अक्टूबर में रिटेल महंगाई रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ सकती है, खाद्य कीमतों में गिरावट से मिली राहत

अक्टूबर में रिटेल महंगाई रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ सकती है, खाद्य कीमतों में गिरावट से मिली राहत

नई दिल्ली, 12 नवम्बर 2025 । भारत में अक्टूबर महीने के लिए रिटेल महंगाई (CPI – Consumer Price Index) में बड़ी गिरावट देखने को मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अक्टूबर 2025 में महंगाई दर पिछले दो साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच सकती है। इसका मुख्य कारण है – खाद्य वस्तुओं, विशेषकर सब्ज़ियों और अनाज की कीमतों में आई राहत। इससे आम जनता को जीवन-यापन की लागत में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है।

सरकार आज यानी 12 नवंबर को अक्टूबर महीने के रिटेल महंगाई के आंकड़े जारी करेगी। एक्सपर्ट्स के अनुसार बीते महीने महंगाई दर 0.50% के रिकॉर्ड सबसे निचले स्तर पर आ सकती है। इसका कारण खाने-पीने की चीजों की कीमतों में लगातार कमी और GST में कटौती का असर है। ये महंगाई दर बेस ईयर 2012 के आधार पर सबसे कम होगी।

इससे पहले सितंबर में रिटेल महंगाई करीब 8 साल के निचले स्तर 1.54% पर आ गई थी। इससे पहले जून 2017 में ये 1.46% रही थी, जो अब तक की सबसे कम महंगाई दर है। सितंबर में खाने-पीने की कुछ वस्तुओं की कीमतों में गिरावट रही थी। वहीं अगस्त में रिटेल महंगाई 2.07% रही थी।

बेस ईयर क्या होता है?

  • बेस ईयर वो साल होता है जिसकी कीमतों को आधार (बेस) माना जाता है। यानी, उसी साल की चीजों की औसत कीमत को 100 का मान देते हैं।
  • फिर, दूसरे सालों की कीमतों की तुलना इसी बेस ईयर से की जाती है। इससे पता चलता है कि महंगाई कितनी बढ़ी या घटी है।
  • उदाहरण: मान लीजिए आपका घर का बजट 2020 में था (बेस ईयर)। उस साल एक किलो टमाटर ₹50 का था। अब 2025 में वो ₹80 का हो गया। तो महंगाई = (80 - 50) / 50 × 100 = 60% बढ़ी। यही फॉर्मूला CPI में यूज होता है, लेकिन ये पूरे बाजार की चीजों पर लागू होता है।

ये क्यों जरूरी है?

  • तुलना आसान बनाता है: बिना बेस ईयर के, हर साल की कीमतें अलग-अलग होंगी। लेकिन बेस ईयर से सब कुछ प्रतिशत (%) में मापा जाता है, तो पुराने और नए साल की साफ तुलना हो जाती है।
  • महंगाई का सही अनुमान: ये बताता है कि महंगाई कितनी तेज या धीमी हुई। जैसे, अगर बेस ईयर से 5% महंगाई बढ़ी, तो सरकार और बैंक ब्याज दरें तय करने में इसका इस्तेमाल करते हैं।
  • पुरानी आदतों को अपडेट करता है: समय के साथ लोगों की खरीदारी की आदतें बदलती हैं (जैसे पहले साइकिल, अब बाइक ज्यादा यूज करते हैं)। इसलिए हर 10-12 साल में बेस ईयर बदल दिया जाता है, ताकि डेटा पुराना न हो जाए।
  • भारत में उदाहरण: भारत में रिटेल महंगाई (CPI) का बेस ईयर अभी 2012 है। यानी 2012 की कीमतों को 100 मानकर 2025 की तुलना की जाती है। अगर CPI 2025 में 150 है, तो महंगाई 50% बढ़ चुकी है।

अक्टूबर में रिटेल महंगाई में आई गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक सकारात्मक संकेत है। जहां आम उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, वहीं सरकार और RBI के लिए यह नीति-निर्माण के लिहाज़ से अनुकूल स्थिति साबित हो सकती है। यदि यह रुझान बरकरार रहा, तो आने वाले महीनों में उपभोक्ता खर्च, निवेश और आर्थिक विकास — तीनों में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।