पिंक सहेली कार्ड के लिए दिल्ली के डिपो में महिलाओं की लंबी कतार

पिंक सहेली कार्ड के लिए दिल्ली के डिपो में महिलाओं की लंबी कतार

नई दिल्ली, 07 अक्टूबर 2026 । दिल्ली में महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की व्यवस्था अब पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड से जुड़ गई है। लेकिन इस व्यवस्था को लागू करने के दौरान महिलाओं को डिपो पर भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पिंक सहेली कार्ड बनवाने के लिए सुबह से ही बस डिपो के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं। कई महिलाएं नौकरी से छुट्टी लेकर कार्ड बनवाने पहुंचीं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी उनका कार्ड नहीं बन पाया।

उत्तम नगर और हसनपुर जैसे डिपो पर बड़ी संख्या में महिलाएं कार्ड बनवाने के लिए पहुंच रही हैं। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए टोकन बांटे जा रहे हैं, लेकिन सीमित क्षमता के कारण महिलाओं को अपनी बारी के लिए काफी देर इंतजार करना पड़ रहा है।

टोकन मिलने के बाद भी घंटों लाइन में खड़ी रहीं, पर कार्ड नहीं बन सका

उत्तम नगर बस टर्मिनल पर सुबह 7 बजे से ही महिलाएं कतारों में खड़ी होने लगी थीं। भीड़ ज्यादा बढ़ी तो कर्मचारियों ने पहले सुबह 9 बजे टोकन बांटे। फिर 11 बजे दोबारा टोकन दिए। लेकिन टोकन बांटने के बाद भी घंटों लाइन में खड़ी दर्जनों औरतों का कार्ड नहीं बन सका। कई महिलाएं नौकरी से छुट्टी लेकर आई थीं, तो कुछ पुराने कार्ड को दोबारा चालू कराने पहुंची थीं। फैक्ट्री में काम करने वाली महिला ने गुस्सा और दर्द जताते हुए कहा, मैं फैक्ट्री में काम करती हूं, महीने के 12 हजार रुपये मिलते हैं। आज दिहाड़ी का नुकसान करके छुट्टी लेकर आई हूं। तीन महीने पहले कार्ड बनवाया था, अब वो चल नहीं रहा। यहां घंटों लग रहे हैं। काम करें या लाइन में खड़े रहें?

उत्तम नगर बस डिपो पर महिलाओं की भीड़ सुबह से ही जमा हो गई। रिपोर्ट के मुताबिक, सुबह करीब 7 बजे से महिलाएं कतार में लगने लगी थीं। भीड़ बढ़ने के बाद कर्मचारियों ने टोकन बांटने शुरू किए, लेकिन टोकन मिलने के बावजूद कई महिलाओं का कार्ड नहीं बन सका।

कुछ महिलाएं पहले भी कार्ड बनवाने या पुराने कार्ड से जुड़ी समस्या दूर कराने के लिए डिपो पहुंच चुकी थीं। दोबारा आने पर भी उन्हें लंबी कतार का सामना करना पड़ा।

नौकरीपेशा महिलाओं की बढ़ी परेशानी

सबसे ज्यादा परेशानी उन महिलाओं को हो रही है जिन्हें कार्ड बनवाने के लिए काम से छुट्टी लेनी पड़ रही है। कई महिलाओं ने बताया कि छुट्टी लेने के साथ-साथ आने-जाने का खर्च भी उठाना पड़ रहा है।

एक महिला ने बताया कि वह फैक्ट्री में काम करती हैं और उनकी मासिक आय करीब ₹12 हजार है। कार्ड बनवाने के लिए छुट्टी लेने पर उस दिन की कमाई का नुकसान हो रहा है। वहीं, कुछ महिलाओं ने बताया कि वे लगातार दूसरे दिन छुट्टी लेकर डिपो पहुंची हैं।

ऐसे में महिलाओं के सामने सवाल है कि मुफ्त बस यात्रा का लाभ लेने के लिए कार्ड बनवाने की प्रक्रिया इतनी मुश्किल क्यों हो रही है।

हसनपुर बस डिपो पर भी महिलाओं की बड़ी भीड़ देखने को मिली। यहां कतार काफी लंबी होने के कारण कई महिलाओं को घंटों इंतजार करना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, दोपहर तक सैकड़ों महिलाएं कार्ड बनवाने की उम्मीद में कतार में खड़ी थीं।

टोकन व्यवस्था के बावजूद कार्ड बनाने की रफ्तार और पहुंचने वाली महिलाओं की संख्या में अंतर दिखाई दिया। इससे इंतजार लगातार बढ़ता गया।

पिंक टिकट की जगह अब स्मार्ट कार्ड जरूरी

दिल्ली में महिलाओं की मुफ्त बस यात्रा के लिए पहले पिंक पेपर टिकट की व्यवस्था थी। अब पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड को मुफ्त यात्रा के लिए जरूरी कर दिया गया है। नई व्यवस्था के तहत पात्र दिल्ली निवासी महिलाओं को DTC और क्लस्टर बसों में मुफ्त यात्रा के लिए पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड का इस्तेमाल करना होगा।

सरकार के मुताबिक, अब तक 19 लाख से ज्यादा पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड बनाए जा चुके हैं और पात्र महिलाओं के लिए कार्ड बनाने की प्रक्रिया जारी रहेगी। परिवहन मंत्री डॉ. पंकज कुमार सिंह ने कहा है कि सभी पात्र महिलाओं को कार्ड मिलने तक आवेदन और कार्ड बनाने की प्रक्रिया जारी रहेगी।

डिपो पर इंतजार कर रही कई महिलाओं का कहना है कि पहले पिंक टिकट के जरिए मुफ्त यात्रा करना ज्यादा आसान था। अब कार्ड बनवाने के लिए डिपो जाना, लाइन में लगना और कई घंटे इंतजार करना पड़ रहा है।

कुछ महिलाओं ने यह भी शिकायत की कि उन्हें नियम में बदलाव की जानकारी समय पर नहीं मिली। अचानक कार्ड अनिवार्य होने के बाद बड़ी संख्या में महिलाएं डिपो पहुंचीं, जिससे व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया।

कार्ड व्यवस्था के साथ तकनीकी चुनौतियां भी

पिंक सहेली कार्ड लागू होने के बाद केवल कार्ड बनवाने में ही नहीं, बल्कि बसों में इसके इस्तेमाल को लेकर भी कुछ दिक्कतें सामने आई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, DTC की कुछ बसों में कार्ड टैप करने और सामान्य यात्रियों के टिकट बनाने के लिए एक ही इलेक्ट्रॉनिक टिकटिंग मशीन का इस्तेमाल हो रहा है। इससे भीड़ के समय टिकटिंग प्रक्रिया धीमी होने की शिकायतें सामने आई हैं।

ऐसे में कार्ड बनाने वाले केंद्रों की क्षमता बढ़ाने के साथ-साथ बसों में कार्ड स्कैनिंग की व्यवस्था को भी सुचारु करना जरूरी होगा, ताकि डिजिटल व्यवस्था का उद्देश्य यात्रियों के लिए सुविधा बन सके, परेशानी नहीं।