यूरोपियन कमीशन प्रेसिडेंट बोलीं — भारत ग्लोबल पॉलिटिक्स में टॉप पर पहुंचा, रणनीतिक ताकत के रूप में उभरा

यूरोपियन कमीशन प्रेसिडेंट बोलीं — भारत ग्लोबल पॉलिटिक्स में टॉप पर पहुंचा, रणनीतिक ताकत के रूप में उभरा

नई दिल्ली, 28 जनवरी 2026 । यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट के हालिया बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भारत की बढ़ती भूमिका को फिर से सुर्खियों में ला दिया है। उन्होंने कहा कि भारत अब वैश्विक राजनीति के शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल हो चुका है, और दुनिया के अहम फैसलों में उसकी भागीदारी लगातार बढ़ रही है। यह टिप्पणी सिर्फ औपचारिक प्रशंसा नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक शक्ति संतुलन की स्वीकृति के रूप में देखी जा रही है।

यूरोपियन काउंसिल के प्रेसिडेंट एंटोनियो कोस्टा और यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन के सम्मान में मंगलवार को राष्ट्रपति भवन में डिनर रखा गया।

इस दौरान यूरोपियन कमीशन की प्रेसिडेंट उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने कहा कि भारत ग्लोबल राजनीति में टॉप पर पहुंच गया है। यह एक ऐसा डेवलपमेंट है जिसका यूरोप स्वागत करता है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितता के इस दौर में, भारत-यूरोप की सोच और नजरिया एक जैेसा है। हमारा मानना ​​है कि वैश्विक चुनौतियों का सामना सिर्फ सामूहिक प्रयासों से ही किया जा सकता है

इस खास डिनर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर अजित डोभाल समेत कई हस्तियां शामिल हुईं।

यूरोपियन यूनियन और भारत के संबंध भी तेजी से मजबूत हुए हैं। व्यापार वार्ताएं, रक्षा सहयोग, ग्रीन एनर्जी प्रोजेक्ट्स और तकनीकी साझेदारी इस रिश्ते को नई दिशा दे रहे हैं। यूरोप, जो पहले एशिया में चीन पर अधिक निर्भर था, अब भारत को विश्वसनीय और लोकतांत्रिक साझेदार के रूप में देख रहा है।

विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत की यह स्थिति उसकी आर्थिक वृद्धि, भू-राजनीतिक संतुलन, सैन्य क्षमता और कूटनीतिक संतुलनकारी नीति का परिणाम है। भारत ने पश्चिमी देशों और रूस—दोनों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखे हैं, जो उसे वैश्विक संकटों में मध्यस्थ की भूमिका निभाने योग्य बनाता है।

यह बयान दर्शाता है कि भारत की विदेश नीति अब क्षेत्रीय दायरे से आगे बढ़कर वैश्विक एजेंडा तय करने वाली शक्ति बन चुकी है। आने वाले समय में भारत की भूमिका जलवायु नीति, डिजिटल गवर्नेंस, इंडो-पैसिफिक सुरक्षा और वैश्विक आर्थिक सुधारों में और अधिक निर्णायक हो सकती है।