रेखा गुप्ता के पर और अधिक कतरे गए
" आलोक गौड़ "
" कबीरा खड़ा बाजार में, मांगे सबकी खैर,
ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर। "
नई दिल्ली। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता दिल्ली जल बोर्ड को आर्थिक व प्रशासनिक स्वायत्तता देने के जिस फैसले के लिए खुद की पीठ थपथपा रही हैं। वह फैसला केंद्रीय गृह मंत्रालय के दबाव में लिया गया है। दरअसल भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी कौशल राज शर्मा को दिल्ली जल बोर्ड का मुख्य कार्यकारी अधिकारी नियुक्त करने के वक्त ही यह तय हो गया था कि मैली यमुना को निर्मल बनाने की महत्वपूर्ण परियोजना को वह अनुभवहीन रेखा गुप्ता के भरोसे छोड़ने का जोखिम लेने को तैयार नहीं है।
दरअसल कौशल राज शर्मा को उत्तर प्रदेश के वाराणसी से दिल्ली लाने के लिए जिस तरह से केंद्रीय कर्मचारियों के संबंध में बनाए गए नियमों में संशोधन किया था। उससे ही यह जाहिर हो गया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी के इस चहेते अधिकारी को दिल्ली में रेखा गुप्ता सरकार के कामकाज की निगरानी करने के साथ उनकी मदद के मकसद से ही दिल्ली लाया गया है।
पाठकों को याद होगा मैंने तब भी इसी कालम में यह बात कही थी कि केंद्र सरकार और विशेषकर प्रधानमंत्री मोदी यमुना सफाई जैसे मामले को रेखा गुप्ता के हाथ में सौंपने के लिए किसी भी तरह से तैयार नहीं हैं। यह बात पूरी तरह से सही साबित हो रही है। दिल्ली जल बोर्ड को अब 50 करोड़ रुपए तक के काम कराने के संबंध में दिल्ली सरकार की मंत्रिपरिषद से अनुमति लेने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।
इस नई व्यवस्था के मुताबिक 25 करोड़ रुपए तक जल बोर्ड संबंधित कार्य कराने के फैसले मुख्य कार्यकारी अधिकारी स्व विवेक के आधार पर ले सकेंगे। इसमें न तो उन्हें दिल्ली जल बोर्ड की अध्यक्ष एवं मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अनुमति लेनी होगी और न यमुना को प्रदूषण मुक्त करने की योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए मंत्रिपरिषद के पास प्रस्ताव भेजना होगा।
हालांकि केंद्र व दिल्ली सरकार दोनों ही अपनी ओर से यह दलील पेश कर सकते हैं कि मुख्यमंत्री के तौर पर रेखा गुप्ता दिल्ली जल बोर्ड की अध्यक्ष हैं और इस नाते वह 50 करोड़ रुपए तक की योजनाओं को मंजूरी देने के लिए स्वतंत्र हैं।
लेकिन असली सवाल तो यह है कि दिल्ली जल बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी कौशल राज शर्मा ऐसी कोई भी नौबत आने ही क्यों देंगे कि उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर की योजनाओं को जल बोर्ड व मुख्यमंत्री के पास भेजा जाए। वह 24 करोड़ 99 लाख तक की ही परियोजना की रूप रेखा बनायेंगे। इससे नमामि गंगे परियोजना की तर्ज पर दिल्ली में यमुना को साफ करने का काम आसानी से अडानी व अन्य लोगों को सौंपा जा सके।
यहां इस बात का जिक्र करना भी अतर्कसंगत नहीं होगा कि दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी नीत व रेखा गुप्ता के नेतृत्व में बनी सरकार ने इस साल के वित्तीय बजट में यमुना को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए 9 हजार करोड़ रुपए की राशि का प्रावधान किया है।
केन्द्रीय गृह मंत्रालय में केंद्र शासित मामलों के सचिव ने नाम न छापने की शर्त पर मेट्रो मीडिया को बताया की दिल्ली सरकार का वास्तविक संचालन उनके मंत्रालय की ओर से हो रहा है।
एक ओर तो केंद्र सरकार और खासकर गृह मंत्रालय रेखा गुप्ता सरकार पर नज़र रखने के साथ ही उसके पर कतर रहा है। वहीं दूसरी ओर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी अपना पद संभालने के बाद भी निगम पार्षद के दायरे से बाहर नहीं निकल पाईं हैं। यही वजह है कि दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता न केवल हर महत्वपूर्ण अवसर व विषय पर विधानसभा परिसर में कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं बल्कि आज की तारीख में मुख्यमंत्री से ज्यादा लोकप्रिय हैं।


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