शशि थरूर केरल कांग्रेस की बैठक में शामिल नहीं हुए, नेतृत्व के साथ खींचतान ने बढ़ाई राजनीतिक अनिश्चितता
नई दिल्ली, 23 जनवरी 2026 । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और केरल से सांसद शशि थरूर ने केरल विधानसभा चुनावों को लेकर अहम बैठक में हिस्सा नहीं लिया, जिससे पार्टी के भीतर आंतरिक मतभेद और खींचतान उजागर हो गई है। यह बैठक कांग्रेस हाई कमान — जिसमें राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे — के नेतृत्व में केरल की चुनावी रणनीति और गठबंधन United Democratic Front (UDF) की तैयारियों पर चर्चा के लिए बुलाई गई थी।
तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर शुक्रवार को केरल विधानसभा चुनावों को लेकर होने वाली पार्टी की अहम रणनीतिक बैठक में शामिल नहीं हुए। सूत्रों के मुताबिक थरूर हालिया घटनाक्रम से नाराज हैं।
पीटीआई सूत्रों का कहना है कि 19 जनवरी को कोच्चि में आयोजित महापंचायत कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने मंच पर मौजूद कई वरिष्ठ नेताओं का नाम लिया, लेकिन शशि थरूर को नजरअंदाज कर दिया था।
थरूर के करीबी सूत्रों के मुताबिक यह घटना उनके लिए टिपिंग पॉइंट साबित हुई। इससे पहले भी राज्य के कुछ नेता उन्हें नजरअंदाज करने की कोशिश कर चुके हैं, जिससे वह असहज महसूस कर रहे थे।
इस मामले पर कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा कि केरल कांग्रेस के सभी बड़े नेता मीटिंग में आ रहे हैं। जो कांग्रेस के किसी काम के नहीं हैं और बड़े नेता नहीं हैं वे आएं या न आएं कोई फर्क नहीं पड़ता।
इस घटनाक्रम से कांग्रेस के केरल इकाई और राष्ट्रीय नेतृत्व के बीच तनाव की चर्चा तेज हो गई है। पार्टी के कुछ नेताओं ने थरूर के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं, और वरिष्ठ नेता संदीप दीक्षित ने स्पष्ट कहा है कि थरूर के आने या न आने से बैठक की प्रक्रिया पर कोई खास फर्क नहीं पड़ेगा, एक तरह से थरूर की भूमिका पर ही सवाल खड़ा कर दिया है।
विश्लेषकों के मुताबिक, यह मामला सिर्फ एक बैठक से बाहर रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि कांग्रेस के चुनावी अभियान के नजरिए और नेकामी नेतृत्व समीकरण को भी प्रभावित कर सकता है। क्योंकि केरल विधानसभा चुनाव कांग्रेस के लिए बेहद महत्वपूर्ण है और ऐसे समय में किसी वरिष्ठ नेता का बैठक से बाहर होना पार्टी की एकता और रणनीति पर प्रश्न चिन्ह लगा रहा है।
कुल मिलाकर, शशि थरूर की बैठक में अनुपस्थिति ने कांग्रेस की आंतरिक राजनीति, नेतृत्व समीकरण, और केरल में चुनावी तैयारियों की दिशा को लेकर नई बहस छेड़ दी है, जो आगे राजनीतिक रणनीति और पार्टी की छवि पर असर डाल सकती है।


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