झुग्गी के बदले मिलेगा पक्का मकान, जानें कौन होगा पात्र और किन दस्तावेजों की होगी जरूरत
नई दिल्ली, 06 नवंबर 2026 | दिल्ली में झुग्गी-झोपड़ी में रहने वाले लाखों परिवारों के लिए बड़ी खबर है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार ने दिल्ली स्लम और झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन नीति 2026 अधिसूचित कर दी है। इसके तहत पात्र परिवारों को झुग्गी के बदले एक कमरे, हॉल और किचन वाला 1-BHK फ्लैट दिया जाएगा। सरकार के मुताबिक, इस योजना से करीब 4 से 5 लाख परिवारों यानी लगभग 20 लाख लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है। नीति में पात्रता, जरूरी दस्तावेज, फ्लैट आवंटन और पुनर्वास की प्रक्रिया तय की गई है।
लाभार्थी को जमा कराने होंगे 1.5 लाख रुपये
नीति में झुग्गी बस्ती के उसी स्थान पर या आसपास पुनर्वास को प्राथमिकता दी गई है। लाभार्थी को 1.50 लाख रुपये मकान के लिए और 5 साल के रखरखाव के लिए 50 हजार रुपये कॉर्पस फंड में जमा कराने होंगे। फ्लैट शुरुआत में 10 साल की लॉक-इन अवधि के साथ लीज होल्ड आधार पर मिलेगा। इसके बाद बकाया रकम, बिजली-पानी बिल, प्रॉपर्टी टैक्स और अन्य शुल्क चुकाने पर मालिकाना हक दिया जाएगा। दिव्यांग सदस्य वाले परिवारों को ग्राउंड फ्लोर पर प्राथमिकता मिलेगी। लाभार्थियों की मौजूदगी में कम्प्यूटराइज्ड ड्रॉ के जरिए आवंटन होगा।
1 जनवरी 2025 से पहले की झुग्गी होना जरूरी
नई नीति के तहत उन्हीं झुग्गीवासियों को पुनर्वास का लाभ मिल सकेगा, जिनकी झुग्गी 1 जनवरी 2025 से पहले अस्तित्व में थी और संबंधित झुग्गी बस्ती भी इस तारीख से पहले मौजूद थी। केवल झुग्गी में रहने का दावा करना पर्याप्त नहीं होगा। लाभार्थी को निर्धारित दस्तावेजों और सरकारी सर्वे में अपनी पहचान तथा निवास साबित करना होगा।
नीति के अनुसार, पात्र व्यक्ति भारतीय नागरिक और कम से कम 18 वर्ष का होना चाहिए। उसका नाम 1 जनवरी 2025 से पहले की किसी मतदाता सूची और सर्वे या संयुक्त सर्वे रिपोर्ट में दर्ज होना भी जरूरी है।
कौन होगा 1-BHK फ्लैट पाने का पात्र?
नीति में पात्रता के लिए कई शर्तें निर्धारित की गई हैं। प्रमुख नियम इस प्रकार हैं:
-
आवेदक भारतीय नागरिक होना चाहिए और उसकी उम्र कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए।
-
झुग्गी 1 जनवरी 2025 से पहले बनी होनी चाहिए।
-
आवेदक का नाम निर्धारित पुरानी मतदाता सूची में दर्ज होना चाहिए।
-
उसका नाम संबंधित सरकारी सर्वे या संयुक्त सर्वे रिपोर्ट में भी होना चाहिए।
-
आवेदक और परिवार के सदस्यों का आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन किया जाएगा।
-
आवेदक या उसके परिवार के किसी सदस्य के नाम भारत में पक्का मकान नहीं होना चाहिए।
-
एक पात्र व्यक्ति को सामान्यतः एक ही आवासीय यूनिट मिलेगी।
-
केवल व्यावसायिक काम के लिए इस्तेमाल होने वाली झुग्गी पर फ्लैट का लाभ नहीं मिलेगा।
कौन-कौन से दस्तावेज होंगे जरूरी?
