दिल्ली में धारा 163 लागू होने के बावजूद पुलिसकर्मियों ने कैसे किया प्रदर्शन?

दिल्ली में धारा 163 लागू होने के बावजूद पुलिसकर्मियों ने कैसे किया प्रदर्शन?

नई दिल्ली,03 नवंबर 2026 | दिल्ली पुलिस मुख्यालय (PHQ) के बाहर पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन ने राजधानी में नई बहस छेड़ दी है। शाहदरा में पुलिस और वकीलों के बीच हुए विवाद के बाद पुलिसकर्मियों ने अपने अधिकारियों के तबादले के विरोध में प्रदर्शन किया। इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने सवाल उठाया कि जब दिल्ली में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू है, तो पुलिसकर्मियों को प्रदर्शन करने की अनुमति कैसे मिली? लोगों ने पुलिस की कार्यशैली पर तंज कसते हुए आम नागरिकों और पुलिसकर्मियों के लिए अलग-अलग नियम होने का सवाल उठाया।

धारा 163 के बावजूद प्रदर्शन कैसे हुआ?

सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा कि नई दिल्ली जिले में धारा 163 लागू होने के बावजूद पुलिसकर्मियों को प्रदर्शन करने की अनुमति कैसे मिली? आम लोगों ने जब अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया, तो उन्हें हिरासत में लिया गया और उनके खिलाफ केस भी दर्ज किए गए। ऐसे में पुलिसकर्मियों के मामले में अलग नियम क्यों अपनाया गया। सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने तंज कसते हुए पूछा कि क्या पुलिस अब अपने से नाराज स्टाफ के खिलाफ भी केस दर्ज करेगी?

पुलिस मुख्यालय के बाहर करीब 100 पुलिसकर्मियों का प्रदर्शन

2 नवंबर को दिल्ली पुलिस मुख्यालय के गेट नंबर-1 के बाहर करीब 100 पुलिसकर्मी इकट्ठा हुए। इनमें महिला पुलिसकर्मी भी शामिल थीं। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में पोस्टर और तख्तियां लेकर अपने अधिकारियों के तबादले का विरोध किया। उनकी मांग थी कि ACP मनस्वी वशिष्ठ और शाहदरा के तत्कालीन SHO अरुण कुमार को उनके पुराने पदों पर बहाल किया जाए।

शाहदरा में पुलिस-वकील विवाद के बाद शुरू हुआ विरोध

इस पूरे विवाद की शुरुआत 23 अक्टूबर को शाहदरा में पार्किंग विवाद के बाद पुलिसकर्मियों और वकीलों के बीच हुई झड़प से हुई थी। घटना के बाद ACP और SHO का तबादला कर दिया गया। इससे पुलिसकर्मियों में नाराजगी बढ़ी। 28 अक्टूबर को वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक भी हुई, लेकिन असंतोष दूर नहीं हुआ। इसके बाद 2 नवंबर को पुलिसकर्मी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करने पहुंचे।

विपक्षी नेताओं ने भी उठाए सवाल

दिल्ली पुलिस के प्रदर्शन पर विपक्षी नेताओं और सामाजिक संगठनों ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन और आम नागरिकों के आंदोलनों के दौरान होने वाली कार्रवाई के बीच अंतर पर सवाल उठाए। इस घटनाक्रम ने पुलिस विभाग के अनुशासन और शिकायत निवारण व्यवस्था को लेकर भी बहस शुरू कर दी।

प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले ACP निलंबित

प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले ACP मनस्वी वशिष्ठ को 3 नवंबर को निलंबित कर दिया गया। अधिकारियों ने उनके आचरण को अनुचित माना। इस कार्रवाई के बाद पुलिस विभाग के भीतर अनुशासन और कर्मचारियों की शिकायतों के समाधान को लेकर चर्चा और तेज हो गई है।

कुल मिलाकर, दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर हुआ यह प्रदर्शन केवल अधिकारियों के तबादले का विरोध नहीं रहा, बल्कि इसने कानून के समान अनुपालन, पुलिस अनुशासन और विभागीय जवाबदेही से जुड़े सवाल भी खड़े कर दिए हैं।