केरल में पहली बार भाजपा का मेयर, राज्य की राजनीति में ऐतिहासिक मोड़
तिरुवनंतपुरम, 26 दिसंबर 2025 । केरल की राजनीति में एक ऐतिहासिक घटनाक्रम देखने को मिला है, जहां पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का मेयर चुना गया है। लंबे समय से वामपंथी और कांग्रेस के प्रभाव वाले इस राज्य में भाजपा की यह सफलता नगर निकाय राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत मानी जा रही है। इस उपलब्धि को पार्टी के लिए संगठनात्मक मजबूती और जमीनी विस्तार की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
केरल में पहली बार भाजपा का मेयर चुना गया है। तिरुवनंतपुरम नगर निगम में शुक्रवार को हुए मेयर चुनाव में भाजपा के वीवी राजेश को 51 वोट मिले। जिसमें एक निर्दलीय पार्षद का समर्थन भी शामिल था।
वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) के पी शिवाजी को 29 वोट, जबकि कांग्रेस गठबंधन (UDF) उम्मीदवार केएस सबरिनाथन को 19 वोट मिले। जिनमें से दो को बाद में अमान्य घोषित कर दिया गया।
दरअसल 9 दिसंबर को तिरुवनंतपुरम नगर निगम के 101 वार्डों का रिजल्ट आया था। 50 वार्डों पर भाजपा जीती थी। पिछले 45 साल से यहां वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (LDF) का कब्जा था। LDF ने 29 और कांग्रेस गठबंधन (UDF) ने 19 वार्ड जीते थे। तिरुवनंतपुरम कांग्रेस सांसद शशि थरूर का गढ़ है।
केरल के 1,199 स्थानीय निकायों के लिए दो फेज 9 और 11 दिसंबर को वोटिंग हुई थी। इनमें 6 कॉर्पोरेशन, 86 नगर पालिकाएं, 14 डिस्ट्रिक्ट काउंसिल, 152 ब्लॉक पंचायत और 941 ग्राम पंचायतें शामिल हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह सफलता केवल एक नगर निगम तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि आने वाले समय में इसका असर राज्य की व्यापक राजनीति पर भी पड़ सकता है। मेयर पद पर भाजपा की मौजूदगी से पार्टी को शहरी शासन का अनुभव मिलेगा, जिससे वह विकास मॉडल और प्रशासनिक कार्यशैली को जनता के सामने प्रस्तुत कर सकेगी। साथ ही, यह जीत पार्टी कार्यकर्ताओं के मनोबल को भी काफी बढ़ाने वाली मानी जा रही है।
भाजपा नेतृत्व ने इस उपलब्धि को लोकतांत्रिक प्रक्रिया की जीत बताते हुए कहा है कि यह जनविश्वास का परिणाम है। वहीं, विपक्षी दलों के लिए यह नतीजा आत्ममंथन का विषय बन गया है। केरल में पहली बार भाजपा का मेयर बनना यह दर्शाता है कि राज्य की राजनीति अब नए दौर में प्रवेश कर रही है, जहां परंपरागत धारणाओं को चुनौती मिल रही है और स्थानीय स्तर पर विकल्पों की तलाश तेज हो रही है।


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