बिहार में वेतन भुगतान की बड़ी गड़बड़ी, भागलपुर के 350 शिक्षकों के खाते में कई बार पहुंची सैलरी
लखनऊ ,02 नवंबर 2026 | बिहार के शिक्षा विभाग में वेतन भुगतान की गड़बड़ी का बड़ा मामला सामने आया है। भागलपुर जिले में करीब 350 शिक्षकों के बैंक खातों में एक ही महीने में एक से अधिक बार वेतन, मकान किराया भत्ता (HRA), परिवहन भत्ता (CTA) और बकाया राशि भेज दी गई। विभागीय जांच में यह गड़बड़ी वर्ष 2024 से 2026 के बीच सामने आई है।
मामले के बाद शिक्षा विभाग ने अतिरिक्त भुगतान पाने वाले शिक्षकों से रकम वापस करने को कहा है। वित्त विभाग ने भी राज्य के सभी जिलों में वेतन और भत्तों के भुगतान की जांच के निर्देश दिए हैं। शिक्षकों को अपने बैंक खाते और सैलरी स्टेटमेंट की जांच करने की सलाह दी गई है। अतिरिक्त रकम वापस नहीं करने पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
350 शिक्षकों को एक महीने में एक से ज्यादा बार वेतन
इस लिस्ट में टीचरों के नाम, तैनाती, बैंक अकाउंट नंबर और महीने में की गई पेमेंट की पूरी डिटेल दी गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार शिक्षा विभाग की स्थापना शाखा ने BEO को आदेश दिया है कि वो शिक्षकों के सर्विस रिकॉर्ड और बैंक स्टेटमेंट का मिलान कर ज्यादा भेजे गए पैसों की डिटेल निकालें।
- 2024 में सबसे ज्यादा 214 टीचरों के बैंक अकाउंट में एक महीने में एक बार से ज्यादा सैलरी ट्रांसफर हुई।
- साल 2025 में ऐसे 109 मामले सामने आए जब शिक्षकों को एक महीने में एक से ज्यादा बार वेतन दिया गया। ये सभी मामले अकेले पीरपैंती ब्लॉक के हैं।
- साल 2026 में अभी तक 27 ऐसे मामले मिले जिसमें टीचरों को एक महीने में एक बार से ज्यादा भुगतान किया गया।
एक शिक्षक को चार बार तक भेजी गई सैलरी
जांच में कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं, जिनमें एक ही महीने के दौरान चार बार वेतन भेजा गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, पीरपैंती प्रखंड के एक शिक्षक को जुलाई 2025 में चार बार वेतन भुगतान हुआ। इसी महीने एक अन्य शिक्षक के खाते में भी अलग-अलग किस्तों में चार बार राशि भेजी गई।
वहीं, गोपालपुर में पदस्थापित एक शिक्षक को फरवरी से अप्रैल 2024 के बीच कुल छह बार चेक के माध्यम से भुगतान किए जाने का मामला सामने आया।
इन मामलों में विभाग अब बैंक खातों और सेवा संबंधी दस्तावेजों का मिलान कर अतिरिक्त भुगतान की सही रकम का हिसाब तैयार कर रहा है।
संवर्ग परिवर्तन के दौरान हुई गड़बड़ी
प्रारंभिक जांच में अतिरिक्त भुगतान की एक प्रमुख वजह शिक्षकों का संवर्ग परिवर्तन सामने आया है। बिहार में नियोजित शिक्षकों को विशिष्ट शिक्षक, विशिष्ट शिक्षकों को प्रधान शिक्षक या प्रधानाध्यापक और कुछ शिक्षकों को विद्यालय अध्यापक के नए संवर्ग में शामिल किया गया।
इस प्रक्रिया के दौरान पुराने और नए दोनों संवर्गों से वेतन बिल तैयार होने के कारण एक ही शिक्षक के खाते में दोहरा भुगतान होने की आशंका जताई गई है।
जांच में यह भी सवाल उठा है कि पुराने संवर्ग से अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) और अंतिम वेतन प्रमाणपत्र (LPC) जारी हुए बिना नए संवर्ग से भुगतान कैसे शुरू हो गया। विभाग इस बात की पड़ताल कर रहा है कि भुगतान प्रक्रिया में किस स्तर पर चूक हुई।
2 नवंबर तक अतिरिक्त रकम लौटाने का निर्देश
शिक्षा विभाग ने अतिरिक्त वेतन या भत्ता पाने वाले शिक्षकों को राशि सरकारी खजाने में वापस जमा कराने का निर्देश दिया है। भागलपुर में संबंधित शिक्षकों की सूची सत्यापन के लिए भेजी गई है।
वहीं, सीतामढ़ी सहित अन्य जिलों में भी शिक्षकों को अपने सैलरी स्टेटमेंट की जांच करने और अतिरिक्त भुगतान मिलने पर 2 नवंबर 2026 तक राशि जमा कराने को कहा गया है।
निर्देश के अनुसार, नियमित, विशिष्ट और विद्यालय अध्यापक संवर्ग के शिक्षक कोषागार चालान के माध्यम से रकम लौटाएंगे। स्थानीय निकाय के शिक्षकों को संबंधित जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (स्थापना) से संपर्क करके राशि जमा करनी होगी।
निर्धारित समय में रकम वापस नहीं करने और जांच में अतिरिक्त भुगतान की पुष्टि होने पर अनुशासनात्मक एवं कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
केवल शिक्षकों पर नहीं, अधिकारियों की भूमिका की भी होगी जांच
वेतन भुगतान की प्रक्रिया में मेकर, चेकर और अप्रूवर स्तर पर जांच की व्यवस्था होती है। इसके बाद HRMS पोर्टल और CFMS प्रणाली के माध्यम से भुगतान किया जाता है।
ऐसे में विभाग के सामने यह सवाल भी है कि एक ही शिक्षक के नाम पर कई बार वेतन बिल कैसे तैयार और स्वीकृत हो गए। क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक के अनुसार, अतिरिक्त राशि की वसूली प्राथमिकता है। साथ ही यह भी जांच की जाएगी कि भुगतान प्रक्रिया में किस कर्मचारी या अधिकारी की लापरवाही रही।
जांच में दोषी पाए जाने वाले कर्मियों और अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
बिहार के सभी 38 जिलों में वेतन भुगतान की जांच
बिहार सरकार ने वेतन भुगतान में अनियमितताओं को देखते हुए राज्य के सभी 38 जिलों में आंतरिक ऑडिट शुरू कराया है। वित्त विभाग ने अगले महीने का वेतन जारी करने से पहले शिक्षकों, अधिकारियों और गैर-शिक्षण कर्मचारियों के वेतन तथा भत्तों का सत्यापन अनिवार्य किया है।
इससे पहले मोतिहारी, नवादा और भागलपुर में भी वेतन भुगतान से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। कुछ मामलों में फर्जी नामों पर भुगतान और वेतन राशि बढ़ाकर भेजने के आरोपों की जांच चल रही है।
सरकार का जोर अतिरिक्त भुगतान की वसूली के साथ-साथ ऑनलाइन वेतन प्रणाली में नियंत्रण मजबूत करने पर है। अब जांच के बाद यह तय होगा कि कितनी रकम अतिरिक्त भुगतान के रूप में गई और इसके लिए कौन-कौन जिम्मेदार थे।


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