प्रॉपर्टी बेचने वाले का नाम खसरा-खतौनी में भी होना अनिवार्य, तभी हो सकेगी रजिस्ट्री; यूपी सरकार का अहम फैसला
उत्तर प्रदेश, 10 मार्च 2026 । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने उत्तर प्रदेश में जमीन और संपत्ति की खरीद-फरोख्त को लेकर बड़ा फैसला लिया है। नए नियम के अनुसार अब किसी भी जमीन या प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री तभी होगी, जब उसे बेचने वाले व्यक्ति का नाम संबंधित जमीन की खसरा-खतौनी में दर्ज होगा।
उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में आज मंगलवार को अहम कैबिनेट बैठक में 30 प्रस्तावों को मंजूरी दे दी गई. योगी कैबिनेट ने उस प्रस्ताव को भी अपनी मंजूरी दे दी है जिसके तहत अब किसी भी संपत्ति को बेचने से पहले विक्रेता का नाम खतौनी या अन्य दस्तावेज में मिलान किया जाएगा. यदि दोनों जगह नाम आपस में नहीं मिलते हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी. इस नई व्यवस्था के जरिए खरीद-फरोख्त से जुड़े फर्जीवाड़ा पर लगाम लगाई जा सकेगी.
राज्य सरकार का कहना है कि इस निर्णय का उद्देश्य फर्जी तरीके से जमीन बेचने, धोखाधड़ी और विवादों को रोकना है। कई मामलों में यह देखा गया था कि जमीन का मालिक कोई और होता है, जबकि रजिस्ट्री किसी दूसरे व्यक्ति के नाम से करा दी जाती थी। इससे बाद में कानूनी विवाद और मुकदमेबाजी बढ़ जाती थी।
अब नई व्यवस्था में रजिस्ट्री से पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जमीन का असली मालिक वही व्यक्ति है, जिसका नाम राजस्व अभिलेख यानी खसरा-खतौनी में दर्ज है। अगर बेचने वाले का नाम इन रिकॉर्ड में नहीं होगा, तो उसकी रजिस्ट्री नहीं की जाएगी। इससे जमीन के असली मालिक के अधिकार सुरक्षित रहेंगे और धोखाधड़ी के मामलों में कमी आने की उम्मीद है।
यह फैसला विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन से जुड़े विवादों को कम करने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अक्सर जमीन के पुराने रिकॉर्ड, बंटवारे या नामांतरण में गड़बड़ी के कारण फर्जी सौदे हो जाते थे। अब राजस्व रिकॉर्ड और रजिस्ट्री प्रक्रिया को आपस में जोड़कर पारदर्शिता बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से जमीन के लेन-देन में पारदर्शिता आएगी और खरीदारों को भी सुरक्षा मिलेगी। हालांकि जिन लोगों के नाम अभी तक खसरा-खतौनी में अपडेट नहीं हैं, उन्हें पहले नामांतरण या रिकॉर्ड सुधार की प्रक्रिया पूरी करनी होगी, तभी वे जमीन बेच सकेंगे।


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