“दिल्ली में जल क्रांति की तैयारी: 6000 KM पाइपलाइन बदलेगा जल बोर्ड, गंदे पानी से मिलेगी राहत”
नई दिल्ली , 20 मार्च 2026 ।दिल्ली में पेयजल की गुणवत्ता सुधारने के लिए बड़ा कदम उठाया गया है। दिल्ली जल बोर्ड ने 6000 किलोमीटर लंबी पुरानी पाइपलाइन को बदलने का मास्टरप्लान तैयार किया है, जिससे राजधानी के लाखों लोगों को गंदे और दूषित पानी की समस्या से राहत मिलने की उम्मीद है।
दिल्ली में गंदे पानी सप्लाई की समस्या खत्म करने के लिए जल बोर्ड ने डिटेल प्लान तैयार किया है। प्लान के तहत दिल्ली में 30-40 साल पुरानी जितनी भी पाइप लाइनें है, उन्हें चेंज किया जाएगा। जल बोर्ड के 15,600 किमी लंबे पाइप नेटवर्क में से 38 से 40 प्रतिशत ऐसी लाइनें है जो काफी पुरानी है। पाइप लाइनों को चेंज करने के लिए पूरे दिल्ली को 8 जोन में बांटा गया है। 8 जोन में एनडीएमसी और दिल्ली कैंट बोर्ड एरिया शामिल नहीं है।
जल बोर्ड ने क्यों लिया ये फैसला
पुरानी वॉटर सप्लाई लाइनों के चलते सिर्फ रेवेन्यू लॉस ही नहीं हो रहा है, बल्कि कई इलाकों में लोगों के घरों में गंदे पानी की सप्लाई की समस्या भी इसी वजह से है। गंदे पानी सप्लाई की रोजाना जल बोर्ड को 60 से 70 शिकायतें मिलती है। उन शिकायतों का 2-3 दिनों में समाधान तो हो जाता है, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं होता। गंदे पानी की समस्या का स्थायी समाधान पुरानी सप्लाई लाइनों के नेटवर्क को बदलना ही है। इसके लिए जल बोर्ड ने पूरे दिल्ली में 6000 किमी लंबी लाइनों को बदलने का प्लान बनाया है।
अधिकारियों के मुताबिक, शहर के कई हिस्सों में दशकों पुरानी पाइपलाइनें जर्जर हो चुकी हैं, जिनमें लीकेज और सीवेज मिक्सिंग जैसी समस्याएं आम हो गई हैं। इसी कारण लोगों को दूषित पानी की शिकायतें लगातार मिल रही थीं। अब नई पाइपलाइन बिछाने से इन समस्याओं को जड़ से खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत चरणबद्ध तरीके से पूरे शहर में पाइपलाइन नेटवर्क को अपग्रेड किया जाएगा। खासतौर पर उन इलाकों को प्राथमिकता दी जाएगी जहां पानी की गुणवत्ता को लेकर ज्यादा शिकायतें दर्ज होती रही हैं।
दिल्ली सरकार का कहना है कि इस प्रोजेक्ट में आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे पानी की सप्लाई सिस्टम को और मजबूत और सुरक्षित बनाया जा सके। इसके अलावा, लीकेज रोकने और पानी की बर्बादी को कम करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस योजना को सही तरीके से लागू किया गया, तो यह न केवल पानी की गुणवत्ता में सुधार करेगा, बल्कि जल आपूर्ति व्यवस्था को भी अधिक विश्वसनीय बनाएगा। इससे स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी कमी आने की संभावना है, जो दूषित पानी के कारण पैदा होती हैं।
हालांकि, इतनी बड़ी परियोजना के क्रियान्वयन में समय और संसाधनों की चुनौती भी सामने आ सकती है। लेकिन सरकार का दावा है कि यह मास्टरप्लान राजधानी के जल प्रबंधन में एक बड़ा बदलाव लाएगा।


RashtriyaPravakta