पात्रता साबित करने के लिए 1 जनवरी 2025 से पहले जारी ऐसा वैध दस्तावेज देना होगा, जिसमें झुग्गी का पता दर्ज हो। नीति में दस्तावेजों के रूप में निम्न विकल्प शामिल हैं:
-
फोटो वाला राशन कार्ड।
-
बिजली का बिल।
-
ड्राइविंग लाइसेंस।
-
पासपोर्ट।
-
सरकारी बैंक या डाकघर की फोटो वाली पासबुक।
इन दस्तावेजों के अलावा मतदाता सूची में नाम, सरकारी सर्वे रिकॉर्ड और आधार आधारित बायोमेट्रिक सत्यापन भी जरूरी होगा। दस्तावेज निर्धारित तारीख से पहले जारी हुए होने चाहिए और पात्रता जांच के समय उसी पते से संबंधित होने चाहिए।
एक परिवार को मिलेगा एक फ्लैट, अलग परिवारों को अलग यूनिट
नीति में परिवार की परिभाषा और फ्लैट आवंटन को लेकर भी नियम बनाए गए हैं। सामान्य तौर पर एक परिवार को एक ही आवासीय यूनिट मिलेगी, भले ही उसके सदस्य अलग-अलग झुग्गियों में रहते हों।
हालांकि, यदि एक ही इमारत की अलग-अलग मंजिलों पर स्वतंत्र परिवार रहते हैं और उनके पास अलग राशन कार्ड या बिजली कनेक्शन जैसे निर्धारित पुराने दस्तावेज हैं, तो वे अलग-अलग फ्लैट के पात्र हो सकते हैं। विवाहित दंपती के नाम पर फ्लैट संयुक्त रूप से आवंटित किया जाएगा।
कहां मिलेगा फ्लैट? मौजूदा जगह से 3 किलोमीटर के दायरे में प्राथमिकता
सरकार ने पुनर्वास के लिए इन-सिटू यानी उसी स्थान पर पुनर्विकास को प्राथमिकता दी है। इसका मतलब है कि संभव होने पर झुग्गी बस्ती की मौजूदा जगह पर ही फ्लैट बनाए जाएंगे। यदि ऐसा संभव नहीं हुआ तो संबंधित बस्ती से 3 किलोमीटर के दायरे में वैकल्पिक आवास देने का प्रयास किया जाएगा।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि लोगों को रोजगार, बच्चों के स्कूल, अस्पताल और रोजमर्रा की सुविधाओं से बहुत दूर न जाना पड़े। पुनर्वास परिसरों में स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य सुविधाएं और खेल के मैदान जैसी सुविधाएं भी विकसित करने का प्रावधान है।
दिव्यांग परिवारों को ग्राउंड फ्लोर पर प्राथमिकता
नई नीति में दिव्यांग सदस्यों वाले परिवारों के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। पात्र दिव्यांग परिवारों को ग्राउंड फ्लोर पर फ्लैट देने में प्राथमिकता मिलेगी। इसके लिए निर्धारित दिव्यांगता प्रमाणपत्र और अन्य पात्रता शर्तें पूरी करनी होंगी।
इसके अलावा, पुनर्वास के बाद आवंटित परिसरों की साझा सुविधाओं, सुरक्षा और रखरखाव की जिम्मेदारी सरकार पहले पांच साल तक उठाएगी। इसके बाद लाभार्थी एसोसिएशन को साझा सुविधाओं के प्रबंधन में शामिल किया जाएगा।
कंप्यूटराइज्ड लॉटरी से होगा फ्लैटों का आवंटन
फ्लैट आवंटन की प्रक्रिया पारदर्शी बनाने के लिए कंप्यूटराइज्ड ड्रॉ यानी लॉटरी का प्रावधान किया गया है। पात्र लाभार्थियों का रिकॉर्ड रखने और दोहरे आवंटन को रोकने के लिए GIS आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म भी विकसित किया जाएगा।
नीति में शिकायत निवारण और अपील की व्यवस्था भी रखी गई है। यदि किसी आवेदक को पात्रता या आवंटन से संबंधित शिकायत है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी बात रख सकेगा।
पुनर्विकास के दौरान यदि परिवारों को अस्थायी रूप से हटाना पड़ता है, तो PPP मॉडल के तहत काम करने वाले डेवलपर को अस्थायी आवास या किराये की व्यवस्था करनी होगी अथवा किराये के लिए आर्थिक सहायता देनी होगी।
क्या हर झुग्गीवासी को मुफ्त मिलेगा फ्लैट?
नहीं, नीति के तहत फ्लैट का लाभ सभी झुग्गीवासियों को स्वतः नहीं मिलेगा। इसके लिए निर्धारित पात्रता और दस्तावेजों की जांच जरूरी है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, लाभार्थियों से फ्लैट के लिए 1.5 लाख रुपये जमा कराने का प्रावधान भी बताया गया है। हालांकि, भुगतान की प्रक्रिया और संबंधित श्रेणी के नियमों को आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार समझना जरूरी है।


RashtriyaPravakta