दिल्ली दंगों पर पुलिस का बड़ा बयान — “यह केवल हिंसा नहीं, बल्कि देश में सत्ता परिवर्तन की साजिश थी”
नई दिल्ली, 30 अक्टूबर 25 । दिल्ली पुलिस ने 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़ी जांच में एक गंभीर बयान जारी किया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह हिंसा किसी अचानक भड़की घटना का परिणाम नहीं थी, बल्कि देश में सत्ता परिवर्तन की सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी। जांच एजेंसियों का कहना है कि इस दंगे की पृष्ठभूमि में गहरी रणनीति, योजनाबद्ध वित्तीय सहायता और उकसाने वाली गतिविधियाँ शामिल थीं।
पुलिस की रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि कुछ संगठनों और व्यक्तियों ने सोशल मीडिया और जमीनी स्तर पर लोगों को भड़काने की कोशिश की थी। इस पूरे घटनाक्रम का उद्देश्य सरकार को अस्थिर करना और देश में अविश्वास का माहौल पैदा करना था। अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान कई ऐसे डिजिटल और आर्थिक साक्ष्य मिले हैं, जो इस साजिश की गहराई को उजागर करते हैं।
पुलिस ने यह बात 177 पन्नों के हलफनामे में कही है, जो सुप्रीम कोर्ट में उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर दाखिल किया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, जांच में मिले गवाहों के बयान, दस्तावेज और तकनीकी सबूत बताते हैं कि यह दंगे नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ विरोध को हथियार बनाकर योजनाबद्ध तरीके से कराए गए थे।
पुलिस का कहना है- इस साजिश के तहत देशभर में हिंसा फैलाने की कोशिश हुई, जिसमें उत्तर प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल, केरल और कर्नाटक जैसे राज्य भी शामिल थे। उमर खालिद और शरजील इमाम साजिशकर्ता थे, जिन्होंने लोगों को भड़काने का काम किया।
दरअसल, दिल्ली में फरवरी 2020 में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान 23 से 26 फरवरी तक हिंसा भड़क गई थी। जिसमें 53 लोगों की मौत हुई और सैकड़ों घायल हुए थे।
पुलिस बोली- आरोपी बार-बार झूठी याचिकाएं दाखिल कर रहे
दिल्ली पुलिस की ओर से सुप्रीम कोर्ट में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता, वकील रजत नायर और ध्रुव पांडे पेश हो रहे हैं। पुलिस ने अदालत में कहा कि आरोपी बार-बार झूठी याचिकाएं दाखिल कर रहे हैं, ताकि केस की सुनवाई में देरी हो। यह न्याय प्रक्रिया में रुकावट डालने जैसा है। सुप्रीम कोर्ट अब पुलिस के इस हलफनामे पर सुनवाई करेगा।
इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है। विपक्ष ने इस रिपोर्ट की निष्पक्षता पर सवाल उठाए हैं, जबकि कई विश्लेषकों का मानना है कि यदि पुलिस के दावे प्रमाणित होते हैं, तो यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक बड़ा षड्यंत्र साबित हो सकता है।
पुलिस अब इस दिशा में आगे की कार्रवाई कर रही है और कई प्रमुख गवाहों से पूछताछ जारी है। इस रिपोर्ट ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि भारत में सामाजिक और राजनीतिक स्थिरता को बनाए रखने के लिए संगठित दुष्प्रचार और साजिशों पर सख्त निगरानी जरूरी है।


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