लखनऊ में बाढ़ का कहर, 50 हजार से ज्यादा घरों में पानी भरने की खबर

लखनऊ में बाढ़ का कहर, 50 हजार से ज्यादा घरों में पानी भरने की खबर

लखनऊ , 15 अक्टूबर 2026 । उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में गोमती नदी के बढ़े जलस्तर और बाढ़ के पानी ने कई रिहायशी इलाकों में जनजीवन प्रभावित कर दिया। निचले क्षेत्रों में पानी घरों और गलियों तक पहुंचने से हजारों परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोगों को सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा, जबकि कुछ परिवार अपने घरों की छतों या ऊंचे हिस्सों में रहकर पानी उतरने का इंतजार करते रहे। अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में प्रभावित घरों की संख्या के अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। एक रिपोर्ट में करीब 40 हजार घरों के प्रभावित होने की बात कही गई, जबकि कुछ खबरों में यह संख्या 50 हजार से अधिक बताई गई।

लखनऊ का फैजुल्लागंज 2 हफ्तों से बाढ़ के पानी से घिरा हुआ है। गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से स्थिति भयावह हो चुकी है। 50 हजार से ज्यादा घरों में 5 फीट तक पानी भरा है। एक-मंजिला मकानों में रहने वाले लोग छतों पर तिरपाल डालकर दिन काट रहे हैं।

वहीं, राजस्थान में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के असर से बुधवार को पश्चिमी जिलों में मौसम बदल गया। जयपुर सहित कुल 13 जिलों में भारी बारिश का अलर्ट है।

जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर-लेह नेशनल हाईवे पर स्थित जोजिला दर्रे में बर्फबारी हुई। यह दर्रा कश्मीर को लद्दाख से जोड़ता है। वहीं, दक्षिण कश्मीर के पहलगाम और आसपास के इलाकों में भी बर्फ गिरी। गुलमर्ग, सोनमर्ग, राजदान टॉप और गुरेज के तुलैल में भी स्नोफॉल हुआ।

घरों में पानी भरने से लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित

बाढ़ का असर केवल घरों तक सीमित नहीं रहा। कई जगह सड़कों और गलियों में पानी जमा होने से आवागमन बाधित हुआ। प्रभावित परिवारों को जरूरी सामान निकालने, बच्चों और बुजुर्गों को सुरक्षित रखने तथा भोजन-पानी की व्यवस्था करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

लंबे समय तक पानी जमा रहने से घरों की दीवारों, फर्नीचर और घरेलू उपकरणों को नुकसान पहुंचने की आशंका भी बनी। स्थानीय लोगों ने राहत सामग्री, साफ पानी और नियमित मदद की जरूरत बताई। कुछ प्रभावित क्षेत्रों में सांपों और अन्य जीवों के घरों के आसपास पहुंचने का खतरा भी सामने आया।

गोमती का जलस्तर घटने लगा, लेकिन प्रभावित परिवारों की मुश्किलें बरकरार

11 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, गोमती नदी का जलस्तर घटना शुरू हुआ था। इसके बाद पानी घटने वाले क्षेत्रों में सफाई और नुकसान का आकलन प्राथमिकता बना। हालांकि, पानी उतरने के बाद भी घरों से गाद निकालना, खराब सामान की मरम्मत करना और साफ-सफाई सुनिश्चित करना प्रभावित परिवारों के लिए बड़ी चुनौती है।

लखनऊ की इस बाढ़ ने शहरी जलनिकासी, नदी के किनारे बसी आबादी और बाढ़ के मैदानों में निर्माण से जुड़े सवालों को भी फिर चर्चा में ला दिया है। भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए बेहतर जलनिकासी व्यवस्था, प्राकृतिक जलमार्गों की सुरक्षा और समय पर राहत पहुंचाने की व्यवस्था जरूरी होगी।