति बन चुकी है।


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