खड़गे का आरोप— मोदी को ‘गांधी’ सरनेम से दिक्कत, राजनीति में फिर तेज हुई जुबानी जंग
नई दिल्ली, 26 दिसंबर 2025 । कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि उन्हें ‘गांधी’ सरनेम से दिक्कत है। खड़गे के इस बयान के बाद देश की राजनीति में एक बार फिर बयानबाज़ी का दौर तेज हो गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि गांधी नाम सिर्फ एक उपनाम नहीं, बल्कि देश के स्वतंत्रता संग्राम, लोकतंत्र और संवैधानिक मूल्यों का प्रतीक है, और इसी पहचान से कुछ लोगों को असहजता होती है।
कांग्रेस मनरेगा का नाम 'VB-जी राम जी' करने का देशव्यापी विरोध करेगी। 5 जनवरी से इसके खिलाफ अभियान चलाया जाएगा। यह जानकारी शनिवार को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने दी।
उन्होंने कहा- मोदी को गांधी सरनेम से दिक्कत है, इसलिए मनरेगा का नाम बदला गया। ये कानून कानून गरीबों को कुचलने और उन्हें दबाने के लिए है।
खड़गे बोले- SIR अधिकारों को कम करने की साजिश
दिल्ली में कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) की बैठक में खड़गे ने यह भी कहा कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया लोकतांत्रिक अधिकारों को कम करने की सुनियोजित साजिश है। घर-घर जाकर यह सुनिश्चित करें कि गरीब, दलित, आदिवासी और अल्पसंख्यक समुदाय के वोटर्स के नाम वोटर लिस्ट न हटें।
कांग्रेस अध्यक्ष ने यह दावा भी किया कि ‘गांधी’ सरनेम से जुड़ा हमला दरअसल उस विचारधारा पर हमला है, जिसने देश को आज़ादी दिलाई और लोकतांत्रिक ढांचे को मजबूत किया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस डरने वाली नहीं है और ऐसे बयानों का राजनीतिक और वैचारिक स्तर पर जवाब दिया जाएगा। खड़गे के अनुसार, लोकतंत्र में आलोचना स्वीकार्य है, लेकिन अपमान और ध्रुवीकरण की राजनीति देशहित में नहीं है।
इस बयान पर सत्तारूढ़ दल की ओर से भी पलटवार देखने को मिला है। भाजपा नेताओं ने खड़गे के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि कानून और नियम सभी के लिए समान हैं, चाहे वह किसी भी सरनेम से जुड़े हों। उन्होंने कांग्रेस पर भावनात्मक मुद्दों के सहारे राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि जनता विकास और सुशासन को प्राथमिकता देती है।
कुल मिलाकर, खड़गे के बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्मा दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों पक्षों के बीच बयानबाज़ी और तेज होने की संभावना है। यह विवाद सिर्फ एक नाम तक सीमित नहीं, बल्कि विचारधाराओं और राजनीतिक दिशा को लेकर चल रही बड़ी बहस का हिस्सा बनता जा रहा है।


RashtriyaPravakta