मजीठिया मामले की फाइल ED को सौंपकर AAP ने चली नई चाल

मजीठिया मामले की फाइल ED को सौंपकर AAP ने चली नई चाल

चंडीगढ़, 06 नवंबर 2026 | पंजाब में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने शिरोमणि अकाली दल (SAD) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) से जांच की मांग की है। पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने इस संबंध में ED को पत्र लिखकर मामला दर्ज करने और कथित वित्तीय लेन-देन की जांच करने का आग्रह किया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब पंजाब में अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच दोबारा गठबंधन की अटकलें तेज हैं।

विजिलेंस ब्यूरो की जांच में करीब ₹736.96 करोड़ की कथित अपराध से अर्जित आय और वित्तीय लेन-देन को संदेह के दायरे में रखा गया है। राजनीतिक जानकार इस कदम को पंजाब की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, सरकार की ओर से की गई कार्रवाई और उसके पीछे बताए जा रहे राजनीतिक मायनों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

क्या है वित्तीय हेरफेर और मनी ट्रेल का मामला?

विजिलेंस ब्यूरो के प्रवक्ता के अनुसार, उनकी जांच में एक व्यापक वित्तीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है जिसका उपयोग परिवार के सदस्यों, करीबी सहयोगियों, कई कंपनियों और विदेशी संस्थाओं के माध्यम से अघोषित संपत्ति को पैदा करने, रूट करने, लेयरिंग करने और छुपाने के लिए किया गया था। जांच में बिक्रम सिंह मजीठिया को इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड और प्राथमिक लाभार्थी बताया गया है। ड्रग्स की बिक्री से कथित तौर पर जनरेट हुए पैसों के ट्रेल की जांच के दायरे में 736.96 करोड़ रुपये के 'अपराध की कमाई' को लाया गया है। जांच में तीन चरणों- जेनरेशन, लेयरिंग और इंटीग्रेशन का जिक्र किया गया है। इसके अलावा साइप्रस और सिंगापुर की विदेशी संस्थाओं के साथ-साथ घरेलू कंपनियों के जरिए भी लेनदेन का पता लगाया गया है।

₹736.96 करोड़ के कथित मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की जांच

पंजाब विजिलेंस ब्यूरो के मुताबिक, मजीठिया से जुड़े मामले की जांच में कथित तौर पर एक व्यापक वित्तीय नेटवर्क सामने आया है। एजेंसी का दावा है कि इस नेटवर्क के जरिए परिवार के सदस्यों, करीबी सहयोगियों, कंपनियों और विदेशी संस्थाओं के माध्यम से धन का लेन-देन किया गया।

विजिलेंस के अनुसार, जांच में धन जुटाने, अलग-अलग माध्यमों से उसे स्थानांतरित करने और फिर संपत्तियों में निवेश करने की तीन चरणों वाली प्रक्रिया के संकेत मिले हैं। ब्यूरो ने कथित लेन-देन के तार साइप्रस और सिंगापुर स्थित विदेशी संस्थाओं से भी जुड़े होने की बात कही है।

जांच एजेंसी के दावों के मुताबिक, संदिग्ध धन का इस्तेमाल संपत्तियों, विमान, निवेश और दूसरी परिसंपत्तियों में किया गया। विजिलेंस ने मजीठिया को इस कथित नेटवर्क का मुख्य लाभार्थी बताया है। हालांकि, ये सभी आरोप जांच एजेंसी के निष्कर्ष हैं और इन पर अंतिम फैसला अदालत में होना है।

ED से क्या चाहती है पंजाब सरकार?

पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने ED से कथित मनी लॉन्ड्रिंग के पहलू की अलग से जांच करने और इस संबंध में मामला दर्ज करने का अनुरोध किया है। मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की जांच में ED को वित्तीय लेन-देन, कंपनियों के खातों, संपत्तियों और धन के स्रोत की पड़ताल करने का अधिकार है।

विजिलेंस की ओर से भेजी गई जानकारी में घरेलू कंपनियों और विदेशी संस्थाओं के जरिए हुए कथित लेन-देन का जिक्र है। अब इस मामले में ED क्या कदम उठाती है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल पंजाब विजिलेंस की मांग को ED की ओर से जांच शुरू किए जाने या आरोप साबित होने के बराबर नहीं माना जा सकता।

अकाली दल-BJP गठबंधन की चर्चा के बीच क्यों अहम है यह कदम?

पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अकाली दल और BJP के बीच संभावित दोबारा गठबंधन को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। दोनों दल पहले लंबे समय तक गठबंधन में सरकार चला चुके हैं, लेकिन 2020 में कृषि कानूनों और किसान आंदोलन के मुद्दे पर उनके रास्ते अलग हो गए थे।

ऐसे राजनीतिक माहौल में AAP सरकार की ओर से अकाली नेता के मामले को केंद्रीय जांच एजेंसी तक पहुंचाना चर्चा का विषय बन गया है। राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस कदम से BJP के सामने भी सवाल खड़ा होता है कि उसकी केंद्र सरकार के अधीन काम करने वाली ED इस मामले में क्या कार्रवाई करती है।

दूसरी ओर, AAP को इस घटनाक्रम के जरिए विपक्षी दलों पर भ्रष्टाचार और नशे से जुड़े आरोपों को लेकर जवाबदेही का सवाल उठाने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, अकाली दल और BJP के बीच गठबंधन की अभी कोई औपचारिक घोषणा नहीं हुई है।

मजीठिया पहले भी रह चुके हैं जांच के दायरे में

बिक्रम सिंह मजीठिया के खिलाफ पंजाब में पहले भी ड्रग्स और आय से अधिक संपत्ति से जुड़े मामले में कार्रवाई हो चुकी है। उन्हें जून 2021 में दर्ज ड्रग्स मामले से जुड़ी जांच के आधार पर जून 2025 में आय से अधिक संपत्ति के मामले में गिरफ्तार किया गया था। बाद में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद अगस्त 2022 में वह जेल से बाहर आए थे।

अक्टूबर 2026 में पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने मजीठिया के खिलाफ मोहाली की विशेष अदालत में पूरक आरोपपत्र भी दाखिल किया था। रिपोर्टों के मुताबिक, इसमें कथित वित्तीय अनियमितताओं और कंपनियों के खातों में हुए लेन-देन का विस्तृत ब्योरा शामिल है।

मजीठिया ने आरोपों को बताया निराधार

मजीठिया पहले भी अपने खिलाफ लगे आरोपों को खारिज कर चुके हैं। उन्होंने जांच एजेंसियों की कार्रवाई और आरोपों पर सवाल उठाते हुए इन्हें निराधार बताया है। उनका कहना है कि आरोप अदालत में टिक नहीं पाएंगे।

इसलिए मौजूदा मामले में विजिलेंस ब्यूरो के दावों, मजीठिया के पक्ष और ED की संभावित जांच—तीनों को ध्यान में रखना जरूरी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि ED पंजाब विजिलेंस की मांग पर क्या निर्णय लेती है और कथित ₹736.96 करोड़ के वित्तीय लेन-देन की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।