“ईरानी तेल पर अमेरिका की नरमी: 30 दिन की छूट से वैश्विक बाजार में हलचल”

“ईरानी तेल पर अमेरिका की नरमी: 30 दिन की छूट से वैश्विक बाजार में हलचल”

नई दिल्ली , 21 मार्च 2026 । वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जहां अमेरिका ने ईरान से तेल खरीद पर 30 दिन की अस्थायी छूट (waiver) देने का फैसला किया है। इस कदम को अंतरराष्ट्रीय राजनीति और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

ट्रम्प प्रशासन ने ईरानी तेल की खरीद पर प्रतिबंधों में 30 दिन की छूट दी है। ये छूट केवल समुद्र में मौजूद ईरानी तेल के टैंकरों की खरीद के लिए है। अमेरिकी ट्रेजरी मिनिस्टर स्कॉट बेसेंट ने इसकी घोषणा की। ट्रेजरी विभाग की वेबसाइट के मुताबिक यह छूट 20 मार्च से 19 अप्रैल के लिए है।

ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई बढ़ाने और कीमतों को काबू में रखने के लिए ऐसा किया गया है। अमेरिका-इजराइल की ईरान के साथ चल रही जंग की वजह से क्रूड की कीमतें 110 डॉलर के पार निकल गई है। 28 फरवरी को जंग शुरू होने से पहले ये 70 डॉलर के करीब थी।

स्कॉट बेसेंट ने कहा कि दुनिया के लिए इस मौजूदा सप्लाई को अस्थायी रूप से खोलकर ग्लोबल मार्केट में लगभग 14 करोड़ बैरल तेल तेजी से आएगा। इससे दुनियाभर में ऊर्जा की उपलब्धता बढ़ेगी और सप्लाई पर जो अस्थायी दबाव बना है, उसे कम करने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों के अनुसार, यह छूट उन देशों के लिए राहत लेकर आ सकती है जो ईरानी तेल पर निर्भर हैं। इससे तेल आपूर्ति में स्थिरता आने और कीमतों पर दबाव कम होने की संभावना है।

इस फैसले के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं—जिनमें वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, आपूर्ति श्रृंखला की चुनौतियां और भू-राजनीतिक तनाव शामिल हैं। 30 दिन की यह अवधि एक तरह से अंतरिम राहत है, जिसके दौरान आगे की रणनीति तय की जा सकती है।

ऊर्जा विश्लेषकों का मानना है कि इस कदम से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थायी स्थिरता आ सकती है, लेकिन दीर्घकालिक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि अमेरिका आगे क्या नीति अपनाता है।

इस फैसले का असर भारत जैसे तेल आयातक देशों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि ईरानी तेल सस्ता और सुलभ विकल्प माना जाता है।

कुल मिलाकर, अमेरिका द्वारा दी गई यह 30 दिन की छूट वैश्विक तेल बाजार और अंतरराष्ट्रीय संबंधों दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर बनी हुई है।