ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी पर केंद्र पर बरसे खरगे, बोले- जनता पर पड़ रहा भारी बोझ

ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी पर केंद्र पर बरसे खरगे, बोले- जनता पर पड़ रहा भारी बोझ

नई दिल्ली, 25 मई 2026 । कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि ईंधन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी आम जनता पर आर्थिक बोझ बढ़ा रही है और इसे मोदी सरकार की “रोज़ाना की डकैती” बताया।कांग्रेस प्रमुख ने सवाल किया कि आखिर इस डकैती का फायदा किसे हो रहा है? पेट्रोल एवं डीजल की कीमतों में सोमवार को एक बार फिर वृद्धि की गयी। पेट्रोल की कीमत 2.61 रुपये प्रति लीटर जबकि डीजल के दाम 2.71 रुपये प्रति लीटर बढ़ाये गये हैं। पिछले दो सप्ताह से भी कम समय में यह चौथी बार है जब कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। 

खरगे ने कहा कि पेट्रोल और डीजल महंगे होने का असर केवल वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवहन लागत बढ़ने से खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों पर भी असर पड़ता है। उन्होंने दावा किया कि महंगाई से मध्यम वर्ग, किसान और गरीब सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार पिछले 12 वर्षों में 43 लाख करोड़ रुपये लूट चुकी है। खरगे ने कहा, "पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चौथी बार बढ़ोतरी के साथ आज एचपीसीएल, बीपीसीएल और आईओसी के शेयरों में क्रमश: 5.8 प्रतिशत, 4.44 प्रतिशत और 3.90 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई। जनता से ज़्यादा मुनाफ़ा कमाना भाजपा का डीएनए है।" उनका कहना है, "ईंधन मूल्य वृद्धि घरेलू बजट पर एक और झटका है, और इसका अर्थव्यवस्था के हर पहलू पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। किसानों से लेकर एमएसएमई तक, समाज का हर वर्ग भाजपा की लूट का खामियाजा भुगत रहा है।" उन्होंने सवाल किया कि इस रोजाना होने वाली डकैती से किसे लाभ हो रहा है? 

कांग्रेस ने केंद्र सरकार से ईंधन पर टैक्स कम करने और जनता को राहत देने की मांग की है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद देश में उपभोक्ताओं को अपेक्षित राहत नहीं मिल रही।

वहीं सरकार की ओर से पहले भी यह कहा जाता रहा है कि वैश्विक परिस्थितियों, अंतरराष्ट्रीय बाजार और आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखकर ईंधन मूल्य तय किए जाते हैं। सरकार का दावा है कि विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास के लिए संसाधनों की आवश्यकता होती है।

ईंधन कीमतों को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज होती रही है और विपक्षी दल इसे महंगाई तथा जनजीवन से जुड़ा बड़ा मुद्दा बता रहे हैं। आने वाले समय में यह मुद्दा राजनीतिक और आर्थिक चर्चाओं के केंद्र में बना रह सकता है।