IDBI बैंक की 60.72% हिस्सेदारी कनाडाई कंपनी Fairfax को बेचने को कैबिनेट की मंजूरी
नई दिल्ली, 14 अक्टूबर 2026 । केंद्र सरकार ने IDBI बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। 14 अक्टूबर 2026 को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने कनाडा की वित्तीय सेवा कंपनी Fairfax Financial Holdings की सहायक कंपनी को बैंक की 60.72% हिस्सेदारी बेचने की मंजूरी दे दी। इस सौदे की कीमत करीब ₹52,878 करोड़ बताई गई है। इसमें केंद्र सरकार और भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) दोनों की हिस्सेदारी शामिल है। यह फैसला बैंक के स्वामित्व और प्रबंधन में बड़े बदलाव का रास्ता खोलता है।
केंद्रीय कैबिनेट ने आज 14 अक्टूबर को IDBI बैंक के नए खरीदार के नाम पर मुहर लगा दी है। इस फैसले के तहत केंद्र सरकार और LIC मिलकर बैंक में अपनी 60.72% हिस्सेदारी कनाडाई अरबपति प्रेम वत्स की कंपनी 'फेयरफैक्स' को बेचेंगे।
यह सौदा ₹52,877 करोड़ में तय हुआ है। 2022 में टाटा ग्रुप को एअर इंडिया बेचे जाने के बाद, यह केंद्र सरकार का सबसे बड़ा विनिवेश है। रकम के लिहाज से यह एअर इंडिया की ₹18 हजार करोड़ की डील से भी लगभग तीन गुना बड़ा सौदा है।
सरकार और LIC के पास रहेगी 34% हिस्सेदारी
IDBI बैंक में अपनी हिस्सेदारी बेचने के बाद भी बैंक में सरकार के पास 15% और LIC के पास 19% शेयर रहेंगे। यानी कुल हिस्सेदारी 34% बनी रहेगी।
IDBI बैंक का नाम बदलेगा या नहीं?
सौदे से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, अधिग्रहण के बाद भी IDBI बैंक का मौजूदा नाम कम से कम तीन साल तक बरकरार रखा जाएगा। हालांकि, नए मालिकाना ढांचे के तहत बैंक की रणनीति और संचालन में बदलाव हो सकते हैं। अंतिम बदलाव नियामकीय मंजूरियों और सौदे की शर्तों पर निर्भर करेंगे।
कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बावजूद हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए आगे के औपचारिक चरण बाकी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, शेयर खरीद समझौते पर चालू कैलेंडर वर्ष के अंत से पहले हस्ताक्षर किए जाने की उम्मीद है। खरीदार को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की नियामकीय शर्तें भी पूरी करनी होंगी। इसलिए कैबिनेट की मंजूरी को सौदा पूरी तरह संपन्न होने के बराबर नहीं माना जाना चाहिए।
IDBI बैंक के लिए क्यों अहम है यह फैसला?
IDBI बैंक की हिस्सेदारी बिक्री की प्रक्रिया अक्टूबर 2022 में शुरू हुई थी। नियामकीय और बोली संबंधी अड़चनों के कारण इसमें देरी हुई। अब मंजूरी मिलने के बाद बैंक के निजी स्वामित्व और प्रबंधन नियंत्रण में बदलाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
सरकार के मुताबिक, इस सौदे से बैंक को रणनीतिक निवेशक मिलेगा। वहीं, ग्राहकों के लिए बैंकिंग सेवाओं, जमा और खातों से जुड़े नियमों में किसी बदलाव की जानकारी आधिकारिक घोषणाओं के आधार पर ही देखनी चाहिए। केवल हिस्सेदारी बिक्री की खबर से खाताधारकों की जमा राशि या सेवाओं में तत्काल बदलाव मान लेना उचित नहीं होगा।


RashtriyaPravakta