डेटा लेने से पहले कंपनियां बताएंगी—क्यों ले रही हैं, कैसे इस्तेमाल करेंगी—डिजिटल दौर में पारदर्शिता और उपभोक्ता अधिकारों की बड़ी पहल
नई दिल्ली, 15 नवम्बर 2025 । डिजिटल प्लेटफॉर्म, मोबाइल ऐप्स और ऑनलाइन सेवाओं पर बढ़ती निर्भरता के बीच उपभोक्ताओं की डेटा प्राइवेसी को लेकर बहस तेज हो रही थी। इसी पृष्ठभूमि में एक महत्वपूर्ण बदलाव लागू किया गया है—अब कोई भी कंपनी उपयोगकर्ता से डेटा लेने से पहले स्पष्ट रूप से बताएगी कि वह कौन-सा डेटा ले रही है, क्यों ले रही है और उसका इस्तेमाल किस तरह होगा।
यह कदम उपभोक्ता अधिकारों को मजबूत करने और डिजिटल दुनिया में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में बड़ा सुधार माना जा रहा है।
भारत में डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट 2023 अब नियमों के साथ पूरी तरह लागू हो चुका है। सरकार ने 14 नवंबर को इसके नियमों को नोटिफाई कर दिया है। ये नियम आम लोगों की प्राइवेसी को मजबूत करने के साथ-साथ इनोवेशन और डिजिटल इकोनॉमी को बढ़ावा देगा।
DPDP एक्ट को संसद ने 11 अगस्त 2023 को पास किया था। यह डिजिटल पर्सनल डेटा को हैंडल करने वाली कंपनियों (डेटा फिड्यूशरी) की जिम्मेदारियां तय करता है, जबकि लोगों को उनके अधिकार देता है।
बच्चों और दिव्यांगों के डेटा के लिए पेरेंट्स की सहमति जरूरी
बच्चों के लिए किसी भी रूप में उनके डेटा का उपयोग करने के लिए माता-पिता की सहमति अनिवार्य है। हेल्थकेयर, एजुकेशन या रीयल-टाइम सेफ्टी जैसे जरूरी मामलों में ही छूट मिलेगी। दिव्यांगों के लिए, जो लीगल डिसीजन नहीं ले पाते, उनके कानूनी गार्जियन से कंसेंट लेना पड़ेगा, जो कानून के तहत वेरिफाइड हो।
भविष्य में क्या बदल जाएगा?
धीरे-धीरे लोगों में यह जागरूकता बढ़ेगी कि उनका डेटा कितना मूल्यवान है।
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उपभोक्ता अधिक सतर्क होंगे
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कंपनियां ज्यादा जिम्मेदार बनेंगी
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अनधिकृत डेटा इस्तेमाल की घटनाएं कम होंगी
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डेटा सुरक्षा को एक मौलिक अधिकार के रूप में देखा जाएगा
ये नए नियम डिजिटल पारदर्शिता की दिशा में एक बड़ी छलांग साबित हो सकते हैं।


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