गाजा में कंट्रोल बढ़ा रहा हमास: प्रभाव वाले इलाकों में 90% मौजूदगी का दावा

गाजा में कंट्रोल बढ़ा रहा हमास: प्रभाव वाले इलाकों में 90% मौजूदगी का दावा

गाजा , 19 फ़रवरी 2026 । मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच Hamas के गाजा पट्टी में प्रभाव और नियंत्रण को लेकर नई रिपोर्टें सामने आई हैं। सूत्रों के अनुसार, जिन इलाकों में संगठन का पहले से प्रभाव था, वहां अब उसकी मौजूदगी लगभग 90% तक पहुंच गई है। यह दावा सुरक्षा और मानवीय हालात दोनों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अक्टूबर में अमेरिका की पहल पर लागू हुए सीजफायर के बाद गाजा में हमास ने अंदरूनी मोर्चे पर अपनी पकड़ फिर मजबूत कर ली है। BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, गाजा के एक कार्यकर्ता मोहम्मद दियाब ने कहा, ‘हमास ने उन क्षेत्रों के 90% से अधिक हिस्से पर फिर से नियंत्रण हासिल कर लिया है जहां वह मौजूद है।’

दियाब ने कहा, ‘पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां सड़कों पर लौट आई हैं। वे अपराध रोकने और जिन लोगों को सहयोगी या विरोधी मानते हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई कर रही हैं।’

इस बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का ‘बोर्ड ऑफ पीस’ गुरुवार को वॉशिंगटन में अपनी पहली बैठक करेगा। इसमें करीब 60 देशों को आमंत्रित किया गया है। बैठक में गाजा पट्टी के लिए ट्रम्प की शांति योजना पर रिपोर्ट पेश की जाएगी।

हालांकि, टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, पीस बोर्ड के शुरुआती दस्तावेज में गाजा का ही स्पष्ट जिक्र नहीं है। ट्रम्प ने कहा कि बोर्ड का मिशन गाजा से कहीं आगे, पूरी दुनिया में शांति लाना है। कई यूरोपीय देशों ने इसे ट्रम्प का पर्सनल प्रोजेक्ट बताया और इसमें शामिल होने से इनकार कर दिया है।

नियंत्रण बढ़ने के संकेत

  1. स्थानीय प्रशासनिक ढांचे पर पकड़ – नागरिक सेवाओं और राहत वितरण में संगठन की भूमिका बढ़ी।

  2. सुरक्षा तंत्र का विस्तार – प्रमुख मार्गों और बस्तियों में निगरानी मजबूत।

  3. राजनीतिक संदेश – समर्थक क्षेत्रों में जनसंपर्क और प्रभाव विस्तार।

क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

Israel और हमास के बीच जारी टकराव ने पूरे क्षेत्र को प्रभावित किया है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय युद्धविराम और मानवीय सहायता की अपील कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य एजेंसियां नागरिकों की सुरक्षा और राहत आपूर्ति सुनिश्चित करने पर जोर दे रही हैं। संघर्ष के कारण गाजा में बिजली, पानी और चिकित्सा सुविधाओं पर दबाव बढ़ा है। राहत संगठनों का कहना है कि नियंत्रण और सुरक्षा की स्थिति में बदलाव से आम नागरिकों की दिनचर्या और सहायता वितरण प्रभावित हो सकता है।