अमित शाह का बड़ा ऐलान, सभी बीजेपी शासित राज्यों में लागू होगा UCC
देहरादून, 06 नवंबर 2026 | उत्तराखंड स्थापना दिवस के अवसर पर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बड़ा बयान दिया। शुक्रवार, 6 नवंबर 2026 को देहरादून में आयोजित उत्तराखंड राज्योत्सव समारोह में उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे देश के सभी बीजेपी शासित राज्यों में UCC लागू किया जाएगा। शाह ने यह भी बताया कि उत्तराखंड के मॉडल को देखते हुए देश के 15 अन्य राज्य भी समान नागरिक संहिता बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
अमित शाह के इस बयान को बीजेपी शासित राज्यों में UCC के विस्तार की योजना के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, उन्होंने अपने संबोधन में इन 15 राज्यों के नाम या कानून लागू करने की कोई निश्चित समयसीमा नहीं बताई।गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने सालों तक मनी ऑर्डर इकोनॉमी और पलायन के भरोसे उत्तराखंड को छोड़ा हुआ था। कांग्रेस ने पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी कभी पहाड़ के काम में न आए, ऐसी नीतियां बनाई थीं। हमने पलायन को रोकने का हर संभव प्रयास किया है और हमने मनी ऑर्डर इकोनॉमी की जगह यहां धन का सृजन करने वाली औद्योगिक इकोनॉमी लगाने का काम किया है।
उत्तराखंड के UCC मॉडल की अमित शाह ने की तारीफ
अमित शाह ने उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने को महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि राज्य ने इस दिशा में पहल करके दूसरे राज्यों के सामने उदाहरण पेश किया है।
उन्होंने उत्तराखंड के UCC का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में अब कोई भी व्यक्ति चार शादियां नहीं कर सकता और महिलाओं को तीन तलाक जैसी व्यवस्था से सुरक्षा मिली है। शाह ने इसे महिलाओं के अधिकारों से जोड़ते हुए राज्य सरकार के फैसले की सराहना की।
15 राज्य UCC बनाने की दिशा में आगे बढ़े
गृह मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि उत्तराखंड के रास्ते पर चलते हुए देश के 15 अन्य राज्य भी UCC बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि बीजेपी धीरे-धीरे अपने सभी शासित राज्यों में इस कानून को लागू करेगी।
हालांकि, अमित शाह ने उन 15 राज्यों की सूची सार्वजनिक नहीं की। साथ ही यह भी स्पष्ट नहीं किया कि किन राज्यों में कानून का मसौदा तैयार हो चुका है और किन राज्यों में अभी शुरुआती स्तर पर विचार चल रहा है।
क्या है समान नागरिक संहिता (UCC)?
समान नागरिक संहिता यानी यूनिफॉर्म सिविल कोड का उद्देश्य विवाह, तलाक, उत्तराधिकार, संपत्ति और गोद लेने जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान कानूनी व्यवस्था लागू करना है।
फिलहाल भारत में अलग-अलग धार्मिक समुदायों के व्यक्तिगत मामलों में कई जगह अलग-अलग पर्सनल लॉ लागू होते हैं। UCC के तहत इन मामलों के लिए एक समान कानूनी ढांचा तैयार करने की व्यवस्था है।
संविधान के अनुच्छेद 44 में राज्य को नागरिकों के लिए समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में प्रयास करने का निर्देश दिया गया है। यह प्रावधान राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों का हिस्सा है।
उत्तराखंड देश में UCC लागू करने वाला पहला राज्य
उत्तराखंड ने फरवरी 2024 में समान नागरिक संहिता विधेयक पारित किया था। इसके बाद जनवरी 2025 में राज्य में UCC लागू कर दिया गया। स्वतंत्रता के बाद उत्तराखंड इस तरह की संहिता लागू करने वाला पहला राज्य बना।
इसके अलावा गुजरात, असम और मध्य प्रदेश में भी UCC से जुड़े विधायी कदम उठाए गए हैं। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ सहित कुछ राज्यों में इस संबंध में मसौदा तैयार करने या अध्ययन के लिए समितियां गठित की गई हैं। अलग-अलग राज्यों में इन प्रक्रियाओं की स्थिति अलग है।
उत्तराखंड स्थापना दिवस पर विकास का भी किया जिक्र
अमित शाह ने राज्योत्सव समारोह में उत्तराखंड के विकास कार्यों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य में विकास की दिशा में काम हुआ है।
शाह ने दावा किया कि 2022 के बाद उत्तराखंड का सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) करीब 50 प्रतिशत बढ़ा है और प्रति व्यक्ति आय में लगभग 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में एक लाख करोड़ रुपये की औद्योगिक परियोजनाओं पर काम शुरू हो चुका है।
गृह मंत्री ने वर्ष 2047 तक उत्तराखंड को विकसित भारत के अभियान में देश का पहला विकसित राज्य बनाने का लक्ष्य भी दोहराया।
बीजेपी शासित राज्यों में UCC पर बढ़ेगी चर्चा
अमित शाह के ताजा बयान से साफ है कि बीजेपी UCC को उत्तराखंड तक सीमित रखने के बजाय अन्य राज्यों में भी लागू करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहती है। अब निगाहें उन राज्यों की सरकारों पर रहेंगी, जहां इस कानून को लेकर अध्ययन, मसौदा तैयार करने या विधायी प्रक्रिया चल रही है।
फिलहाल सभी बीजेपी शासित राज्यों में UCC लागू करने की कोई निश्चित तारीख घोषित नहीं हुई है। संबंधित राज्य सरकारों की प्रक्रिया और विधानसभा में विधायी कदम इस योजना की अगली दिशा तय करेंगे।


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