सौरव और आशुतोष की बढ़ीं मुश्किलें, पांच दिन तक न्यायिक हिरासत में रहेंगे

सौरव और आशुतोष की बढ़ीं मुश्किलें, पांच दिन तक न्यायिक हिरासत में रहेंगे

नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026 । सौरव और आशुतोष को अदालत से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया है। इस फैसले के बाद दोनों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। न्यायिक हिरासत के दौरान दोनों को निर्धारित अवधि तक जेल में रहना होगा। हालांकि, मामले की पूरी जानकारी, आरोपों की प्रकृति और जांच से जुड़े अन्य पहलुओं के सामने आने के बाद ही घटनाक्रम की विस्तृत तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

तीनों को मंगलवार सुबह जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिया गया था। रात 3 बजे उन्हें एहतियातन गिरफ्तार किया गया। बुधवार सुबह स्पेशल कोर्ट में पेशी हुई।

CJP की लीगल टीम प्रमुख रत्ना सिंह के मुताबिक, तीनों पर बिना इजाजत जंतर-मंतर में घुसने, बॉन्ड की शर्तें तोड़ने और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप हैं। आशुतोष और सौरव को 10 अक्टूबर को भी फ्लाइट से हिरासत में लिया गया था।

हिरासत और गिरफ्तारी में फर्क

गिरफ्तारी एक औपचारिक कानूनी कार्रवाई है, जिसमें पुलिस किसी व्यक्ति को अपराध के आरोप में अपनी कस्टडी में लेती है। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया शुरू होती है और व्यक्ति को कानून के तहत मिलने वाले अधिकार लागू होते हैं।

हिरासत शब्द की BNSS में कोई सीधी परिभाषा नहीं है। कानून पुलिस को ऐसी शक्तियां देता है, जिनसे वह लोगों को रोक सकती है, हटा सकती है या कुछ समय के लिए अपने पास रख सकती है।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस एहतियातन लोगों को हिरासत में लेकर बाद में छोड़ सकती है। वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े के मुताबिक, हिरासत में व्यक्ति को जाने की अनुमति नहीं होती, लेकिन उसकी औपचारिक गिरफ्तारी नहीं हुई होती। हालांकि, हिरासत में रखने के लिए पुलिस के पास कानूनी आधार होना जरूरी है।

अदालत के फैसले पर टिकी नजरें

सौरव और आशुतोष को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद अब मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी हैं। न्यायिक हिरासत का फैसला अदालत द्वारा मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद लिया जाता है। इस अवधि में जांच से जुड़े तथ्यों, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे की प्रक्रिया निर्धारित हो सकती है।

फिलहाल, दोनों की न्यायिक हिरासत को लेकर सामने आई जानकारी के अतिरिक्त मामले के अन्य विवरणों की पुष्टि आवश्यक है। मामले में अगली सुनवाई, आरोपों और जांच की स्थिति से जुड़ी आधिकारिक जानकारी सामने आने पर घटनाक्रम को लेकर और स्पष्टता मिल सकेगी।