AAP ने रेखा गुप्ता को ‘बीजेपी की पप्पू’ कहा — दिल्ली की राजनीति में बढ़ती बयानबाज़ी और टकराव का नया दौर
नई दिल्ली, 09 दिसंबर 2025 । दिल्ली की राजनीति इन दिनों लगातार राजनीतिक हमलों और तीखे बयानों से गर्म है। इसी बीच आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को ‘बीजेपी की पप्पू’ कहकर विवाद को और ज्यादा उभार दिया है। यह बयान केवल राजनीतिक तंज नहीं, बल्कि मौजूदा सत्ता-संतुलन, प्रशासनिक नियंत्रण और दिल्ली सरकार के कामकाज पर सवाल खड़ा करने की कोशिश है।
आम आदमी पार्टी (AAP) ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को 'बीजेपी की पप्पू CM' कहा है। AAP ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर रेखा गुप्ता के बयानों के छोटे-छोटे वीडियो क्लिप जारी करते हुए लिखा- बीजेपी की पप्पू CM का कोई मुकाबला नहीं है।
दरअसल, रेखा गुप्ता ने हाल ही में NDTV को दिए एक इंटरव्यू में कहा था कि एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) एक टेंपरेचर है, जिसे किसी भी इंस्ट्रूमेंट से मापा जा सकता है। इस टिप्पणी को लेकर दिल्ली CM आलोचना का सामना कर रही हैं।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (AAP) संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। केजरीवाल ने मंगलवार शाम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर दिल्ली CM के इंटरव्यू का वीडियो पोस्ट करते हुए लिखा- ये नया विज्ञान कब आया कि AQI अब टेंपरेचर बन गया?
दिल्ली CM प्रदूषण पर बोलीं- पानी छिड़काव ही एकमात्र समाधान
NDTV के इंटरव्यू में पत्रकार ने दिल्ली CM रेखा गुप्ता से सवाल किया- कुछ लोग आरोप लग रहे हैं कि दिल्ली में AQI एक जैसा इसलिए दिख रहा है कि क्योंकि आप सिस्टम में खेल कर रहे हैं। जिन हॉटस्पॉट इलाके में AQI मापने वाले मॉनिटर लगे हैं, वहां-वहां आप पानी का स्प्रे करवा रही हैं।
इस पर दिल्ली CM ने कहा- जो लोग ये आरोप लगा रहे हैं, उन्होंने ही ये मॉनिटर टावर लगवाए हैं। आप बताइए कि हॉटस्पॉट क्या होता है? हॉटस्पॉट वह जगह होती है जहां प्रदूषण सबसे ज्यादा होता है। समाधान क्या है? आप वहां छिड़काव करते हैं, पानी स्प्रे करते हैं। आप धूल-मिट्टी को नीचे बिठाने का काम करते हैं।
AAP द्वारा रेखा गुप्ता को ‘बीजेपी की पप्पू’ कहना राजनीतिक असहमति का चरम रूप है। यह टिप्पणी यह दिखाती है कि दिल्ली की राजनीति अब संघर्ष और वाक्-युद्ध के नए चरण में प्रवेश कर चुकी है।
हालाँकि विपक्ष का काम सरकार पर सवाल उठाना है, लेकिन व्यक्तिगत टिप्पणियाँ लोकतांत्रिक मर्यादा के दायरे को चुनौती देती हैं।
आगामी दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह विवाद केवल शब्दों तक सीमित रहता है या राजनीतिक माहौल को नए तरीक़े से आकार देता है।


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