सर्वोच्च न्यायालय ने आदेश तो जारी कर दिए मगर उनका पालन कैसे होगा!
" आलोक गौड़ "
" कबीरा खड़ा बाजार में, मांगे सबकी खैर
ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर l "
नई दिल्ली l माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली में आठ हफ्तों के भीतर दिल्ली के सभी आवारा कुत्तों को पकड़ कर उन्हें स्थायी रूप से उनके लिए विशेष रूप से बनाये घर में रखने और उन्हें दुबारा से सड़कों पर न लौटने देने के आदेश दिए हैं l
यदि सतही तौर पर देखा जाए तो सर्वोच्च न्यायालय का यह आदेश सराहनीय लगता है, क्योंकि आवारा कुत्तों की जिस समस्या से निपटने की जिम्मेदारी राज्य सरकार व दिल्ली नगर निगम और नई दिल्ली नगर पालिका परिषद की थी, उनकी उदासीनता को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय को आवारा कुत्तों के काटने से होने वाली मौतों को देखते हुए इस मामले में स्वत संज्ञान लेते हुए इस तरह के आदेश दिए हैं l
लेकिन व्यावहारिक रूप से इस आदेश का पालन करना लगभग असंभव जैसा ही है l
ऐसा लगता है कि माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने इस तरह का आदेश जारी करने के साथ कुछ तथ्यों की ओर ध्यान नहीं दिया या फिर यह उनके संज्ञान में नहीं लाया गया कि दिल्ली में आवारा कुत्तों की कुल संख्या कितनी है और उनके लिए स्थायी घर बनाने के लिए कितनी जमीन की आवश्यकता होगी l
गौरतलब है कि दिल्ली सरकार से लेकर दिल्ली नगर निगम और नई दिल्ली नगर पालिका परिषद किसी के भी पास जमीन का अधिकार नहीं है l दिल्ली में जमीन केंद्र सरकार के अधीनस्थ दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के पास है l दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम दोनों को ही अपनी विकास संबंधी योजनाओं को अमली जामा पहनाने के लिए उससे जमीन प्राप्त करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ता है l ऐसे में भला दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम दोनों को ही लगभग 10 लाख आवारा कुत्तों के लिए स्थाई रूप से घर बनाने के लिए कितनी जमीन और संसाधन की जरूरत होगी l माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने शायद इसका भी आकलन नहीं किया है l
इसके साथ ही यह सवाल भी पैदा होता है कि 10 लाख आवारा कुत्तों के भरण-पोषण पर जो पैसा खर्च होगा उसकी व्यवस्था कैसे होगी l दिल्ली सरकार तो किसी तरह से अपने बजट में इसका प्रबंध कर लेगी लेकिन वित्तीय संकट से जूझ रही नगर निगम कैसे कर पाएगी l
सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी कहा है कि आवारा कुत्तों की नसबंदी करने के साथ ही उनका टीकाकरण भी किया जाए, फिलहाल दिल्ली नगर निगम के पास कुत्तों की नसबंदी करने के लिए 20 केंद्र हैं, यह नसबंदी केंद्र भी भगवान भरोसे चल रहे हैं, इनमें न तो उचित संख्या में डाक्टर हैं और न ही अन्य कर्मचारी l
सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि मात्र 8 हफ्ते के भीतर 10 लाख आवारा कुत्तों को पकड़ा कैसे जा सकेगा l जबकि तमाम तरह की शिकायतें मिलने के बाद भी दिल्ली नगर निगम प्रतिदिन कुछ ही आवारा कुत्तों को पकड़ पाता है और उन्हें भी नसबंदी और टीकाकरण के बाद सडकों पर छोड़ देता है l
ऐसे में लाखों की संख्या में आवारा कुत्तों को पकड़ने का काम कैसे पूरा होगा, इसका अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है l
वैसे तो दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अपनी आदत के अनुसार आवारा कुत्तों की समस्या के लिए पिछली सरकार और दिल्ली नगर निगम के ऊपर ठीकरा फोड़ने के साथ ही सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का पालन करने का भरोसा दिलाया है l ऐसा करते हुए वह शायद यह भूल गईं की पिछली सरकार के शासनकाल के दौरान भी दिल्ली नगर निगम पर उनकी ही पार्टी भारतीय जनता पार्टी ही काबिज थी और अब भी वह ही नगर निगम में सत्ता में हैं l
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यह तो कहा कि उनकी सरकार आवारा कुत्तों के मामले में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का पूरी तरह से पालन करेगी और इसके लिए योजना बनाएगी लेकिन उन्होंने यह बताने का कष्ट नहीं किया कि उनकी सरकार के पास अलादीन का ऐसा कौन सा चिराग है जिसे घिसकर वह 8 हफ्ते में 10 लाख आवारा कुत्तों के लिए स्थाई घर बना देंगी, न ही उन्होंने यह बताया कि इतनी बड़ी संख्या में कुत्तों की नसबंदी और टीकाकरण करने के लिए डॉक्टर व अन्य कर्मचारियों की व्यवस्था कैसे की जाएगी l
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की मंत्रिपरिषद के बयानवीर मंत्री कपिल मिश्रा ने भी सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे आवारा कुत्तों की समस्या से जूझ रहे नागरिकों को राहत मिलेगी l उनके मुताबिक दिल्ली सरकार इन आदेशों का पालन करने के साथ ही बेसहारा आवारा पशुओं की सहायता करने के लिए हर संभव कदम उठाएगी l कपिल मिश्रा जी ने भी बयान तो दे दिया लेकिन उन्होंने यह खुलासा नहीं किया कि इतने बड़े काम को अंजाम कैसे दिया जाएगा l
यह बात तो सही है कि दिल्ली सहित राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले गुरुग्राम , नोएडा, गाजियाबाद व फरीदाबाद आवारा कुत्तों और अन्य पशुओं की समस्या का सामना कर रहे हैं l सर्वोच्च न्यायालय की ओर से जारी किए गए आदेश के बाद उम्मीद है कि इस समस्या से ज्यादा नहीं तो कुछ हद तक तो निजात मिल पाएगी l यह देखना भी कम दिलचस्प नहीं होगा कि दिल्ली सरकार और दिल्ली नगर निगम इन आदेशों का पालन कैसे करते हैं l


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