गाजियाबाद में अवैध नाइट क्लबों पर कार्रवाई, आबकारी अधिकारी समेत 3 सस्पेंड
गाजियाबाद , 31 अक्टूबर 2026 | गाजियाबाद में बिना वैध लाइसेंस के नाइट क्लबों और बार में शराब परोसने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार समेत तीन आबकारी अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। निलंबित अधिकारियों में सेक्टर-2 के आबकारी निरीक्षक अखिलेश सिंह और सेक्टर-5 के आबकारी निरीक्षक चमन सिंह भी शामिल हैं। यह कार्रवाई आबकारी विभाग की निगरानी में लापरवाही और अवैध शराब की बिक्री पर रोक नहीं लगा पाने के आरोपों के बाद की गई है।
गाजियाबाद के विभिन्न नाइट क्लब, बार और रेस्टोरेंट को लेकर मिली शिकायतों के बाद अपर जिलाधिकारी नगर की अध्यक्षता में संयुक्त प्रशासनिक टीम गठित की गई थी। टीम में नगर मजिस्ट्रेट, एसडीएम सदर और तहसीलदार सदर को शामिल किया गया। अधिकारियों ने 24 अक्टूबर को इंदिरापुरम, कौशांबी समेत कई इलाकों में पांच बार और रेस्टोरेंट की औचक जांच की। निरीक्षण के दौरान बिना आकस्मिक बार लाइसेंस शराब परोसने और दूसरे राज्यों में बिक्री के लिए निर्धारित शराब की यहां बिक्री किए जाने जैसी अनियमितताएं सामने आईं।
नाइट क्लब में गुप्त रास्ते से प्रवेश
जांच के दौरान एक क्लब में गंभीर स्थिति सामने आई। टीम के पहुंचने पर बाहर से क्लब पर ताला लगा था, जबकि लोगों को गुप्त दरवाजे से अंदर प्रवेश कराया जा रहा था। मौके पर शराब परोसने का वैध लाइसेंस नहीं मिला। जांच में यह भी सामने आया कि संबंधित प्रतिष्ठान कभी-कभार एक दिन के लिए ओकेजनल बार लाइसेंस लेता था, लेकिन इसके बाद नियमित रूप से बिना लाइसेंस शराब परोसे जाने के आरोप सामने आए। एक स्थान पर हरियाणा की शराब भी मिलने की बात सामने आई। मामले में आबकारी विभाग की ओर से संबंधित महिला के खिलाफ भी रिपोर्ट दर्ज कराई गई है।
पहले दो आबकारी निरीक्षक, फिर जिला अधिकारी पर कार्रवाई
मामले में पहले सेक्टर-2 के आबकारी निरीक्षक अखिलेश सिंह और सेक्टर-5 के आबकारी निरीक्षक चमन सिंह को निलंबित किया गया। इसके बाद जिला आबकारी अधिकारी संजय कुमार पर भी कार्रवाई हुई।
शासन ने संजय कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में उन्हें आबकारी आयुक्त कार्यालय, प्रयागराज से संबद्ध किया गया है। उनके खिलाफ विभागीय और अनुशासनिक जांच भी शुरू कर दी गई है।
मेरठ के उप आबकारी आयुक्त करेंगे जांच
पूरे मामले की विस्तृत जांच की जिम्मेदारी मेरठ के उप आबकारी आयुक्त को सौंपी गई है। जांच में यह पता लगाया जाएगा कि नाइट क्लबों में बिना लाइसेंस शराब परोसने का मामला कितने समय से चल रहा था और संबंधित अधिकारियों की भूमिका क्या थी।
अधिकारियों की मिलीभगत या लापरवाही के आरोपों की भी जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
क्या होता है ओकेजनल बार लाइसेंस?
ओकेजनल बार लाइसेंस किसी विशेष आयोजन या निर्धारित अवसर पर शराब परोसने की अनुमति देता है। इसके लिए संबंधित विभाग से निर्धारित नियमों के तहत अनुमति लेना जरूरी होता है। इस लाइसेंस को रोजाना शराब परोसने की स्थायी अनुमति नहीं माना जा सकता।
गाजियाबाद में सामने आए मामले ने बार और नाइट क्लबों में आबकारी नियमों के पालन तथा विभागीय निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच के नतीजों से स्पष्ट होगा कि इस अवैध गतिविधि में किन लोगों की जिम्मेदारी तय होती है।


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