10 अक्टूबर के CJP प्रदर्शन पर पुलिस का ब्रेक, जंतर-मंतर की अनुमति नहीं
नई दिल्ली, 08 अक्टूबर 2026 । दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को प्रस्तावित CJP के प्रदर्शन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया है। पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था से जुड़े कारणों का हवाला दिया है। वहीं CJP ने प्रदर्शन का ऐलान वापस लेने से इनकार किया है और कहा है कि उसके कार्यकर्ता 10 अक्टूबर को आंदोलन के लिए पहुंचेंगे।
CJP बोली- जंतर मंतर नहीं पहुंचने दिया तो जहां रोकेंगे, वहीं प्रदर्शन
सूत्रों के अनुसार, पुलिस का कहना है कि नई दिल्ली इलाके में धारा 163 लागू है। त्योहारों के सीजन और राजधानी में लगातार चल रही राजनीतिक गतिविधियों के बीच जंतर मंतर पर बड़ी भीड़ जुटने की इजाजत देना सुरक्षा के लिहाज से उचित नहीं है। पुलिस को सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा के साथ-साथ यातायात और आम लोगों की आवाजाही प्रभावित होने की भी आशंका है। CJP के ऐलान के बाद सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हो गई हैं। 10 अक्टूबर को दिल्ली के बॉर्डर, खासकर सिंघु, गाजीपुर और टिकरी बॉर्डर पर निगरानी बढ़ाई जाएगी।
CJP ने संसद मार्ग थाने में दी थी प्रदर्शन की सूचना
CJP के सह-संयोजक सौरव दास ने 7 अक्टूबर को संसद मार्ग थाने पहुंचकर 10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन की औपचारिक सूचना पुलिस को दी थी। संगठन की ओर से कहा गया कि इसका उद्देश्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करना है।
पुलिस की ओर से आवेदन पर अनुमति नहीं दी गई। इसके बाद CJP ने पुलिस की भूमिका और प्रदर्शन की अनुमति की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। संगठन का कहना है कि जंतर-मंतर निर्धारित प्रदर्शन स्थल है और वहां शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति मिलनी चाहिए।
दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को बताया आधार
दिल्ली पुलिस का कहना है कि जंतर-मंतर पर किसी भी बैठक, धरने या प्रदर्शन के लिए सक्षम अधिकारी से पहले अनुमति लेना जरूरी है। पुलिस के मुताबिक, निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रस्तावित कार्यक्रम से कम से कम 10 दिन पहले नई दिल्ली जिले के DCP को आवेदन देना होता है।
पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के एक आदेश और उसके अनुपालन में जारी दिल्ली पुलिस के स्टैंडिंग ऑर्डर का भी हवाला दिया है। इसके अलावा नई दिल्ली इलाके में वर्तमान सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था की स्थिति को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के लिए जगह का निर्धारण संभावित भीड़ के आधार पर भी किया जाता है। करीब 1,000 तक लोगों के प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर, 1,000 से 50,000 तक की भीड़ के लिए रामलीला मैदान और इससे अधिक बड़ी भीड़ के लिए बुराड़ी ग्राउंड निर्धारित किया गया है।
पुलिस का कहना है कि संवेदनशील और प्रतिबंधित क्षेत्रों में प्रदर्शन या जुलूस की अनुमति अलग नियमों के तहत नियंत्रित होती है।
नई दिल्ली इलाके में BNSS की धारा 163 भी लागू
10 अक्टूबर के प्रदर्शन को लेकर एक और महत्वपूर्ण पहलू नई दिल्ली इलाके में लागू भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता यानी BNSS की धारा 163 है। ऐसे में किसी बड़े जमावड़े या प्रदर्शन को लेकर पुलिस की ओर से सुरक्षा और कानून-व्यवस्था का आकलन महत्वपूर्ण हो जाता है।
Aaj Tak की रिपोर्ट के अनुसार, CJP को प्रदर्शन की सूचना देने की प्राप्ति तो मिल गई, लेकिन उस समय तक पुलिस की ओर से अनुमति नहीं दी गई थी।
अनुमति नहीं मिलने के बावजूद CJP की ओर से प्रदर्शन जारी रखने की बात कही गई है। संगठन का कहना है कि देश के अलग-अलग हिस्सों से युवा दिल्ली पहुंचेंगे। CJP ने इसे केवल अपने संगठन का प्रदर्शन नहीं बल्कि व्यापक युवा आंदोलन के रूप में पेश करने की बात कही है।
हालांकि, बिना अनुमति प्रदर्शन करने की स्थिति में पुलिस की ओर से कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है। इसलिए 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर खास नजर रहेगी।
CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा विरोध
CJP विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध कर रही है और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने तीन सदस्यीय आयोग में मतभेद की खबरों को खारिज करते हुए कहा है कि SIR से जुड़े फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
इससे पहले भी दिल्ली में CEC के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी थी। ऐसे में 10 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर प्रशासन के सामने सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती बनी हुई है।


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