कनाडा में खालिस्तानी आतंकियों ने तिरंगे का अपमान किया
ओटावा , 25 नवम्बर 2025 । कनाडा में एक बार फिर खालिस्तानी समर्थक तत्वों द्वारा भारत विरोधी गतिविधियों का मामला सामने आया है। हालिया घटना में खालिस्तानी आतंकियों ने भारतीय तिरंगे का खुला अपमान किया, जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैल गए। इस घटना ने न केवल भारतीय समुदाय को झकझोर दिया बल्कि भारत-कनाडा संबंधों पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह घटना कनाडा के एक शहर में आयोजित खालिस्तानी प्रदर्शन के दौरान हुई, जहां उग्र समर्थकों ने न सिर्फ तिरंगे को नीचे गिराया बल्कि उस पर आपत्तिजनक नारे भी लगाए। वहां मौजूद भारतीय समुदाय ने इसका कड़ा विरोध किया, लेकिन विरोध जताने वालों को निशाना बनाते हुए खालिस्तानियों ने आक्रामक व्यवहार जारी रखा।
भारत सरकार ने इस घटना पर कड़ी नाराज़गी जताते हुए इसे "अस्वीकार्य और शर्मनाक" बताया है। विदेश मंत्रालय की ओर से कनाडा सरकार को औपचारिक शिकायत भेजने की तैयारी की जा रही है। भारतीय दूतावास ने भी स्थानीय प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
यह पहली बार नहीं है जब कनाडा में इस तरह की गतिविधियां सामने आई हैं। पिछले कुछ वर्षों में खालिस्तानी समूहों ने वहां खुले तौर पर भारत विरोधी रैलियां और हिंसक प्रदर्शन किए हैं। भारत लगातार कनाडा से ऐसे उग्र समूहों पर नकेल कसने की मांग करता रहा है, लेकिन कार्रवाई का अभाव संबंधों में तनाव का कारण बनता जा रहा है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हजारों लोगों ने इसमें भाग लिया। लोग सुबह से शाम तक पीले रंग के खालिस्तान झंडे हाथ में लेकर करीब दो किलोमीटर लंबी कतार में खड़े रहे।
इसका आयोजन आतंकवादी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) ने किया था। आयोजकों का दावा है कि ओंटेरियो, अल्बर्टा, ब्रिटिश कोलंबिया और क्यूबेक प्रांतों से 53,000 से ज्यादा खालिस्तान समर्थक वोट डालने आए। लोग छोटे-छोटे बच्चे, प्रेग्नेंट महिलाओं और बुजुर्गों के साथ आए।
भारतीय समुदाय का कहना है कि तिरंगा भारत की शान है और उसके अपमान की अनुमति किसी भी लोकतांत्रिक देश में नहीं दी जानी चाहिए। प्रवासी भारतीय संगठनों ने कनाडाई सरकार से सुरक्षा और कार्रवाई सुनिश्चित करने की मांग की है।
यह घटना एक बार फिर उजागर करती है कि विदेशों में सक्रिय उग्रवादी समूह न केवल भारत की संप्रभुता को चुनौती दे रहे हैं, बल्कि स्थानीय शांति और सामाजिक सद्भाव के लिए भी खतरा बने हुए हैं। अब देखना होगा कि कनाडा सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है।


RashtriyaPravakta