योग दिवस को सफल बनाने के लिए सिने अभिनेत्रियों का सहारा
" आलोक गौड़ "
" कबीरा खड़ा बाजार में मांगे सबकी खैर,
ना काहू से अपनी दोस्ती, ना काहू से बैर। "
नई दिल्ली। शनिवार को विश्व योग दिवस है। लेकिन इस बार दिल्ली में न तो इसका आयोजन ऐतिहासिक इंडिया गेट के लान और न ही किसी बड़े खुले मैदान में होगा। बल्कि इस बार यह इंदिरा गांधी के यमुना वेलोडरम के एक छोटे से हिस्से में महज रस्म अदायगी के तौर पर आयोजित किया जा रहा है। इसके आयोजनकर्ताओं को यह भरोसा नहीं है कि ये छोटा सा स्थान भी भर पाएगा। इसलिए उन्होंने लोगों को योग के इस सरकारी आयोजन में भाग लेने के लिए लुभाने के उद्देश्य से निमंत्रण पत्र पर अभिनेता व अभिनेत्रियों के नाम छप पाए हैं।
भारत सरकार के खेल मंत्रालय की ओर से विश्व योग दिवस के आयोजन के संबंध में भेजे गए निमंत्रण पत्र पर युवा एवं खेल मंत्री डॉ मनसुख मांडवीया के साथ ही फिल्म निर्माता एवं अभिनेता जैकी भगनानी, खूबसूरत अभिनेत्री रुकुल प्रीत सिंह ओर मधुरिमा तुली का नाम प्रकाशित किया गया है। वैसे दिखावे के तौर पर हाकी खिलाड़ी रानी रामपाल व एथलीट प्रियंका गोस्वामी का नाम भी लिखा गया है। इतना ही नहीं इस बार योग दिवस का नाम भी बदल दिया गया है । फिट इंडिया के थे इस बार इसे योग उत्थान का नाम दिया गया है।इतने बड़े सरकारी आयोजन में किसी राजनेता और योग से जुड़ी किसी अहम शख्शियत को न जोड़ना कई तरह के सवाल पैदा करता। इन सवालों में यह भी शामिल है कि खेल मंत्रालय को ही ये यकीन नहीं रह गया है कि लोगों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान और अपील का कोई असर नहीं होगा। या फिर लोगों की समझ में यह आ गया है कि इस तरह के आयोजन का उद्देश्य किसी एक व्यक्ति विशेष को फायदा पहुंचाने के लिए किया गया था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2014 में योग दिवस मनाए जाने की घोषणा की थी। इसके बाद बाकायदा सारे तामझाम के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2015 में इंडिया गेट के सामने राजपथ पर हजारों लोगों की उपस्थित में योग के आसान किए थे। उनके प्रयासों की वजह से 21 जून को विश्व अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस घोषित कर दिया गया।
वैसे तो पिछले कुछ सालों से सरकारी आयोजन को इवेंट बनाने की परम्परा चली आ रही है। बावजूद इसके यह कल्पना करना भी मुश्किल था कि योग दिवस को सफल बनाने ओर इस दिन सरकारी आयोजन में लोगों को आमंत्रित करने के लिए सिने अभिनेत्रियों की जरूरत पड़ेगी।
सरकार ने साल 2020 में योग को खेल के रूप में मान्यता दे दी थी। बावजूद इसके प्रधानमंत्री की एन नाक के नीचे चल रहा दिल्ली विश्वविद्यालय योग के अंतर्गत दाखिला देने के लिए मान्य नहीं मानता है। वह योग को केवल अतिरिक्त गतिविधियों के रूप में स्वीकार करता है। यही वजह है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में योग के शिक्षक पद पर एक भी नियुक्ति नहीं की गई है।
दरअसल योग के प्रति घटती रुचि और विश्वशनीयता के लिए भी वो ही जिम्मेदार हैं, जिन्होंने लोगों को रोग मुक्त रहने के लिए योग अपनाने के लिए प्रेरित किया था। क्योंकि अपने समर्थकों की संख्या और सरकारी संरक्षण के बल पर उन्होंने अपना व्यापारिक साम्राज्य स्थापित कर लिया।
यह उन लोगों में शामिल थे, जिन्होंने ने केवल 2014 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर झूठे आरोप लगा कर आंदोलन किया था बल्कि भारतीय जनता पार्टी को सत्ता में लाने में भी मदद की थी। हालांकि इनकी ओर से लगाए गए आरोपों में एक भी साबित नहीं हुआ है। इतना ही उस समय की जिन संस्थाओं की ओर से दिए गए आंकड़ों के आधार पर झूठ का जो आडंबर फैलाया गया था। उनके मुखिया ने अदालत में गलत आंकड़े देने और सरकार पर झूठे आरोप लगाने के लिए माफी मांग ली। लेकिन इन्हीं आरोपों का सहारा लेकर आंदोलन करने वालों ने अपने कृत्य पर आज तक खेद भी व्यक्त नहीं किया है। उल्टे सरकारी संरक्षण में दिन दूनी रात चौगुनी गति से स्वदेशी के नाम पर खड़े किए गए व्यापारिक साम्राज्य का विस्तार कर रहे हैं। शायद ही उन्हें अब यह याद होगा कि कभी उन्होंने कहा था कि योग से सब कुछ होगा।


RashtriyaPravakta