ग्रेटर नोएडा PNB घोटाले की महीनेभर पहले से थी भनक,मैनेजर समेत कर्मचारियों पर मामला दबाने का आरोप
ग्रेटर नोएडा,04 नवंबर 2026 | ग्रेटर नोएडा के पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की ऐच्छर स्थित शाखा में खाताधारकों की रकम में कथित हेराफेरी का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। जांच में सामने आया है कि बैंक में वित्तीय अनियमितताओं की जानकारी मिलने के बाद भी समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। आरोप है कि शाखा प्रबंधन और कुछ कर्मचारी मामले को दबाने में जुटे रहे। इस बीच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने 3 नवंबर को बैंक की एक महिला कर्मचारी और एक निजी व्यक्ति को गिरफ्तार किया है।
बैंक के अधिकारी और कर्मचारी कई बार खाताधारकों के घर पहुंचे। उनसे शिकायत नहीं करने की अपील की गई और जल्द ही पूरी रकम वापस कराने का आश्वासन दिया गया। पीड़ितों का आरोप है कि अगर खाताधारक खुद सामने आकर फर्जी लेनदेन का खुलासा नहीं करते तो बैंक इस पूरे मामले को साइबर फ्रॉड बताकर जांच की दिशा भटकाने की कोशिश में जुट गया था।
करीब तीन साल से चल रहा था कथित फर्जीवाड़ा
बैंक की प्रारंभिक जांच के अनुसार, ग्राहकों के खातों से अनधिकृत लेनदेन का सिलसिला करीब तीन साल से चल रहा था। आरोप है कि बैंक की एक कार्यालय सहायक ने छह अन्य अधिकारियों के यूजर आईडी और पासवर्ड का इस्तेमाल करके ग्राहकों के बचत खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से रकम ट्रांसफर की।
जांच में यह भी सामने आया कि कई FD को समय से पहले बंद किया गया और उनकी रकम दूसरे खातों में भेजी गई। कथित तौर पर लेनदेन से जुड़े वाउचर भी गायब कर दिए गए, जिससे गड़बड़ी का पता लगाना मुश्किल हो गया।
शिकायत मिलने के बाद भी उठे सवाल
मामले का खुलासा तब हुआ जब एक महिला खाताधारक संगीता ने 16 सितंबर को पासबुक अपडेट कराई। इस दौरान उन्हें अपने खाते से तीन ऐसे लेनदेन की जानकारी मिली, जिन्हें उन्होंने मंजूरी नहीं दी थी। उन्होंने बैंक अधिकारियों से इसकी शिकायत की।
बैंक की शिकायत के मुताबिक, शुरुआत में संबंधित कर्मचारी ने इन लेनदेन को प्रॉपर्टी में निवेश से जुड़ा बताकर सही ठहराने की कोशिश की। लेकिन जब बैंक रिकॉर्ड में भुगतान से संबंधित वाउचर नहीं मिले, तो मामला संदिग्ध हो गया और विस्तृत जांच शुरू की गई।
मैनेजर समेत पांच कर्मचारी निलंबित
शुरुआती शिकायतों और विभागीय जांच के बाद बैंक ने शाखा प्रबंधक समेत पांच कर्मचारियों को निलंबित किया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बैंक के वरिष्ठ अधिकारियों को इससे पहले भी शाखा में गड़बड़ी की जानकारी मिली थी और विजिलेंस जांच शुरू कराई गई थी।
अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि दूसरे कर्मचारियों के लॉगिन का इस्तेमाल उनकी जानकारी के बिना किया गया या किसी स्तर पर मिलीभगत भी थी। केवल किसी अधिकारी की यूजर आईडी से लेनदेन होना उसकी संलिप्तता साबित नहीं करता।
ग्राहकों के 10.24 करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप
PNB की शिकायत में करीब 10.24 करोड़ रुपये के अनधिकृत लेनदेन का उल्लेख है। हालांकि, शुरुआती खबरों में ग्राहकों ने करीब 35 करोड़ रुपये तक की गड़बड़ी की आशंका जताई थी। पुलिस और मीडिया रिपोर्टों में भी अलग-अलग रकम सामने आई है। इसलिए अंतिम नुकसान और प्रभावित खातों की संख्या जांच तथा बैंक के मिलान के बाद ही स्पष्ट होगी।
कुछ खाताधारकों ने अपनी जमा पूंजी और जमीन अधिग्रहण के मुआवजे की रकम गायब होने की शिकायत भी की है। कई ग्राहक बैंक शाखा के बाहर विरोध प्रदर्शन कर चुके हैं।
CBI ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया
CBI ने 29 अक्टूबर को बैंक की शिकायत के आधार पर मामला दर्ज किया था। इसके बाद 3 नवंबर को एजेंसी ने बैंक की कार्यालय सहायक और एक निजी व्यक्ति को गिरफ्तार किया। निजी आरोपी को पुणे से पकड़ा गया और एजेंसी ने उसका ट्रांजिट रिमांड हासिल किया।
CBI अब कथित धन के लेनदेन, फर्जी खातों, FD बंद करने की प्रक्रिया और अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। बैंक ने भी ग्राहकों की शिकायतों की जांच और वास्तविक दावों के निपटारे की प्रक्रिया शुरू की है।


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