बिहार NDA में बढ़ी खींचतान, राहुल राज की BJP में वापसी पर JDU नाराज
पटना,02 नवंबर 2026 | बिहार में भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल यूनाइटेड (JDU) के बीच नए राजनीतिक विवाद ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की अंदरूनी एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय विधान परिषद सदस्य (MLC) चुने गए राहुल राज की BJP में वापसी को लेकर JDU ने नाराजगी जताई है।
JDU के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने 2 नवंबर 2026 को इस मामले पर सवाल उठाते हुए कहा कि BJP ने राहुल राज को पहले छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित किया था, लेकिन चुनाव जीतने के तुरंत बाद उन्हें फिर से पार्टी में शामिल करने की जरूरत क्यों पड़ी? उन्होंने BJP के शीर्ष नेतृत्व से इस फैसले पर विचार करने की बात कही और NDA के सभी घटक दलों को गठबंधन की एकता पर ध्यान देने की सलाह दी।
NDA में मचा घमासान
उमेश कुशवाहा ने सारण शिक्षक सीट से जीते एमएलसी राहुल राज के बीजेपी में शामिल होने पर सवाल उठा दिए हैं। उनकी निर्दलीय जीत के बाद बीजेपी के कार्यक्रम में जाने पर पहले से ही विवाद हो रहा है। पहले बीजेपी नेताओं ने उन्हें पार्टी में शामिल होने पर बधाई दी, बाद में इस बात को खारिज किया गया। लेकिन तब तक जदयू में शंका के बीज फूट चुके थे। नतीजा ये हुआ कि जदयू ने अब बीजेपी पर सीधा सवाल दाग दिया है।
राहुल राज की BJP में वापसी पर JDU ने उठाए सवाल
राहुल राज ने हालिया बिहार विधान परिषद चुनाव में सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर जीत दर्ज की थी। उन्होंने JDU के उम्मीदवार आनंद पुष्कर को 1,815 वोटों से हराया था।
राहुल राज पहले BJP से जुड़े हुए थे। सारण शिक्षक सीट NDA में JDU के हिस्से में जाने के बाद उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने का फैसला किया। इसके बाद BJP ने उन्हें छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया था।
चुनाव जीतने के बाद राहुल राज ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की और BJP की विधायक दल की बैठक में भी हिस्सा लिया। इसके बाद उनके BJP में शामिल होने की खबर सामने आई। इसी घटनाक्रम पर JDU ने आपत्ति जताई है।
उमेश कुशवाहा ने BJP के शीर्ष नेतृत्व से मांगा जवाब
JDU प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने कहा कि BJP किसे पार्टी में शामिल करती है और किसे निष्कासित करती है, यह उसका आंतरिक मामला है। हालांकि, उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी नेता को छह साल के लिए निष्कासित किया गया था तो चुनाव जीतने के महज 15 दिन के भीतर उसे वापस लेने की क्या परिस्थिति बनी?
उन्होंने कहा कि NDA की पहचान उसकी एकता है और गठबंधन के सभी दलों को इस तरह के घटनाक्रम पर नजर रखनी चाहिए। उनके बयान से साफ है कि JDU इस मामले को केवल BJP का आंतरिक संगठनात्मक फैसला मानकर छोड़ने के पक्ष में नहीं है।
JDU उम्मीदवारों की हार के बाद बढ़ा विवाद
राहुल राज का मामला अकेला नहीं है। हालिया विधान परिषद चुनाव में दो निर्दलीय उम्मीदवारों ने NDA के JDU प्रत्याशियों को हराया था। सारण शिक्षक सीट से राहुल राज और तिरहुत स्नातक सीट से बंशीधर ब्रजवासी ने जीत दर्ज की।
बंशीधर ब्रजवासी ने JDU के अभिषेक झा को 9,147 वोटों से हराया था। दोनों निर्दलीय विजेताओं ने BJP नेतृत्व से मुलाकात की और NDA सरकार को समर्थन देने की घोषणा की।
इस घटनाक्रम के बाद JDU के भीतर नाराजगी सामने आई। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान गठबंधन के कुछ नेताओं ने JDU उम्मीदवारों के पक्ष में अपेक्षित सहयोग नहीं किया।
आनंद पुष्कर ने भी BJP नेताओं पर उठाए सवाल
सारण शिक्षक सीट पर JDU उम्मीदवार रहे आनंद पुष्कर ने भी गठबंधन के भीतर चुनावी तालमेल को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि NDA की बैठकों में तय हुई रणनीति के अनुसार BJP के कुछ सांसदों और विधायकों ने प्रचार में सहयोग नहीं किया।
पुष्कर ने BJP सांसद राजीव प्रताप रूडी और राधा मोहन सिंह की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि गठबंधन में सहयोग केवल अपने दल के उम्मीदवारों के लिए नहीं, बल्कि सभी सहयोगी दलों के प्रत्याशियों के लिए होना चाहिए।
उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में अपनी आस्था दोहराते हुए कहा कि वह JDU के साथ बने रहेंगे।
निर्दलीय MLC के BJP में शामिल होने पर दलबदल कानून का विवाद
राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी के BJP से जुड़ने के घटनाक्रम ने संवैधानिक सवाल भी खड़े किए हैं। RJD नेता तेजस्वी यादव और सांसद मनोज झा ने दोनों की विधान परिषद सदस्यता रद्द करने की मांग की है।
संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार, कोई व्यक्ति निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतने के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होता है तो उसकी सदस्यता पर अयोग्यता का खतरा हो सकता है। हालांकि, किसी दल को समर्थन देने और औपचारिक रूप से उसकी सदस्यता लेने के बीच कानूनी अंतर है।
विवाद बढ़ने के बाद राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी ने दावा किया कि उन्होंने BJP की औपचारिक सदस्यता नहीं ली, बल्कि NDA सरकार को समर्थन दिया है। BJP प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी दोनों के समर्थन देने की बात कही थी।
इस मामले में अंतिम कानूनी स्थिति संबंधित तथ्यों और विधान परिषद के सभापति के फैसले पर निर्भर करेगी।
NDA की एकजुटता के सामने नई चुनौती
बिहार में BJP और JDU सत्ता में सहयोगी हैं, लेकिन विधान परिषद चुनाव के बाद दोनों दलों के बीच असहजता सामने आई है। JDU नेताओं की नाराजगी का केंद्र केवल राहुल राज की वापसी नहीं, बल्कि चुनाव के दौरान गठबंधन सहयोग और उसके बाद हुए राजनीतिक घटनाक्रम भी हैं।
अब निगाहें BJP के शीर्ष नेतृत्व की प्रतिक्रिया पर हैं। यह भी देखना होगा कि दोनों सहयोगी दल इस विवाद को बातचीत से सुलझाते हैं या आने वाले दिनों में NDA के भीतर मतभेद और खुलकर सामने आते हैं।


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