बीजेपी के ‘जख्म 84’ सम्मेलन में क्यों नहीं पहुंचे रवनीत बिट्टू और नायब सैनी?

बीजेपी के ‘जख्म 84’ सम्मेलन में क्यों नहीं पहुंचे रवनीत बिट्टू और नायब सैनी?

चंडीगढ़, 5 नवंबर 2026 | पंजाब बीजेपी ने 4 नवंबर को चंडीगढ़ में 1984 के सिख-विरोधी नरसंहार के पीड़ितों को याद करने और न्याय की लड़ाई पर चर्चा के लिए ‘जख्म 84’ सम्मेलन आयोजित किया। इस कार्यक्रम में कई वरिष्ठ बीजेपी नेता, पीड़ित परिवारों के सदस्य, चश्मदीद गवाह और कानूनी विशेषज्ञ शामिल हुए। हालांकि, पूर्व केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू और हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय बन गई।

दोनों नेताओं के कार्यक्रम में शामिल नहीं होने को लेकर राजनीतिक अटकलें भी लगाई गईं। लेकिन पार्टी सूत्रों ने उनकी अनुपस्थिति के पीछे अलग-अलग व्यस्तताओं को वजह बताया है।

दोनों नेता इस वजह से नहीं हुए शामिल

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, रवनीत बिट्टू एक पारिवारिक कार्यक्रम में व्यस्त थे। वहीं, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को सम्मेलन के एक सत्र को संबोधित करना था। नायब सिंह गुरुग्राम में फंस गए और कार्यक्रम में शामिल नहीं हो सके। पार्टी पदाधिकारियों ने इन दोनों नेताओं की अनुपस्थिति को लेकर किसी भी तरह की राजनीतिक अटकलों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि इसे लेकर कोई और मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए।

रवनीत बिट्टू पारिवारिक कार्यक्रम में थे व्यस्त

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, रवनीत सिंह बिट्टू के करीबी सहयोगियों ने बताया कि वह एक पारिवारिक कार्यक्रम में व्यस्त थे। इसी वजह से वह चंडीगढ़ में आयोजित सम्मेलन में शामिल नहीं हो सके।

बिट्टू की गैरमौजूदगी इसलिए भी चर्चा में रही, क्योंकि वह 1984 के सिख-विरोधी नरसंहार के मुद्दे पर कांग्रेस को लगातार घेरते रहे हैं। 2024 में बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्होंने कई बार इस घटना को लेकर कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

सितंबर 2024 में उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा था कि 1984 से 2024 तक कांग्रेस नहीं बदली है। इस साल राहुल गांधी की ओर से उन्हें ‘गद्दार’ कहे जाने के बाद भी बिट्टू ने 1984 के नरसंहार का मुद्दा उठाया था।

गुरुग्राम में फंस गए थे मुख्यमंत्री नायब सैनी

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को सम्मेलन के एक सत्र में शामिल होकर संबोधित करना था। लेकिन पार्टी सूत्रों के मुताबिक, वह गुरुग्राम में फंस गए और कार्यक्रम स्थल तक नहीं पहुंच सके।

इस सम्मेलन के अंतिम सत्र में हरियाणा के मुख्यमंत्री को बीजेपी सरकारों की ओर से 1984 के पीड़ित परिवारों के पुनर्वास के प्रयासों पर चर्चा करनी थी। उनकी अनुपस्थिति के कारण यह सत्र निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार नहीं हो सका।

बीजेपी पदाधिकारियों ने दोनों नेताओं की गैरमौजूदगी को सामान्य परिस्थितियों से जुड़ा बताया और कहा कि इसे राजनीतिक नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

क्या था बीजेपी का ‘जख्म 84’ सम्मेलन?

पंजाब बीजेपी ने चंडीगढ़ में ‘जख्म 84 दे’ नाम से एक दिवसीय सम्मेलन और फोटो प्रदर्शनी आयोजित की थी। इसका उद्देश्य 1984 के सिख-विरोधी नरसंहार की घटनाओं, पीड़ितों के संघर्ष, कानूनी लड़ाई और पुनर्वास के मुद्दों पर चर्चा करना था।

कार्यक्रम में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों, पंजाब प्रभारी सतीश पूनिया और पूर्व केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद सहित कई नेता शामिल हुए। सम्मेलन में छह सत्र रखे गए थे।

पीड़ितों और कानूनी विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव

सम्मेलन में 1984 की हिंसा के पीड़ितों और चश्मदीदों ने अपने अनुभव साझा किए। वरिष्ठ अधिवक्ता एचएस फूलका और पूर्व न्यायाधीश एसएन ढींगरा सहित कई कानूनी विशेषज्ञों ने न्याय की लंबी लड़ाई पर चर्चा की।

बीजेपी नेताओं ने सम्मेलन के दौरान कांग्रेस और गांधी परिवार से 1984 की हिंसा को लेकर जवाब और माफी की मांग भी उठाई। पार्टी ने इस आयोजन को पीड़ितों की आवाज और न्याय के संघर्ष को सामने लाने का प्रयास बताया।

इस तरह रवनीत बिट्टू और नायब सैनी की गैरमौजूदगी के पीछे पार्टी सूत्रों ने पारिवारिक कार्यक्रम और गुरुग्राम में व्यस्तता को कारण बताया है। बीजेपी पदाधिकारियों ने इसे किसी राजनीतिक मतभेद से जोड़ने वाली अटकलों को खारिज किया है।