UPI पर MDR के खिलाफ दिल्ली के व्यापारियों का हल्ला बोल, सदर बाजार में सड़क पर उतरे कारोबारी

UPI पर MDR के खिलाफ दिल्ली के व्यापारियों का हल्ला बोल, सदर बाजार में सड़क पर उतरे कारोबारी

नई दिल्ली, 08 अक्टूबर 2026 । दिल्ली के प्रमुख कारोबारी इलाके सदर बाजार में UPI भुगतान पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के खिलाफ व्यापारियों ने प्रदर्शन किया। बुधवार को सदर बाजार बारी मार्केट ट्रेडर्स एसोसिएशन के नेतृत्व में कारोबारियों ने नारेबाजी करते हुए प्रस्तावित शुल्क वापस लेने की मांग की। व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के बाद अब उस पर अतिरिक्त लागत डालना छोटे और मध्यम कारोबारियों के लिए आर्थिक दबाव बढ़ा सकता है।

डिजिटल पेमेंट पर नया बोझ मंजूर नहीं : कारोबारी

प्रदर्शन के दौरान व्यापारियों ने 'व्यापारियों पर नया बोझ, नहीं सहेंगे-नहीं सहेंगे', 'UPI हमारा अधिकार, शुल्क लगाना बंद करो' और 'डिजिटल पेमेंट पर शुल्क बंद करो' जैसे नारे लगाए। व्यापारियों ने सरकार से शुल्क वापस लेने की मांग की। प्रदर्शन में दीपक निम्बल, वरिंदर अरोड़ा, जसविंदर सिंह, दीपक निष्पल, रजनीश राजेश भयना, जसबीर सिंह सरना, बलविंदर सिंह सरना, राजीव सोहर और तरुण सोनी सहित कई व्यापारी मौजूद रहे।

प्रस्तावित व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर 2026 से 2,000 रुपये से अधिक के पात्र Person-to-Merchant यानी P2M UPI लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होना है। प्रति लेन-देन शुल्क की अधिकतम सीमा 300 रुपये रखी गई है। खास बात यह है कि इस शुल्क का भुगतान व्यापारी पक्ष से होना है, ग्राहक से सीधे वसूलने की अनुमति नहीं होगी।

सदर बाजार के व्यापारियों का तर्क है कि थोक कारोबार में मुनाफे का मार्जिन पहले ही सीमित रहता है। ऐसे में हर बड़े डिजिटल भुगतान पर MDR कटने से कारोबारियों की बचत और मुनाफे पर असर पड़ सकता है।

व्यापारियों ने लगाए नारे, फैसला वापस लेने की मांग

प्रदर्शन के दौरान कारोबारियों ने डिजिटल भुगतान को अतिरिक्त शुल्क से मुक्त रखने की मांग की। व्यापारियों ने कहा कि UPI ने बाजारों में भुगतान को आसान, तेज और पारदर्शी बनाया है। ऐसे में अतिरिक्त लागत लगाने के बजाय डिजिटल पेमेंट सिस्टम को और मजबूत करने की जरूरत है।

व्यापारियों ने केंद्र सरकार से प्रस्तावित MDR व्यवस्था पर पुनर्विचार करने और शुल्क वापस लेने की मांग की। उनका कहना है कि छोटे और मध्यम कारोबारियों पर पहले से ही किराया, बिजली, कर्मचारियों का वेतन, टैक्स और अन्य कारोबारी खर्च का दबाव है।

सदर बाजार के कारोबारी संगठनों का कहना है कि कई व्यापारियों का कारोबार कम मार्जिन पर चलता है। ऐसे में 0.4 प्रतिशत की कटौती भी बड़े कारोबार या बड़ी संख्या में डिजिटल भुगतान करने वाले दुकानदारों के लिए महीने के अंत तक महत्वपूर्ण रकम बन सकती है।

कुछ व्यापारियों ने आशंका जताई कि यदि MDR का खर्च व्यापारियों को ही उठाना पड़ा तो कई कारोबारी बड़े UPI भुगतान को हतोत्साहित कर सकते हैं। इससे ग्राहकों को डिजिटल भुगतान के बजाय नकद भुगतान की ओर लौटने के लिए कहा जा सकता है।

सरकार और व्यापारियों के तर्क में अंतर

सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया है कि MDR कोई सरकारी टैक्स या NPCI द्वारा सीधे वसूला जाने वाला शुल्क नहीं है। नए ढांचे में सभी UPI भुगतान प्रभावित नहीं होंगे। व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेंगे। वहीं 2,000 रुपये तक के P2M भुगतान भी MDR से मुक्त रहेंगे।

सरकार के अनुसार छोटे व्यापारियों के लिए भी जीरो-MDR की व्यवस्था जारी रहेगी और करीब 96 प्रतिशत मर्चेंट ट्रांजैक्शन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे। प्रस्तावित शुल्क चुनिंदा 2,000 रुपये से अधिक के मर्चेंट भुगतान पर लागू होगा।

दिल्ली के कई कारोबारी संगठनों ने पहले ही चिंता जताई है कि MDR लागू होने पर बड़े भुगतान के लिए कुछ दुकानदार ग्राहकों को नकद भुगतान का विकल्प दे सकते हैं। व्यापारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में बाजारों में UPI भुगतान तेजी से बढ़ा है और ग्राहक भी डिजिटल पेमेंट के आदी हो चुके हैं।

ऐसे में कारोबारियों का मानना है कि अतिरिक्त शुल्क से डिजिटल भुगतान की गति प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर, सरकार का तर्क है कि MDR व्यवस्था UPI इकोसिस्टम को लंबे समय तक टिकाऊ बनाने के उद्देश्य से लाई गई है।

आगे बढ़ सकता है व्यापारियों का विरोध

सदर बाजार में हुए प्रदर्शन के बाद अब व्यापारिक संगठनों की नजर 15 अक्टूबर से प्रस्तावित नई व्यवस्था पर है। कारोबारी संगठनों ने संकेत दिया है कि यदि MDR व्यवस्था में बदलाव नहीं किया गया तो विरोध को आगे भी तेज किया जा सकता है।

फिलहाल विवाद का मुख्य मुद्दा यही है कि डिजिटल भुगतान के बढ़ते इस्तेमाल के बीच बड़े UPI लेन-देन की लागत कौन वहन करेगा और इसका असर व्यापारियों के मुनाफे पर कितना पड़ेगा। 15 अक्टूबर से लागू होने वाली व्यवस्था के बाद इसके वास्तविक कारोबारी प्रभाव की तस्वीर और साफ हो सकती है।