पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी घटने का दावा, हिंसा और जबरन धर्म परिवर्तन पर चिंता

पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी घटने का दावा, हिंसा और जबरन धर्म परिवर्तन पर चिंता

इस्लामाबाद, 29 अक्टूबर 2026 | पाकिस्तान में हिंदू समुदाय की आबादी और धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर ब्रिटेन के एक संगठन की रिपोर्ट सामने आई है। ब्रिटिश हिंदू संगठन INSIGHT UK की रिपोर्ट के मुताबिक, 1947 में भारत के विभाजन से पहले उस क्षेत्र में हिंदुओं की आबादी 14.6% थी, जो आज पाकिस्तान की कुल आबादी में घटकर लगभग 1.7% रह गई है। रिपोर्ट में इस बदलाव के साथ धार्मिक भेदभाव, हिंसा, संपत्ति से बेदखली और जबरन धर्म परिवर्तन जैसे मुद्दों को भी उठाया गया है।

पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी अब सिर्फ 1.7% रह गई है। ब्रिटिश हिंदू संगठन इनसाइट यूके की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई। 1941 में आज के पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी 14.6% थी।

रिपोर्ट में हिंदुओं की आबादी घटने की वजह हिंसा और धर्म परिवर्तन बताया गया। रिपोर्ट में कहा गया कि बंटवारे के समय और उसके बाद हजारों हिंदू परिवारों को अपना घर छोड़ना पड़ा। कई परिवारों की पुश्तैनी जमीन और खेत भी छिन गए।

रिपोर्ट में धार्मिक स्वतंत्रता पर रोक और जबरन धर्म परिवर्तन के मामले भी उठाए गए हैं। संगठन ने ब्रिटिश सरकार से पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए कदम उठाने की मांग की है।

ब्रिटिश संसद में उठाया गया हिंदुओं की सुरक्षा का मुद्दा

INSIGHT UK ने अपनी रिपोर्ट The Religious Persecution of Hindus in Pakistan ब्रिटेन में ब्रिटिश हिंदुओं से जुड़े ऑल-पार्टी पार्लियामेंट्री ग्रुप (APPG) के सामने पेश की। रिपोर्ट में ऐतिहासिक रिकॉर्ड और मौजूदा घटनाओं से जुड़े विवरणों के आधार पर पाकिस्तान में हिंदू समुदाय की स्थिति पर चिंता जताई गई है।

29 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्टों के मुताबिक, ब्रिटिश संसदीय समूह इस मुद्दे को ब्रिटेन सरकार के सामने उठाने की तैयारी कर रहा है। इसमें पाकिस्तान को दी जाने वाली ब्रिटिश सहायता को मानवाधिकारों की स्थिति में सुधार से जोड़ने और धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की मांग भी शामिल है। 

1941 के आंकड़ों से आज की स्थिति की तुलना

रिपोर्ट में 1941 की जनगणना के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा गया है कि जिस क्षेत्र को बाद में पश्चिमी पाकिस्तान के रूप में जाना गया, वहां हिंदुओं की आबादी लगभग 14.6% थी। रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा पाकिस्तान में हिंदुओं की हिस्सेदारी करीब 1.7% है।

हालांकि, इन आंकड़ों की तुलना करते समय विभाजन के दौरान हुए बड़े पैमाने पर पलायन, विस्थापन, सीमाओं में बदलाव और दशकों में जनसंख्या वृद्धि जैसे पहलुओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है। केवल आबादी में आई गिरावट से उसके सभी कारणों की पुष्टि नहीं होती। INSIGHT UK का कहना है कि इस बदलाव के साथ अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा और भेदभाव से जुड़ी शिकायतों की भी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। 

रिपोर्ट में 1947 के विभाजन के बाद हिंदू समुदाय के सामने आई चुनौतियों का जिक्र किया गया है। इसके मुताबिक, हिंसा और विस्थापन के कारण कई परिवारों को अपना घर और पारंपरिक आजीविका छोड़नी पड़ी। रिपोर्ट में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुछ परिवारों की पैतृक जमीन और कृषि संपत्तियां शत्रु संपत्ति से जुड़े कानूनों के तहत उनके हाथ से निकल गईं, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति पर असर पड़ा।

रिपोर्ट में मंदिरों पर हमलों, सामाजिक भेदभाव और धार्मिक स्वतंत्रता से जुड़े मामलों को भी शामिल किया गया है। ये आरोप पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के अधिकारों और उनकी सुरक्षा को लेकर व्यापक बहस का हिस्सा हैं। 

जबरन धर्म परिवर्तन और विवाह पर चिंता

INSIGHT UK की रिपोर्ट में हिंदू और ईसाई समुदायों की महिलाओं तथा लड़कियों के कथित अपहरण, जबरन धर्म परिवर्तन और जबरन विवाह के मामलों को गंभीर चिंता का विषय बताया गया है। रिपोर्ट में ऐसे मामलों की संख्या को लेकर अनुमान भी दिया गया है।

यूरोपीय संघ की शरण एजेंसी की पाकिस्तान संबंधी रिपोर्ट में भी धार्मिक अल्पसंख्यकों के सामने आने वाली चुनौतियों का उल्लेख है। उसके अनुसार, पाकिस्तान की 2023 की जनगणना में लगभग 38.67 लाख लोगों ने हिंदू धर्म दर्ज कराया था, जो कुल आबादी का करीब 1.6% था। एजेंसी ने जबरन धर्म परिवर्तन, सामाजिक-आर्थिक भेदभाव और हिंसा से जुड़ी रिपोर्टों का भी उल्लेख किया है। 

ब्रिटेन सरकार से क्या मांग की गई?

रिपोर्ट में ब्रिटेन सरकार से धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए कई कदम उठाने की अपील की गई है। इनमें पाकिस्तान के साथ राजनयिक बातचीत में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना, मानवाधिकारों में प्रगति के आधार पर सहायता देने पर विचार करना और अल्पसंख्यकों के अधिकारों के लिए काम करने वाले संगठनों को सहयोग देना शामिल है।

इसके अलावा, रिपोर्ट में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर हर छह महीने में आधिकारिक रिपोर्ट जारी करने तथा उत्पीड़न का सामना कर रहे लोगों के लिए सुरक्षित शरण के रास्ते बनाने की मांग की गई है। ब्रिटिश संसदीय समूह इस विषय को सरकार और संसद के सामने उठाने पर विचार कर रहा है।

अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर बढ़ी चर्चा

पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी से जुड़े आंकड़े और INSIGHT UK की रिपोर्ट ने धार्मिक स्वतंत्रता तथा अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर फिर ध्यान खींचा है। रिपोर्ट में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच और अलग-अलग जनगणनाओं के आंकड़ों का संदर्भ समझना जरूरी है। इसके साथ ही, धार्मिक पहचान के आधार पर भेदभाव, हिंसा और जबरन धर्म परिवर्तन की शिकायतों पर पारदर्शी जांच तथा प्रभावी कानूनी कार्रवाई की जरूरत भी सामने आती है।