यौन उत्पीड़न मामले में कांग्रेस सांसद को बड़ी राहत, गिरफ्तारी से पहले 7 दिन का नोटिस अनिवार्य
नई दिल्ली, 06 नवंबर 2026 | यौन उत्पीड़न के आरोपों का सामना कर रहे कांग्रेस सांसद और जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के प्रोफेसर रहे अंगोमचा बिमोल अकोइजाम को दिल्ली की अदालत से बड़ी राहत मिली है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया है कि यदि सांसद की गिरफ्तारी या हिरासत में पूछताछ जरूरी हो, तो उससे पहले उन्हें सात कार्यदिवस का लिखित नोटिस देना होगा। अदालत ने स्पष्ट किया कि नोटिस इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से नहीं, बल्कि व्यक्तिगत रूप से दिया जाना चाहिए। यह आदेश 5 नवंबर 2026 को विशेष न्यायाधीश दिग विनय सिंह ने सुनाया।
स्पेशल जज दिग विनय सिंह ने जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि अकोइजम के खिलाफ नोटिस दिए बिना कोई दंडात्मक कार्रवाई न की जाए। अदालत ने उन्हें कानूनी उपाय अपनाने के लिए पर्याप्त समय देने की बात कही है।
गिरफ्तारी से पहले देना होगा सात कार्यदिवस का नोटिस
अदालत ने कहा कि यदि जांच अधिकारी को बिमोल अकोइजाम की गिरफ्तारी या हिरासत में पूछताछ की जरूरत महसूस होती है, तो उन्हें सात कोर्ट कार्यदिवस पहले लिखित नोटिस देना होगा। इसका उद्देश्य सांसद को कानूनी उपाय अपनाने का पर्याप्त समय देना है।
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि अकोइजाम अपने परिवार या कार्यालय के कम से कम दो लोगों के नाम पुलिस को उपलब्ध कराएं। यदि वह दिल्ली में मौजूद नहीं रहते हैं, तो इन लोगों के माध्यम से भी नोटिस की तामील कराई जा सकेगी।
जांच में सहयोग जारी रखने की शर्त
अदालत ने राहत देते हुए यह भी स्पष्ट किया कि अकोइजाम को जांच में सहयोग करना होगा। जांच अधिकारी जब भी उन्हें बुलाएंगे, उन्हें उपस्थित होना पड़ेगा। यदि पूछताछ के लिए उनकी व्यक्तिगत मौजूदगी जरूरी हो, तो पुलिस को मणिपुर से दिल्ली आने-जाने की व्यवस्था के लिए पर्याप्त समय देना होगा।
कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि सांसद जांच में सहयोग नहीं करते हैं, तो दिल्ली पुलिस उचित निर्देश लेने के लिए दोबारा अदालत का रुख कर सकती है। यानी यह राहत जांच से पूरी छूट नहीं है।
11 से 16 छात्राओं की शिकायतों से जुड़ा मामला
बिमोल अकोइजाम के खिलाफ JNU की छात्राओं ने यौन उत्पीड़न और अनुचित टिप्पणियां करने के आरोप लगाए हैं। अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में शिकायतकर्ता छात्राओं की संख्या 11 से 16 बताई गई है। आरोपों के मुताबिक, कुछ छात्राओं ने विवा परीक्षा और कक्षाओं के दौरान यौन संकेतों वाली टिप्पणियां किए जाने की शिकायत की थी। कुछ शिकायतों में परिसर स्थित आवास पर बुलाकर अनुचित व्यवहार करने के आरोप भी शामिल हैं।
इन आरोपों के आधार पर JNU की आंतरिक समिति ने जांच की थी। विश्वविद्यालय के मुख्य सुरक्षा अधिकारी की शिकायत और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर दिल्ली पुलिस ने वसंत कुंज नॉर्थ थाने में FIR दर्ज की।
9 अक्टूबर को JNU ने किया था बर्खास्त
यौन उत्पीड़न से जुड़े आरोपों की आंतरिक जांच के बाद JNU प्रशासन ने 9 अक्टूबर 2026 को बिमोल अकोइजाम को सेवा से बर्खास्त कर दिया था। इसके बाद उन्होंने विश्वविद्यालय के फैसले को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया।
2 नवंबर को दिल्ली हाईकोर्ट ने उनकी बर्खास्तगी के आदेश पर रोक लगा दी थी और विश्वविद्यालय से जवाब मांगा था। इस मामले की अगली सुनवाई जनवरी में निर्धारित की गई है।
कांग्रेस सांसद ने आरोपों को बताया था साजिश
बिमोल अकोइजाम मणिपुर की इनर मणिपुर लोकसभा सीट से कांग्रेस सांसद हैं। उन्होंने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज किया है और अपनी बर्खास्तगी को अनुचित कार्रवाई बताया है। उनका कहना है कि आरोपों के पीछे राजनीतिक मकसद है।
वहीं, पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि जांच के दौरान शिकायतकर्ता छात्राओं की पहचान और उनके बयान जुटाने की प्रक्रिया चल रही है। अदालत के सामने यह भी बताया गया कि सांसद पहले जांच में शामिल हो चुके हैं।
क्या है अदालत के आदेश का मतलब?
अदालत के आदेश का अर्थ यह है कि पुलिस गिरफ्तारी की जरूरत महसूस होने पर निर्धारित सात कार्यदिवस का लिखित नोटिस देगी। हालांकि, इससे सांसद को मामले में क्लीन चिट नहीं मिली है और न ही जांच बंद हुई है। उन्हें जांच में सहयोग करना होगा। आगे की कार्रवाई पुलिस की जांच, उपलब्ध साक्ष्यों और अदालत के निर्देशों के आधार पर होगी।


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