बारिश के पानी में ही सरकार के तमाम दावे भी बह गए
" आलोक गौड़ "
" कबीरा खड़ा बाजार में मांगे सबकी खैर,
ना काहू से अपनी दोस्ती, ना काहू से बैर।"
नई दिल्ली। कहावत है कि पूत के पांव पालने में ही दिख जाते हैं। इसके मद्देनजर यह कहा जा सकता है कि मानसून के दौरान दिल्लीवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। क्योंकि मानसून से पहले हुई बारिश के बाद जिस तरह से जगह जगह जलभराव और यातायात की जिस गंभीर समस्या से लोगों को जूझना पड़ा, उससे तो ऐसा ही लगता कि मानसून दिल्ली वालों के लिए राहत कम और आफत ज्यादा लेकर आने वाला है।
इस बारिश के पानी में दिल्ली सरकार और स्थानीय निकायों की ओर से मानसून से निपटने के संबंध में की गई तैयारियों के दावे भी बह गए। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और उनके लोक निर्माण मंत्री परवेश साहिब सिंह ने एक नहीं बल्कि कई बार यह दावा किया था कि मानसून के दौरान जलभराव की समस्या दिल्लीवासियों के लिए अतीत की बात बन कर रह जाएगी। इतना ही उन्होंने बरसात के दौरान होने वाले जलभराव की समस्या के लिए पूर्ववर्ती सरकारों को कोसते हुए यह भी कहा था कि भ्रष्टाचार के कारण पहले नालों की सफाई ठीक ढ़ंग से नहीं होती थी। लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। उनका दावा था कि उनकी सरकार ने मानसून के दौरान होने वाली सभी समस्याओं से निपटने की पूरी तैयारी कर ली है।
जलभराव की समस्या के लिए सरकार व स्थानीय निकायों के साथ ही नागरिक भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। जिन्होंने अपने मकान के सामने वाली दो तीन मीटर जमीन पर कब्जा करने के लिए बरसाती नालियों का पाट दिया है। एक दो दशक पहले तक इन बरसाती नालियों के जरिए बारिश का पानी सीवर लाइन तक पहुंच जाता था। अब ऐसी नालियों के न रहने की वजह से बारिश का पानी कालोनियों से होते हुए सड़कों तक पहुंच जाता है। जिससे जलभराव होता है। शहरी विकास के विशेषज्ञों के मुताबिक राजनेताओं को वोट बैंक का मोह त्याग कर इन बरसाती नालियों पर हुए अवैध कब्जे हटवा कर इन्हें पुनर्जीवित करना चाहिए। जलभराव की समस्या दूसरा बड़ा कारण दिल्ली के लगभग सभी फुटपाथ को पक्का कर देना है। पहले जब फुटपाथ कच्चे थे तो इनके जरिए वर्षा का पानी जमीन के भीतर चला जाता था। इससे जहां बरसात का पानी इकठ्ठा नही होता। वहीं वर्षा का पानी जमीन के भीतर जाने से भूजल का स्तर भी बढ़ जाता था।
इसे विडम्बना कहें या दिल्ली का दुर्भाग्य कि हर साल दिल्ली यातायात पुलिस चार सौ से अधिक ऐसे स्थानों की सूची दिल्ली सरकार के लोक निर्माण विभाग और स्थानीय निकायों के पास भेजती है जहां मानसून के दौरान जलभराव हो सकता है। मानसून के हर साल इन स्थानों के साथ ही कुछ अन्य इलाकों में भी जलभराव की स्थिति पैदा हो जाती है।
जलभराव के साथ ही दूसरी जो सबसे बड़ी समस्या लोगों के लिए परेशानी का सबब बनती है। वह यातायात जाम हो जाना। दरअसल जरा सी बारिश होते ही सड़कों पर लगे सिग्नल काम करना बंद कर देते हैं। कुछ अपवाद को छोड़ दें ऐसे मौके पर यातायात पुलिस भी सड़कों से नदारद रहती है। इसके साथ ही दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार की ओर से जो अंडरपास बनाए गए हैं उनके भी बारिश का पानी भर जाता है। जिसकी वजह से अंडरपास तालाब का रूप अख्तियार कर लेते हैं। बार बार ऐसी ही स्थिति पैदा होने के बावजूद अभी तक अंडरपास में जलभराव रोकने के उपाय नहीं किए गए हैं।
इसके मानसून से पहले नालों की सफाई के नाम पर की जाने वाली रस्म अदायगी और सफाई के लिए रखे गए करोड़ों रुपए भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ जाना भी जलभराव की समस्या के जनक हैं। अभी मानसून आने में लगभग दो सप्ताह का समय है। ऐसे में अगर रेखा गुप्ता सरकार ने उचित कदम उठा लिए तो लोगों को बरसात के कारण होने वाली परेशानियों से बचाया जा सकता है।


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