बांग्लादेश में सियासी हलचल: PM के शपथ-समारोह के बहिष्कार की तैयारी में विपक्ष

बांग्लादेश में सियासी हलचल: PM के शपथ-समारोह के बहिष्कार की तैयारी में विपक्ष

ढाका, 17 फ़रवरी 2026 । बांग्लादेश में प्रधानमंत्री के शपथ-समारोह को लेकर राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। विपक्षी दलों ने संकेत दिए हैं कि वे शपथ-ग्रहण कार्यक्रम का बहिष्कार कर सकते हैं। इस कदम को देश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और हालिया चुनावी विवादों से जोड़कर देखा जा रहा है।

बांग्लादेश में आज शाम 4 बजे बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के अध्यक्ष तारिक रहमान पीएम पद की शपथ लेंगे। इससे पहले बांग्लादेश में सियासी टकराव तेज हो गया है। BNP ने साफ कर दिया है कि उसके सांसद सिर्फ संसद के लिए शपथ लेंगे, कॉन्स्टिट्यूशन रिफॉर्म काउंसिल मेंबर के सदस्य के तौर पर कोई शपथ नहीं लिया जाएगा।

इसके बाद जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिजंस पार्टी (NCP) ने शपथ समारोह के बहिष्कार और सड़क पर उतरने की चेतावनी दी है। यह विवाद दो अलग-अलग शपथों को लेकर है। 12 फरवरी को हुए चुनाव में लोगों ने सांसद चुनने के साथ-साथ ‘जुलाई चार्टर’ पर जनमत संग्रह में भी वोट दिया था।

इसमें 62% लोगों ने ‘हां’ में वोट दिया। जुलाई चार्टर के मुताबिक नई संसद 180 दिनों के लिए संविधान सभा की तरह काम करेगी। इस अवधि में संविधान और लोकतांत्रिक संस्थाओं में बदलाव का अधिकार होगा।

BNP ने जुलाई चार्टर पर हस्ताक्षर तो किए थे, लेकिन उसके नेता कई प्रावधानों पर आपत्ति जता रहे हैं। पार्टी का कहना है कि चार्टर तैयार करते समय उनसे सलाह नहीं ली गई थी। जुलाई चार्टर पूरी तरह लागू हो गया, तो प्रधानमंत्री की ताकत काफी हद तक घट सकती है। इस चार्टर का मकसद एकाधिकार खत्म करना और संतुलन बनाना है।

क्यों हो रहा है बहिष्कार का ऐलान?

विपक्ष का आरोप है कि चुनाव प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी नहीं रही। उनका कहना है कि जनमत का सही प्रतिनिधित्व नहीं हुआ, इसलिए वे शपथ-समारोह में शामिल होकर नई सरकार को वैधता नहीं देना चाहते।

  • चुनावी अनियमितताओं के आरोप

  • विपक्षी नेताओं पर कार्रवाई का मुद्दा

  • स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग

  • अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों की भूमिका पर सवाल

सत्तारूढ़ दल का कहना है कि चुनाव संवैधानिक प्रक्रिया के तहत संपन्न हुए और जनता ने स्पष्ट जनादेश दिया है। सरकार ने विपक्ष से लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करने और संसद के भीतर अपनी भूमिका निभाने की अपील की है।

यदि विपक्ष वास्तव में शपथ-समारोह का बहिष्कार करता है, तो इससे देश में राजनीतिक ध्रुवीकरण और बढ़ सकता है। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें भी बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिरता पर टिकी रहेंगी।