CBSE ने मैथिली भाषा को दी मान्यता, CM सम्राट चौधरी ने PM मोदी का जताया आभार
पटना, 25 मई 2026 । CBSE द्वारा मैथिली भाषा को मान्यता दिए जाने के बाद बिहार और मिथिला क्षेत्र में खुशी का माहौल है। इस फैसले पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए इसे मिथिला संस्कृति और भाषा के सम्मान का ऐतिहासिक कदम बताया।
बिहार के भाषाई और सांस्कृतिक इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने मैथिली भाषा को अपने पाठ्यक्रम में कक्षा 1 से लेकर माध्यमिक स्तर (कक्षा 10) तक 'मातृभाषा' विषय के रूप में शामिल करने की आधिकारिक मान्यता दे दी है। केंद्र सरकार का यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) की सिफारिशों के तहत लिया गया है। इस ऐतिहासिक फैसले पर खुशी जाहिर करते हुए बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया है और इसे मिथिला की सांस्कृतिक अस्मिता और भाषाई गौरव के लिए एक बड़ा मील का पत्थर बताया है।
सम्राट चौधरी ने कहा कि मैथिली केवल एक भाषा नहीं, बल्कि समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और करोड़ों लोगों की पहचान है। उन्होंने कहा कि CBSE द्वारा मान्यता मिलने से छात्रों को अपनी मातृभाषा में पढ़ाई और परीक्षा का बेहतर अवसर मिलेगा, जिससे भाषा के संरक्षण और प्रसार को भी मजबूती मिलेगी।
मैथिली भाषा लंबे समय से साहित्य, संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। इसे भारतीय संविधान की आठवीं अनुसूची में भी शामिल किया जा चुका है। अब CBSE स्तर पर मान्यता मिलने से भाषा को राष्ट्रीय शिक्षा प्रणाली में और व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि मातृभाषा में शिक्षा मिलने से छात्रों की समझ और सीखने की क्षमता बेहतर होती है। इस फैसले से मिथिला क्षेत्र के विद्यार्थियों को अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़ाव बनाए रखने में मदद मिलेगी।
फैसले के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में भी सकारात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कई सामाजिक और सांस्कृतिक संगठनों ने इसे मैथिली भाषा आंदोलन की बड़ी सफलता बताया है।


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